MP बजट 2026: पहली बार रोलिंग बजट, कर्ज और खर्च पर होगी सरकार की असली परीक्षा

mp government rolling budget

मध्य प्रदेश बजट 2026: पहली बार रोलिंग बजट, कर्ज और खर्च पर होगी सरकार की असली परीक्षा

भोपाल। मध्य प्रदेश की वित्तीय दिशा में वर्ष 2026 एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। राज्य सरकार मार्च 2026 के पहले सप्ताह में विधानसभा में बजट पेश करने जा रही है, और इस बार सबसे बड़ा बदलाव होगा—रोलिंग बजट प्रणाली का लागू होना। पारंपरिक वार्षिक बजट व्यवस्था से हटकर अब तीन वर्ष की मध्यम अवधि की वित्तीय योजना सदन के सामने रखी जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे खर्च पर बेहतर नियंत्रण, योजनाओं की सतत समीक्षा और दीर्घकालिक विकास को गति मिलेगी। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते कर्ज, ब्याज भुगतान और सीमित कर विकल्पों के बीच यह बदलाव सरकार की आर्थिक क्षमता की असली परीक्षा भी होगा।
https://mpvidhansabha.nic.in/images/newgate4.jpg
क्या है रोलिंग बजट और क्यों है खास?

रोलिंग बजट ऐसी प्रणाली है जिसमें हर साल बजट को अपडेट किया जाता है और केवल एक वित्तीय वर्ष ही नहीं, बल्कि अगले दो वर्षों के संभावित लक्ष्य भी शामिल किए जाते हैं। मध्य प्रदेश में इसे जीरो-बेस्ड बजटिंग से जोड़ा गया है। यानी हर विभाग को अपने खर्च का औचित्य नए सिरे से साबित करना होगा। सरकार का मानना है कि इससे अनावश्यक योजनाएं समाप्त होंगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। इस नई व्यवस्था को लागू करने की अगुवाई उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा कर रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं राजस्व और व्यय की नियमित समीक्षा कर रहे हैं।

https://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/5/58/Mohan_Yadav%2C_Chief_Minister_of_Madhya_Pradesh.jpg

GSDP वृद्धि का लक्ष्य और 2047 विजन

राज्य सरकार का अनुमान है कि 10 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर के साथ मध्य प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 2026-27 में 4.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच सकता है। सरकार इसे विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण से जोड़कर देख रही है। लक्ष्य है कि 2047 तक राज्य की अर्थव्यवस्था 250 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचे। हालांकि यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य है और इसके सामने कई वित्तीय बाधाएं मौजूद हैं।

कर्ज और ब्याज भुगतान: सबसे बड़ी चुनौती

राज्य का बजट आकार लगातार बढ़ रहा है। 2025-26 में कुल बजट 4,21,032 करोड़ रुपये रहा, जबकि 2026-27 में इसके 4.65 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। लेकिन बजट का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान में खर्च हो जाता है।

2025-26 के प्रमुख आंकड़े:

बढ़ता सार्वजनिक कर्ज और ब्याज भुगतान सरकार की वित्तीय लचीलापन को सीमित कर रहे हैं। नई योजनाओं के लिए संसाधन जुटाना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

सब्सिडी का दबाव और सामाजिक योजनाएं

सरकार कई बड़ी कल्याणकारी योजनाएं चला रही है, जिनका सामाजिक महत्व तो है, लेकिन वित्तीय दबाव भी उतना ही अधिक है।

मुख्य योजनाएं और अनुमानित वार्षिक खर्च:

इन योजनाओं ने ग्रामीण और महिला मतदाताओं के बीच सरकार की मजबूत पकड़ बनाई है, लेकिन राजकोषीय संतुलन बनाए रखना कठिन हो रहा है।

सीमित कर विकल्प और केंद्रीय सहायता

GST व्यवस्था लागू होने के बाद राज्यों के स्वतंत्र कर विकल्प सीमित हो गए हैं। ऐसे में आबकारी, खनिज और निवेश आकर्षण ही प्रमुख राजस्व स्रोत बनते जा रहे हैं। केंद्रीय सहायता में अपेक्षाकृत कमी और सब्सिडी का बढ़ता दबाव बजट प्रबंधन को और जटिल बना रहा है।

पूंजीगत व्यय और विकास रणनीति

सरकार पूंजीगत व्यय को 90,000 करोड़ रुपये तक ले जाने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य अधोसंरचना निर्माण, रोजगार सृजन और बाजार में मांग बढ़ाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रोलिंग बजट प्रभावी ढंग से लागू हुआ तो परियोजनाओं में देरी कम होगी, निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा।

आर्थिक प्रयोग या जोखिम?

मध्य प्रदेश का 2026 का बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि यह एक नई वित्तीय सोच की शुरुआत भी हो सकती है। रोलिंग बजट प्रणाली पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ा सकती है, लेकिन कर्ज प्रबंधन और सब्सिडी संतुलन में विफलता इसे जोखिमपूर्ण भी बना सकती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार विकास, कल्याण और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन कैसे साधती है। यही तय करेगा कि यह ऐतिहासिक बदलाव सफलता की मिसाल बनेगा या आर्थिक दबाव की नई कहानी।

Exit mobile version