पुणे के विकास की मजबूत आवाज़ खामोश: पूर्व सांसद सुरेश कलमाड़ी का निधन
पुणे शहर के विकास में अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व सांसद और रेल राज्य मंत्री सुरेश कलमाड़ी का मंगलवार को शहर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 80 वर्ष के थे और कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन से पुणे की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई है। कांग्रेस पार्टी ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए कहा कि शहर ने अपने विकास के एक प्रमुख स्तंभ को खो दिया है।
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पुणे के विकास पुरुष नहीं रहे
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पूर्व सांसद सुरेश कलमाड़ी निधन
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पुणे राजनीति का एक युग समाप्त
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पुणे के विकास और संस्कृति के अग्रदूत थे कलमाड़ी
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कलमाड़ी के निधन से शोक
सुरेश कलमाड़ी का राजनीतिक सफर लंबा और प्रभावशाली रहा। वे पहली बार 1980 में कांग्रेस (एस) के टिकट पर राज्यसभा सांसद चुने गए। इसके बाद 1986 और 1992 में वे दोबारा राज्यसभा पहुंचे। 1996 में उन्होंने लोकसभा चुनाव जीतकर पुणे से सांसद के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इसके बाद 2004 और 2009 में भी वे लोकसभा सांसद चुने गए। हालांकि 1998 के लोकसभा चुनाव में उन्हें पुणे विकास आघाड़ी के उम्मीदवार के तौर पर हार का सामना करना पड़ा था, जहां उन्हें भाजपा और शिवसेना का समर्थन मिला था।
कांग्रेस नेताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं के अनुसार, सुरेश कलमाड़ी पुणे के उन नेताओं में से थे जिन्होंने शहर को एक आधुनिक पहचान देने में निर्णायक भूमिका निभाई। कांग्रेस के पुणे शहर प्रवक्ता रमेश अय्यर ने कहा कि “वास्तविक अर्थों में पुणे का विकास 1992 से शुरू हुआ, जब सुरेश कलमाड़ी पार्टी का नेतृत्व कर रहे थे और युवा नगरसेवकों की एक मजबूत टीम पुणे नगर निगम में चुनी गई थी।” इसी दौर में शहर में बुनियादी ढांचे, सड़कों, खेल सुविधाओं और सांस्कृतिक आयोजनों को नई दिशा मिली।
कलमाड़ी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 1992 में पुणे में राष्ट्रीय खेलों का आयोजन प्रमुख माना जाता है। उस समय इस आयोजन को शहर के लिए एक बड़ा अवसर माना गया, जिसने पुणे को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। खेलों के लिए बनाए गए स्टेडियम, सड़कें और अन्य सुविधाएं आगे चलकर शहर के विकास में सहायक बनीं। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि राष्ट्रीय खेलों के आयोजन ने पुणे के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति दी।
राजनीति के साथ-साथ सुरेश कलमाड़ी ने पुणे के सांस्कृतिक जीवन को भी समृद्ध किया। उन्होंने गणेशोत्सव के दौरान आयोजित होने वाले “पुणे फेस्टिवल” की शुरुआत की, जो आगे चलकर देश-विदेश से लोगों को आकर्षित करने वाला एक बड़ा आयोजन बन गया। यह उत्सव संगीत, नृत्य, कला और सामाजिक गतिविधियों का संगम था, जिसने पुणे को एक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद की।
हालांकि सुरेश कलमाड़ी का करियर विवादों से अछूता नहीं रहा। 2011 में कॉमनवेल्थ गेम्स (सीडब्ल्यूजी) से जुड़े कथित घोटाले के बाद उन्हें कांग्रेस पार्टी से निलंबित कर दिया गया था। इस प्रकरण ने उनकी राजनीतिक छवि को गहरा झटका दिया। लेकिन कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बाद में अधिकांश मामलों में उन्हें बरी कर दिया गया था और केवल एक मामला लंबित था। इसके बावजूद, इस विवाद के बाद कलमाड़ी ने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली और सार्वजनिक जीवन से लगभग गायब हो गए।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “सुरेश कलमाड़ी के सक्रिय राजनीति से हटने का सीधा असर पुणे में कांग्रेस पर पड़ा। जब तक वे नेतृत्व में थे, पार्टी की स्थिति मजबूत थी। लेकिन उनके बाद लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस को लगातार नुकसान उठाना पड़ा।” कई नेताओं का मानना है कि कलमाड़ी का संगठनात्मक कौशल और स्थानीय पकड़ पार्टी के लिए बड़ी ताकत थी।
सुरेश कलमाड़ी को एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने पुणे को सिर्फ एक शैक्षणिक शहर ही नहीं, बल्कि खेल और संस्कृति का केंद्र बनाने का सपना देखा और उसे काफी हद तक साकार भी किया। उनके समर्थक उन्हें एक दूरदर्शी नेता बताते हैं, जबकि आलोचक उनके विवादित दौर को भी याद करते हैं। बावजूद इसके, पुणे के विकास में उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता।
परिवार की बात करें तो सुरेश कलमाड़ी अपने पीछे पत्नी, दो बेटियां, एक बेटा और पोते-पोतियों से भरा परिवार छोड़ गए हैं। कांग्रेस नेताओं ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को अपराह्न 3 बजे वैकुंठ श्मशानभूमि में किया जाएगा। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, शहर के गणमान्य नागरिक और समर्थक उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचेंगे।
सुरेश कलमाड़ी का निधन पुणे की राजनीति के एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है। उनके योगदान, उपलब्धियों और विवादों के साथ उनका नाम लंबे समय तक शहर के इतिहास में दर्ज रहेगा।