मध्य प्रदेश बजट 2026: पहली बार रोलिंग बजट, कर्ज और खर्च पर होगी सरकार की असली परीक्षा
GSDP वृद्धि का लक्ष्य और 2047 विजन
राज्य सरकार का अनुमान है कि 10 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर के साथ मध्य प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 2026-27 में 4.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच सकता है। सरकार इसे विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण से जोड़कर देख रही है। लक्ष्य है कि 2047 तक राज्य की अर्थव्यवस्था 250 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचे। हालांकि यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य है और इसके सामने कई वित्तीय बाधाएं मौजूद हैं।
कर्ज और ब्याज भुगतान: सबसे बड़ी चुनौती
राज्य का बजट आकार लगातार बढ़ रहा है। 2025-26 में कुल बजट 4,21,032 करोड़ रुपये रहा, जबकि 2026-27 में इसके 4.65 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। लेकिन बजट का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान में खर्च हो जाता है।
2025-26 के प्रमुख आंकड़े:
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कुल बजट: 4,21,032 करोड़ रुपये
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वेतन, पेंशन और ब्याज: 1,28,340 करोड़ रुपये
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पूंजीगत व्यय: 82,513 करोड़ रुपये
बढ़ता सार्वजनिक कर्ज और ब्याज भुगतान सरकार की वित्तीय लचीलापन को सीमित कर रहे हैं। नई योजनाओं के लिए संसाधन जुटाना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
सब्सिडी का दबाव और सामाजिक योजनाएं
सरकार कई बड़ी कल्याणकारी योजनाएं चला रही है, जिनका सामाजिक महत्व तो है, लेकिन वित्तीय दबाव भी उतना ही अधिक है।
मुख्य योजनाएं और अनुमानित वार्षिक खर्च:
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लाड़ली बहना योजना: लगभग 20,000 करोड़ रुपये
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बिजली सब्सिडी: करीब 30,000 करोड़ रुपये
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जल जीवन मिशन में केंद्रीय सहायता घटने से अतिरिक्त बोझ: 8,000 करोड़ रुपये
इन योजनाओं ने ग्रामीण और महिला मतदाताओं के बीच सरकार की मजबूत पकड़ बनाई है, लेकिन राजकोषीय संतुलन बनाए रखना कठिन हो रहा है।
सीमित कर विकल्प और केंद्रीय सहायता
GST व्यवस्था लागू होने के बाद राज्यों के स्वतंत्र कर विकल्प सीमित हो गए हैं। ऐसे में आबकारी, खनिज और निवेश आकर्षण ही प्रमुख राजस्व स्रोत बनते जा रहे हैं। केंद्रीय सहायता में अपेक्षाकृत कमी और सब्सिडी का बढ़ता दबाव बजट प्रबंधन को और जटिल बना रहा है।
पूंजीगत व्यय और विकास रणनीति
सरकार पूंजीगत व्यय को 90,000 करोड़ रुपये तक ले जाने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य अधोसंरचना निर्माण, रोजगार सृजन और बाजार में मांग बढ़ाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रोलिंग बजट प्रभावी ढंग से लागू हुआ तो परियोजनाओं में देरी कम होगी, निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा।
आर्थिक प्रयोग या जोखिम?
मध्य प्रदेश का 2026 का बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि यह एक नई वित्तीय सोच की शुरुआत भी हो सकती है। रोलिंग बजट प्रणाली पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ा सकती है, लेकिन कर्ज प्रबंधन और सब्सिडी संतुलन में विफलता इसे जोखिमपूर्ण भी बना सकती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार विकास, कल्याण और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन कैसे साधती है। यही तय करेगा कि यह ऐतिहासिक बदलाव सफलता की मिसाल बनेगा या आर्थिक दबाव की नई कहानी।







