मार्च 2026 तक खत्म होगा नक्सलवाद: “ऑपरेशन क्लीन-अप’ अबूझमाड़ में नक्सलियों पर अंतिम प्रहार की तैयारी…!
नागपुर, महाराष्ट्र में राज्य सरकार और सुरक्षा बलों ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में निर्णायक कार्रवाई के तहत “ऑपरेशन क्लीन-अप” को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। इस बार लक्ष्य है — अबूझमाड़, जो वर्षों से नक्सलियों का सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है।
सूत्रों की माने तो सुरक्षा एजेंसियों की नजर इस समय वांछित नक्सली नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल रेड्डी उर्फ भूपति पर टिकी हुई है। भूपति, मारे जा चुके वामपंथी उग्रवादी किशेनजी का भाई है और फिलहाल अबूझमाड़ के जंगलों में छिपा हुआ है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, वह कावंडे गांव के पास देखा गया था। यही कारण है कि हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसी क्षेत्र का दौरा किया, जिससे सुरक्षाबलों का मनोबल और बढ़ गया।
भूपति की पत्नी तारक्का पहले ही आत्मसमर्पण कर चुकी है, जबकि भूपति ने बीजापुर मुठभेड़ के बाद सरकार से युद्धविराम की अपील की थी। फिर भी वह सक्रिय रूप से लड़ाई की मानसिकता में बना हुआ है। यही नहीं, पुलिस की हिट लिस्ट में अन्य बड़े नक्सली नेता — कादरी सत्यनारायण रेड्डी उर्फ कोसा, मडवी हिडमा, देवजी और प्रभाकर (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी प्रमुख) भी शामिल हैं।
ऑपरेशन क्लीन-अप: अबूझमाड़ में अंतिम प्रहार की तैयारी
📍 मुख्य घटनाएं:
महाराष्ट्र राज्य के सी-60 कमांडो
अबूझमाड़ के अंतिम गढ़ में माओवादी कमांडर्स के खिलाफ बड़े ऑपरेशन की तैयारी
राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का दौरा
अबूझमाड़ के समीपवर्ती कावंडे गांव का सीएम ने दौरा किया था
जिससे सुरक्षा बलों को मनोबल मिला है
मुख्य लक्षित नेता — मल्लोजुला वेणुगोपाल रेड्डी उर्फ भूपति। यह किशेनजी का भाई है और बहुत पुराना माओवादी नेता है।
नक्सलियों के अन्य बड़े नाम
कादरी सत्यनारायण रेड्डी उर्फ कोसा
मडवी हिडमा
देवजी
प्रभाकर (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी प्रमुख)
गणपति (CPI माओवादी के महासचिव, छुपा हुआ या अज्ञात स्थिति में)
इंटेलिजेंस को मिला ये इनपुट
भूपति को हाल ही में अबूझमाड़ के पास कावंडे क्षेत्र में देखा गया था।
वह अब भी “युद्धविराम” की अपील के बावजूद सक्रिय लड़ाई की मानसिकता में है।
उसकी पत्नी तारक्का पहले ही आत्मसमर्पण कर चुकी है।
भौगोलिक चुनौती: अबूझमाड़
यह दंडकारण्य क्षेत्र का हिस्सा है और माओवादियों का पारंपरिक गढ़ रहा है।
महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा और तेलंगाना की सीमा से सटा यह इलाका घना जंगल, दुर्गम पहाड़ और बरसाती नालों से घिरा है।
मानसून की दस्तक किसी भी समय हो सकती है, जिससे अभियान की सफलता या असफलता पर प्रभाव पड़ सकता है।
ओडिशा पुलिस की मुस्तैदी
छत्तीसगढ़ से माओवादियों के ओडिशा में घुसने की आशंका पर तलाशी अभियान तेज।
सीमा क्षेत्रों में ड्रोन और जंगल ट्रैकिंग यूनिट सक्रिय की गई हैं।
अगर भूपति, कोसा, हिडमा और प्रभाकर जैसे शीर्ष माओवादी नेता पकड़े या मारे जाते हैं, तो यह भारतीय सुरक्षा बलों की ऐतिहासिक जीत मानी जाएगी। मानवाधिकार संगठनों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर भी नजर रखनी होगी, क्योंकि ऐसे ऑपरेशन अक्सर संवेदनशील क्षेत्र में होते हैं।
यह ऑपरेशन भारतीय आंतरिक सुरक्षा के लिए निर्णायक मोड़ हो सकता है। नक्सलवाद पर अंतिम प्रहार की रणनीति अबूझमाड़ के जंगलों में आकार ले रही है। आने वाले दिनों में इस मिशन से जुड़ी खबरें लगातार सामने आ सकती हैं। प्रकाश कुमार पांडेय





