25 हजार की नौकरी से करोड़ों की कमाई, ट्रक ड्राइवर से बने डिजिटल स्टार

From a ₹25000 job to earnings of crores truck driver turned digital star

झारखंड के जामताड़ा के रहने वाले राजेश रवानी की कहानी सिर्फ एक ट्रक ड्राइवर के करोड़पति बनने की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताती है कि सोशल मीडिया ने कमाई और पहचान के पुराने पैमाने किस तरह बदल दिए हैं। कभी 25 से 30 हजार रुपये महीने कमाने वाले राजेश आज अपने ट्रक को ही चलते-फिरते लग्जरी कमरे में बदल चुके हैं।

राजेश करीब 25 साल से ट्रक चला रहे हैं। हाईवे पर ट्रक रोककर मटन, चिकन और मछली जैसे देसी व्यंजन बनाने का उनका शौक धीरे-धीरे कंटेंट में बदल गया। शुरुआत में वह अपने बनाए वीडियो परिवार को व्हाट्सऐप पर भेजते थे। बाद में उनके बेटे ने 2021 में इन्हीं वीडियो को यूट्यूब पर डालना शुरू किया। एक वीडियो में चेहरा दिखाने के बाद कहानी ने नया मोड़ लिया और लाखों लोगों तक राजेश की पहुंच बन गई।

ट्रक की स्टीयरिंग से सोशल मीडिया की कमाई तक

राजेश के वीडियो की खासियत महंगे सेट या बड़े स्टूडियो नहीं, बल्कि ट्रक, हाईवे, देसी खाना और एक आम ड्राइवर की जिंदगी रही। यही सादगी डिजिटल दर्शकों को पसंद आई।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उनका यूट्यूब चैनल 30 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर पार कर चुका है। इंस्टाग्राम पर करीब 20 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी बड़ी संख्या में दर्शक हैं। यानी जिस मोबाइल कैमरे से कभी परिवार के लिए वीडियो बनते थे, वही कैमरा राजेश के लिए डिजिटल कमाई का जरिया बन गया।

रिपोर्टों में राजेश ने बताया है कि ट्रक चलाकर उनकी मासिक कमाई करीब 25 से 30 हजार रुपये थी, जबकि यूट्यूब से उनकी औसत कमाई 4 से 5 लाख रुपये तक पहुंची और कुछ महीनों में यह 18 लाख रुपये तक भी गई। हालांकि सोशल मीडिया की कमाई विज्ञापन, व्यूज, ब्रांड डील और दूसरे स्रोतों के कारण महीने-दर-महीने बदल सकती है।

अब ट्रक नहीं, चलता-फिरता महल

राजेश की सफलता का सबसे बड़ा प्रतीक उनका नया लग्जरी ट्रक है। दावा है कि इसके केबिन को तैयार करने में करीब 2 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। अंदर एसी, बेहतर लाइटिंग, आरामदायक सोने-बैठने की व्यवस्था और कई आधुनिक सुविधाएं इसे सामान्य ट्रक के केबिन से बिल्कुल अलग बनाती हैं।

यानी कभी जिस ट्रक को राजेश सिर्फ रोजी-रोटी का साधन मानकर चलाते थे, आज वही ट्रक उनकी पहचान का हिस्सा बन चुका है।

इस कहानी का बड़ा पहलू यह है कि राजेश ने अपनी मौजूदा जिंदगी को ही कंटेंट बना दिया। उन्हें किसी फिल्मी दुनिया में जाने या कोई नया हुनर सीखने की जरूरत नहीं पड़ी। ट्रक चलाना, हाईवे पर खाना बनाना और अपने अनुभव कैमरे में रिकॉर्ड करना ही उनका डिजिटल ब्रांड बन गया।

25-30 हजार रुपये महीने से लाखों रुपये महीने तक पहुंचने की यह छलांग बताती है कि सोशल मीडिया ने आम पेशे को भी बड़े डिजिटल अवसर में बदलने की क्षमता पैदा की है। राजेश रवानी के मामले में ट्रक की स्टीयरिंग और स्मार्टफोन का कैमरा, दोनों मिलकर एक ऐसी कहानी लिख रहे हैं, जिसमें हाईवे अब सिर्फ सफर की जगह नहीं, बल्कि कंटेंट और कमाई का प्लेटफॉर्म भी बन गया है।

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