S-500, सुखोई-57 से लेकर ऑयल डील तक… पुतिन के दिल्ली दौरे में इन 10 बड़े सौदों पर दुनिया की नजर
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूस को लेकर अमेरिकी प्रतिबंधों की गर्मी लगातार बढ़ रही है। ऐसे माहौल में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत की राजकीय यात्रा पर दिल्ली आना न सिर्फ ऐतिहासिक, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है। लगभग तीन साल बाद यह पुतिन की पहली भारत यात्रा है। इस बार दांव कहीं बड़ा है—रक्षा सौदे, ऊर्जा सहयोग, व्यापार, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय समीकरणों में भारत की बढ़ती भूमिका।
पुतिन की इस दो दिवसीय यात्रा में भारत-रूस के बीच कम से कम 10 बड़े समझौतों और सामरिक सहयोग की घोषणाओं की उम्मीद की जा रही है, जिन पर दुनिया की नजर टिकी हुई है।
पुतिन का दिल्ली में पूरा शेड्यूल
गुरुवार शाम 6 बजे: पुतिन का दिल्ली आगमन
शाम 7 बजे: 7 लोक कल्याण मार्ग पर पीएम मोदी की ओर से डिनर
शुक्रवार सुबह 9:15 बजे: राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत
सुबह 10 बजे: राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि
सुबह 11 बजे: हैदराबाद हाउस में 23वीं भारत-रूस वार्षिक शिखर बैठक
बैठक के बाद: भारत मंडपम में इंडिया-रशिया बिजनेस फोरम
शाम: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा औपचारिक भोज
इसके बाद पुतिन अपने दौरे का समापन कर रूस रवाना होंगे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा दोनों देशों की विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देगी और कई “महत्वपूर्ण रणनीतिक परिणाम” दे सकती है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह दौरा?
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद विश्व राजनीति में ध्रुवीकरण बढ़ा है। ऐसे समय में भारत—जो अमेरिका, यूरोप, रूस और मध्य एशिया से समान रूप से संबंध बनाए रखता है—एक अहम संतुलनकारी शक्ति के रूप में उभरा है।
पुतिन के इस दौरे का प्राथमिक फोकस
रक्षा सहयोग में विस्तार
ऊर्जा व पेट्रोलियम सप्लाई
व्यापार में नई संरचना
वैश्विक भू-राजनीतिक मुद्दे
यूक्रेन युद्ध पर भारत की भूमिका
बहुध्रुवीय दुनिया में भारत-रूस साझेदारी
दुनिया जिन 10 बड़े सौदों पर नजर रख रही है
1. S-500 एयर डिफेंस सिस्टम पर संभावित बातचीत
भारत पहले से रूस का S-400 सिस्टम खरीद चुका है। अब चर्चा है कि S-500 सिस्टम पर बातचीत हो सकती है। यह दुनिया के सबसे उन्नत मिसाइल-रोधी सिस्टमों में से एक माना जाता है।
2. सुखोई-57 (Su-57) फाइटर जेट सहयोग
रूस भारत को अगली पीढ़ी के Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट्स के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का प्रस्ताव दे सकता है।
HAL–United Aircraft Corporation के बीच संयुक्त उत्पादन की संभावनाएँ भी मीडिया रिपोर्टों में चर्चा में हैं।
3. ब्रह्मोस-2 हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम
भारत-रूस संयुक्त ब्रह्मोस प्रोजेक्ट का दूसरा चरण हाइपरसोनिक क्षमता से जुड़ा है। इस दौरे में इस पर औपचारिक समझौता हो सकता है।
4. न्यूक्लियर एनर्जी कॉरिडोर का विस्तार
कुडनकुलम के अतिरिक्त भारत में 5 और रूसी-डिज़ाइन वाले परमाणु रिएक्टरों पर गहन चर्चा तय मानी जा रही है।
