Controll Review: मौत के करीब ले सकता है एक डिजिटली गलत फैसला, जरूरी है फिल्म ‘Controll’ को देखना

Controll Review: मौत के करीब ले सकता है एक डिजिटली गलत फैसला, जरूरी है फिल्म ‘Controll’ को देखना

आज के दौर में जब साइबर क्राइम एक आम लेकिन अनदेखा खतरा बन चुका है, ‘कंट्रोल’ जैसी फिल्में न सिर्फ एंटरटेन करती हैं बल्कि एक मजबूत मैसेज भी छोड़ जाती हैं। यह फिल्म दिखाती है कि डिजिटल दुनिया में एक क्लिक कितना भारी पड़ सकता है — और कैसे एक आम इंसान, सिस्टम के जाल में उलझकर भी हार नहीं मानता।

फ़िल्म: Controll

कलाकार: ठाकुर अनूप सिंह, रोहित रॉय और प्रिया आनंद

निर्देशक: सफदर अब्बास

कहां देखें: सिनेमाघरों में

अवधि: 1 घंटा 56 मिनट

कहानी इंडियन आर्मी ऑफिसर अभिमन्यु (ठाकुर अनूप सिंह) की है, जिसकी ज़िंदगी तब बदल जाती है जब उसके बहनोई के साथ ऑनलाइन फ्रॉड होता है और वो आत्महत्या कर लेता है। यह घटना सिर्फ एक निजी त्रासदी नहीं, बल्कि एक मिशन बन जाती है — सच्चाई की तलाश का, इंसाफ के लिए लड़ाई का।

फिल्म की स्क्रीनप्ले कसी हुई है, और हर सीन में कुछ न कुछ जरूरी घटता है। फर्स्ट हाफ में जहां बैकस्टोरी और इमोशनल कनेक्शन बनाया गया है, वहीं सेकेंड हाफ में फिल्म तेज़ रफ्तार पकड़ती है और थ्रिल मजबूत हो जाता है।

ठाकुर अनूप सिंह ने अभिमन्यु के रोल में शानदार काम किया है। वो एक फौजी की दृढ़ता और एक इंसान की संवेदनशीलता को बखूबी निभाते हैं। रोहित रॉय का निगेटिव किरदार स्टाइलिश और सटल है — बिना ज़्यादा शोर के असर छोड़ने वाला। प्रिया आनंद, राजेश शर्मा, डेंजिल स्मिथ और बाकी कलाकार भी अपनी भूमिकाओं में विश्वसनीय लगे हैं।

तकनीकी पक्ष भी मजबूत है। एडिटिंग टाइट है, सिनेमैटोग्राफी स्मार्ट है और बैकग्राउंड म्यूज़िक कहानी को सही सपोर्ट देता है। कुछ जगहों पर थोड़ी चमक और होती तो अनुभव और बेहतर हो सकता था, लेकिन यह कमी फिल्म के इम्पैक्ट को कम नहीं करती।

‘कंट्रोल’ एक ज़रूरी फिल्म है — खासकर उन लोगों के लिए जो डिजिटल दुनिया को सिर्फ सुविधा मानते हैं, खतरा नहीं। यह फिल्म आपको सोचने पर मजबूर करती है।

फाइनल रेटिंग: 4/5 — एक शानदार कोशिश, देखना बनता है।

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