केंद्रीय बजट में पहली बार ‘सनातन अर्थशास्त्र’ को मिली पहचान

For the first time Sanatan Economics got recognition in the Union Budget

सनातन अर्थशास्त्र’ को मिली नई पहचान

महाकुंभ का आर्थिक मॉडल बनेगा देश की विकास-धुरी

नई दिल्ली/लखनऊ। महाकुंभ के व्यापक आर्थिक प्रभावों ने भारत की विकास सोच को एक नई दिशा दी है। इसके परिणामस्वरूप केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2026–27 में पहली बार ‘सनातन अर्थशास्त्र’ को नीतिगत पहचान दी है। उत्सवधर्मिता, टेम्पल टूरिज्म और कस्बा आधारित अर्थव्यवस्था को विकास के औपचारिक स्तंभ के रूप में शामिल करना इस बात का संकेत है कि भारत अब अपनी सभ्यतागत जड़ों के साथ आगे बढ़ने की रणनीति अपना रहा है। बजट में किए गए प्रावधान यह दर्शाते हैं कि देश की विकास यात्रा अब केवल महानगरों और भारी उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आस्था, संस्कृति और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी समान महत्व दिया जाएगा।

आस्था से अर्थव्यवस्था तक: महाकुंभ का मॉडल

यूपीडीएफ के अध्यक्ष पंकज जायसवाल के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आयोजित महाकुंभ ने यह स्पष्ट कर दिया कि आस्था आधारित आयोजन केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बड़े आर्थिक उत्प्रेरक भी हो सकते हैं। महाकुंभ के दौरान प्रयागराज, काशी और अयोध्या सर्किट में होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार, अस्थायी-स्थायी रोजगार, स्वास्थ्य सेवाएं और लॉजिस्टिक्स मिलकर एक सशक्त आर्थिक इकोसिस्टम के रूप में उभरे। इस अनुभव ने नीति निर्माताओं को यह समझाया कि आस्था आधारित आयोजन अर्थव्यवस्था को जमीनी स्तर तक गति देने में सक्षम हैं।

कस्बों को मिलेगा नई अर्थव्यवस्था का केंद्र

बजट में टियर-2 और टियर-3 शहरों को ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन (CER)’ के रूप में विकसित करने की घोषणा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘विकसित टाउन’ की सोच का विस्तार माना जा रहा है। यह योजना उन कस्बों को पुनर्जीवित करेगी, जो कभी भारतीय अर्थव्यवस्था की सप्लाई चेन की रीढ़ हुआ करते थे। कस्बों के सशक्त होने से आसपास के गांवों के किसान, कारीगर और छोटे व्यापारी सीधे लाभान्वित होंगे। स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलेगा और ये कस्बे बड़े शहरों के लिए फुलफिलमेंट सेंटर के रूप में उभरेंगे। उत्तर प्रदेश देश का वह राज्य है जहां कस्बों और शहरी निकायों की संख्या सबसे अधिक है। ऐसे में CER योजना का सबसे बड़ा लाभ यूपी को मिलने की संभावना जताई जा रही है।

बजट में ‘टेम्पल सिटी’ शब्द का इस्तेमाल—एक बड़ा संकेत

महाकुंभ से मिले आर्थिक अनुभव के बाद बजट भाषण में पहली बार ‘टेम्पल सिटी’ शब्द का प्रयोग किया गया है। ऐतिहासिक रूप से भारत में मंदिर नगर आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र रहे हैं। प्रयागराज–काशी–अयोध्या सर्किट ने यह स्पष्ट किया है कि यदि मंदिरों को केंद्र में रखकर योजनाएं बनाई जाएं, तो हजारों कस्बों और छोटे शहरों का समग्र विकास संभव है। धार्मिक पर्यटन के साथ व्यापार, संस्कृति और सामाजिक जुड़ाव स्वाभाविक रूप से मजबूत होता है।

सनातन अर्थशास्त्र से यूपी को सबसे अधिक लाभ

बजट में सनातन अर्थशास्त्र को मिली नीतिगत मान्यता से उत्तर प्रदेश को सर्वाधिक लाभ मिलने की संभावना है। मथुरा, काशी, अयोध्या, प्रयागराज, नैमिषारण्य, गोरखनाथ, हस्तिनापुर, सारनाथ और कुशीनगर जैसे सनातन और बौद्ध परंपरा के प्रमुख केंद्र यूपी में ही स्थित हैं। इन क्षेत्रों में पर्यटन, सेवा क्षेत्र, स्थानीय उत्पाद और इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास से राज्य की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।

इनलैंड वाटरवे से नदी आधारित अर्थव्यवस्था को संबल

बजट में वाराणसी से पटना के बीच इनलैंड वाटरवे को और विकसित करने की घोषणा से यूपी में लॉजिस्टिक्स व्यवस्था सस्ती और अधिक प्रभावी होगी। इससे नदी आधारित अर्थव्यवस्था को नई जान मिलेगी। गंगा, यमुना, घाघरा और राप्ती जैसी नदियों का सबसे बड़ा नेटवर्क यूपी में होने के कारण राज्य सड़क, रेल और वायु मार्ग के साथ-साथ जल परिवहन में भी अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

नए भारत का नया विकास मॉडल

कुल मिलाकर बजट 2026–27 यह स्पष्ट संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में सनातन अर्थशास्त्र, कस्बा आधारित विकास और टेम्पल टूरिज्म भारत के नए विकास मॉडल की रीढ़ बन सकते हैं। इस बदलाव के केंद्र में उत्तर प्रदेश होगा, जो आस्था और अर्थव्यवस्था के संगम से देश की नई आर्थिक ताकत के रूप में उभर सकता है।

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