5. रक्षा उत्पादन में ‘मेक इन इंडिया’ मॉडल पर नए समझौते
भारत रूस से सिर्फ खरीद नहीं, बल्कि घरेलू उत्पादन पर जोर दे रहा है। AK-203 राइफल्स के बाद कई नए प्रोडक्शन प्रोजेक्ट्स सामने आ सकते हैं।
6. सस्ती क्रूड ऑयल सप्लाई पर नई डील
पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण रूस भारत को सस्ते तेल की सप्लाई बढ़ाने के लिए तैयार है। यह दौरा नई “दीर्घकालिक तेल आपूर्ति संधि” को जन्म दे सकता है।
7. नेचुरल गैस और LNG कॉरिडोर
रूस भारत में LNG इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए निवेश और सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स बढ़ाने का प्रस्ताव दे सकता है।
8. रूपये-रूबल भुगतान व्यवस्था और ट्रेड कॉरिडोर
दोनों देशों के बीच 50 बिलियन डॉलर व्यापार का नया लक्ष्य संभव है। दक्षिणी एशिया–मध्य एशिया–आर्कटिक तक “नया ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर” इस यात्रा का बड़ा एजेंडा है।
9. फार्मा, एग्रो और मशीनरी क्षेत्र में सहयोग
भारत की दवाइयों और कृषि उत्पादों के लिए रूस बड़ा बाजार है। इस बार इन क्षेत्रों को लेकर 3–4 नए समझौते संभव हैं।
10. स्पेस सहयोग – गगनयान मिशन और उससे आगे
भारत-रूस अंतरिक्ष सहयोग पुराना है। इस बार मानव मिशन और तकनीकी साझेदारी पर नई दस्तावेज़ी सहमति की चर्चा है।
रक्षा सहयोग—दौरे का सबसे मजबूत स्तंभ
भारत और रूस का रक्षा सहयोग दशक भर पुराना है। 30% से अधिक भारतीय सैन्य उपकरण रूसी तकनीक पर आधारित हैं।
इस यात्रा में इन विषयों पर विशेष फोकस रहेगा।
उन्नत सबमरीन तकनीक
फाइटर जेट इंजन टेक्नोलॉजी
मिसाइल डिफेंस
स्पेयर पार्ट्स की निर्बाध सप्लाई
रूस से संयुक्त प्रोडक्शन
थल–नभ–जल तीनों सेनाओं के लिए अपग्रेड प्रोग्राम
यह भारत की स्वदेशी सामरिक क्षमता को और तेज करेगा।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति का दबाव और भारत की भूमिका
अमेरिका रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हुए है, लेकिन भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर रूस से तेल खरीद, रक्षा सहयोग और कूटनीतिक संतुलन को बनाए रखा है।
पुतिन का यह दौरा अमेरिका और यूरोप की भी नजरों में है क्योंकि भारत G20 की मेजबानी कर चुका है। भारत वैश्विक दक्षिण का नेतृत्व कर रहा है। रूस के लिए भारत विश्व का सबसे बड़ा स्थिर बाजार बन गया है। ऐसे में यह यात्रा भविष्य के वैश्विक समीकरण को प्रभावित कर सकती है।
कई मोर्चों पर बढ़ सकता है सहयोग
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस यात्रा का अंतिम परिणाम भारत-रूस संबंधों को कम से कम एक दशक आगे बढ़ा देगा।
इन क्षेत्रों में बड़े कदम देखने को मिल सकते हैं:
ऊर्जा सुरक्षा
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर
इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश
भू-रणनीतिक संतुलन
रक्षा–उद्योगीकरण
पुतिन का यह भारत दौरा सामान्य कूटनीतिक यात्रा नहीं है।
यह भारत-रूस संबंधों में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है—जिसमें रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक राजनीति के कई बड़े फैसले छिपे हुए हैं। दुनिया की नजरें इस बात पर रहेंगी कि दोनों देशों के नेता किस तरह नए समीकरण बनाते हैं और कौन-कौन से सौदे भारत की रणनीतिक क्षमता को नई ऊंचाई देते हैं। (प्रकाश कुमार पांडे )





