पढ़ाई से प्रतियोगी परीक्षा तक, 6 मुफ्त डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा…किताबों और कोचिंग के खर्च के बीच डिजिटल शिक्षा बना विकल्प
पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि सही अध्ययन सामग्री तक आसान और मुफ्त पहुंच भी है। तस्वीर में दी गई जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार की विभिन्न डिजिटल पहलों ने स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं तक विद्यार्थियों के लिए बड़ी मात्रा में अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई है।
खास बात यह है कि इन प्लेटफॉर्म पर किताबों के अलावा वीडियो, ऑडियो, प्रश्नपत्र, मॉक टेस्ट, ऑनलाइन कोर्स और दूसरी अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध है। इससे महंगी कोचिंग और अतिरिक्त अध्ययन सामग्री पर निर्भरता कम करने का विकल्प विद्यार्थियों के सामने आता है।
1. दीक्षा: कक्षा 1 से 12 तक डिजिटल पढ़ाई
दीक्षा पर कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए किताबें, वीडियो, वर्कशीट और अन्य डिजिटल संसाधन उपलब्ध हैं। किताबों में दिए गए क्यूआर कोड के माध्यम से भी संबंधित वीडियो और सामग्री तक पहुंच बनाई जा सकती है। हिंदी, अंग्रेजी के साथ कई क्षेत्रीय भाषाओं में सामग्री उपलब्ध होने से इसका दायरा और बढ़ता है।
2. स्वयं: 9वीं से पीजी तक ऑनलाइन पाठ्यक्रम
स्वयं प्लेटफॉर्म पर 9वीं कक्षा से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन तक के विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। IIT, IIM, NCERT, IGNOU और दूसरी संस्थाओं के विशेषज्ञ इन पाठ्यक्रमों से जुड़े हैं। कोर्स की पढ़ाई मुफ्त है, हालांकि प्रमाणपत्र के लिए परीक्षा शुल्क देना पड़ सकता है।
3. NCERT: किताबें सीधे पीडीएफ में
NCERT की वेबसाइट से कक्षा 1 से 12 तक की पाठ्यपुस्तकें मुफ्त पीडीएफ के रूप में डाउनलोड की जा सकती हैं। हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू में उपलब्ध किताबें विद्यार्थियों के लिए बुनियादी अध्ययन सामग्री का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। यही सामग्री JEE और NEET जैसी परीक्षाओं की तैयारी में भी उपयोगी हो सकती है।
4. NDLI: लाखों अध्ययन संसाधनों का डिजिटल भंडार
नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया में स्कूली विद्यार्थियों से लेकर शोधार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों तक के लिए किताबें, शोधपत्र, वीडियो और दूसरे संसाधन उपलब्ध हैं। इसका बड़ा फायदा यह है कि विद्यार्थी अपनी जरूरत और पढ़ाई के स्तर के अनुसार सामग्री खोज सकते हैं।
5. ई-पाठशाला: किताबों से आगे ऑडियो-वीडियो सामग्री
ई-पाठशाला शिक्षा मंत्रालय और NCERT की पहल है। इसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए किताबों के साथ ऑडियो, वीडियो और अन्य शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध है। मोबाइल ऐप के जरिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
6. पीएम ई-विद्या: इंटरनेट न हो तो भी पढ़ाई
पीएम ई-विद्या का उद्देश्य डिजिटल माध्यमों के साथ ऐसे विद्यार्थियों तक भी शिक्षा पहुंचाना है, जहां इंटरनेट की सुविधा सीमित है। इसके तहत टीवी चैनल, रेडियो और पॉडकास्ट जैसे माध्यमों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ा गया है। यानी ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा न होने पर भी वैकल्पिक माध्यम उपलब्ध हैं।
एक्सक्लूसिव विश्लेषण: असली बदलाव सामग्री की कीमत में नहीं, पहुंच में है
इन छह प्लेटफॉर्म को एक साथ देखें तो तस्वीर साफ होती है। डिजिटल शिक्षा अब सिर्फ ऑनलाइन वीडियो देखने तक सीमित नहीं है। स्कूल की किताब से लेकर उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी, शोध सामग्री और ऑडियो-वीडियो संसाधन तक एक बड़े डिजिटल नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं।
तस्वीर में दिए आंकड़ों के मुताबिक, दीक्षा पर 2.25 करोड़ से ज्यादा शिक्षक और 579 करोड़ से ज्यादा लर्निंग सेशन दर्ज किए जा चुके हैं। स्वयं पर 5.80 करोड़ से ज्यादा नामांकन, जबकि NDLI पर 11.5 करोड़ से ज्यादा डिजिटल संसाधन बताए गए हैं।
इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि विद्यार्थी की आर्थिक स्थिति और उसका भौगोलिक स्थान अध्ययन सामग्री तक पहुंच में पहले जितनी बड़ी बाधा न रहे। हालांकि, मुफ्त सामग्री उपलब्ध होना अपने आप में सफलता की गारंटी नहीं है। उसकी गुणवत्ता, भाषा, इंटरनेट या डिवाइस की उपलब्धता और विद्यार्थी द्वारा नियमित उपयोग भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
निष्कर्ष यही है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने पढ़ाई का एक ऐसा विकल्प जरूर तैयार किया है, जहां किताब, क्लास, वीडियो, परीक्षा और संदर्भ सामग्री एक ही डिजिटल इकोसिस्टम में मिल सकती है।





