संत से संसद तक का सफर: जानें कौन हैं डॉ. वेदांती..जिन्होंने 12 साल की उम्र में छोड़ दिया था घर…राम मंदिर आंदोलन का किया नेतृत्व

Dr. Ram Vilas Das Vedanti

संत से संसद तक का सफर: जानें कौन हैं डॉ. वेदांती..जिन्होंने 12 साल की उम्र में छोड़ दिया था घर…राम मंदिर आंदोलन का किया नेतृत्व

राम मंदिर आंदोलन के अग्रणी संत और दो बार सांसद रहे डॉ. रामविलास दास वेदांती के निधन से देश और प्रदेश में शोक की लहर नजर आ रही है। वे लंबे समय से अस्वस्थ थे और मध्य प्रदेश के रीवा स्थित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से न सिर्फ अयोध्या, बल्कि देशभर में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संत समाज और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। डॉ.वेदांती का अंतिम संस्कार अयोध्या में किया जाएगा। उनके निधन को राम मंदिर आंदोलन के एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है।

कम उम्र में त्याग, संत जीवन की शुरुआत

डॉ.रामविलास दास वेदांती का जीवन त्याग, तपस्या और संघर्ष की मिसाल रहा। बताया जाता है कि उन्होंने महज 12 वर्ष की उम्र में घर छोड़ दिया था और संत जीवन को अपना लिया था। बहुत कम उम्र में वे वैराग्य के मार्ग पर चल पड़े और बाद में रामभक्ति और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में जीवन समर्पित कर दिया। उनका जुड़ाव राम जन्मभूमि आंदोलन के शुरुआती दौर से ही हो गया था। यही कारण है कि उन्हें “राम मंदिर आंदोलन का अग्रणी संत” कहा जाता है।

राम मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका

डॉ.वेदांती राम मंदिर आंदोलन के उन प्रमुख चेहरों में से थे, जिन्होंने सड़क से लेकर संसद तक इस मुद्दे को लगातार उठाया। आंदोलन के शुरुआती वर्षों में जब यह विषय विवादों और संघर्षों से घिरा हुआ था, तब भी वे पूरी दृढ़ता के साथ आंदोलन के पक्ष में खड़े रहे। उन्होंने संत समाज के साथ मिलकर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से रखा। उनकी पहचान एक ऐसे संत की थी, जो आध्यात्मिकता के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक मंच पर भी मुखर रहा।

संसद तक पहुंचा संत का स्वर

डॉ.वेदांती का राजनीतिक सफर भी उल्लेखनीय रहा। वे दो बार लोकसभा सांसद चुने गए। 1996 में उत्तर प्रदेश की जौनपुर स्थित मछलीशहर सीट से 1998 में प्रतापगढ़ लोकसभा सीट से सांसद रहते हुए उन्होंने संसद में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। वे अक्सर कहते थे कि राम मंदिर केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक है। उनकी छवि एक ऐसे सांसद की रही, जो संत परंपरा और संसदीय मर्यादा—दोनों को साथ लेकर चला।

बीमारी और अंतिम समय

पिछले कुछ समय से डॉ. वेदांती की तबीयत खराब चल रही थी। उन्हें इलाज के लिए मध्य प्रदेश के रीवा स्थित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका और अंततः उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन की खबर मिलते ही अयोध्या सहित कई धार्मिक स्थलों पर शोक व्यक्त किया गया। संत समाज, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता और उनके समर्थक गहरे दुख में हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जताया शोक

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. वेदांती के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि डॉ. वेदांती का जीवन रामभक्ति, राष्ट्र और संस्कृति के लिए समर्पित था। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार व अनुयायियों को संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।

आंदोलन का एक मजबूत स्तंभ हुआ कमजोर

डॉ. वेदांती उन संतों में से थे, जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का विषय बनाया। वे मंचों से लेकर संसद तक बेबाकी से अपनी बात रखते थे। आंदोलन के कठिन दौर में भी वे पीछे नहीं हटे और अपने विचारों पर अडिग रहे। आज जब अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो चुका है, तब उनके निधन को आंदोलन से जुड़े लोग भावनात्मक क्षति के रूप में देख रहे हैं। कई संतों और नेताओं का कहना है कि मंदिर निर्माण का सपना साकार होते देखने वालों में डॉ. वेदांती का नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा।

एक युग का अंत

डॉ.रामविलास दास वेदांती का जीवन संत परंपरा और लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनूठे संगम का प्रतीक रहा। 12 वर्ष की उम्र में घर छोड़ने से लेकर संसद के उच्च सदन तक पहुंचने का उनका सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। उनका निधन राम मंदिर आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के समाप्त होने जैसा है, लेकिन उनके विचार और योगदान हमेशा स्मरणीय रहेंगे। डॉ. वेदांती का अंतिम संस्कार अयोध्या में किया गया। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए अयोध्या लाया गया। जहां बड़ी संख्या में संत, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता और श्रद्धालु उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

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