370 की लड़ाई…विधानसभा में हाथापाई! विधायकों के बीच धक्का-मुक्की के बीच फाड़े गए पोस्टर
हम बात करेंगे जम्मू- कश्मीर विधानसभा के कार्यवाही की। जहां धारा 370 को लेकर हंगामा हो गया। माननीय विधायकों के बीच धक्का-मुक्की हुई। नौबत हाथापाई तक पहुंच गई। मार्शलों को माननीयों को संभालना पड़ा। दरअसल जम्मू- कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद भी उसका जिन्न जम्मू-कश्मीर विधानसभा में प्रकट होने लगा है। बुधवार को बीजेपी के विरोध के बीच जम्मू-कश्मीर के विधानसभा में अनुच्छेद 370 फिर से बहाल करने का प्रस्ताव पास किया गया। इस मुद्दे पर अब नेशनल कॉन्फ्रेंस और बीजेपी के बीच बहस शुरू हो गई है। लेकिन गुरुवार 7 नवंबर को सदन का माहौल तब गरम हो गया। जब एक विधायक सदन में एक पोस्टर लेकर पहुंच गए। जिसमें आर्टिकल 370 की बहाली की मांग की गई थी। ऐसे में बीजेपी विधायक भड़क गए और वह सब हो गय़ा जो नहीं होना चाहिए था।
जम्मू कश्मीर विधानसभा में हंगामा
आर्टिकल 370 पर हुआ हंगामा
370 की वैधता पर SC का फैसला!
अनुच्छेद 370 एक अस्थाई प्रावधान था
विलय के बाद जम्मू-कश्मीर अलग राज्य नहीं है
विलय के साथ जम्मू-कश्मीर ने संप्रभुता छोड़ी
विशेष परिस्थितियों में अनुच्छेद -370 लाया गया
जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बना
जम्मू-कश्मीर पर राष्ट्रपति का फैसला बैध
दूसरे राज्यों से अलग कोई आंतरिक संप्रभुता नहीं
आखिर राजनीतिक पार्टियां धारा–370 के बहाली को बेचैन क्यों है। साथ ही जानेंगे जम्मू- कश्मीर विधानसभा द्वारा आर्टिकल 370 के बहाली का प्रस्ताव पास होने के क्या हैं संवैधानिक महत्व के साथ ही साथ यह भी जानने की करेंगे कोशिश कि विधानसभा में पोस्टर लेकर पहुंचना माननीय़ों को कितना शोभा देता है। विधान सभा में धारा -370 पास हो जाने के बाद पोस्टर लेकर पहुंचना क्या कहलाता है? क्या बीजेपी को भड़काने के लिए यह पोस्टर लेकर गए थे।
अनुच्छे–370 की बहाली को लेकर बेचैनी क्यों ?
जम्मू- कश्मीर विधानसभा द्वारा आर्टिकल 370 के बहाली का प्रस्ताव पास होने के क्या हैं संवैधानिक महत्व? क्या हमारे माननीय विधानसभा में पोस्टर लेकर पहुंच सकते हैं? विधान सभा में धारा -370 पास हो जाने के बाद पोस्टर लेकर पहुंचना क्या कहलाता है? क्या बीजेपी को भड़काने के लिए यह पोस्टर लेकर गए थे? जम्मू-कश्मीर विधानसभा में गुरुवार 7 नवंबर को एक बार फिर घमासान देखने को मिला। अनुच्छेद 370 के मसले पर जमकर बवाल हुआ। मारपीट की नौबत आ गई। दरअसल वजह यह थी कि एक दिन पहले बुधवार को इस बारे में एक प्रस्ताव पेश किया गया था और फिर अगले दिन गुरुवार को सुबह पोस्टर लहराए गए। इन पोस्टरों में आर्टिकल 370 वापसी की मांग की गई। इन्हें देखते ही बीजेपी के सदस्य भड़क गए और जमकर बवाल मच गया। इससे हाथापाई तक की नौबत आ गई। अब इसे लेकर बीजेपी हमलावर है और उसके सीधे गांधी परिवार पर हमला बोला है। स्मृति ईरानी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ऐसा प्रस्ताव रखना भारत के संविधान के खिलाफ है। स्मृति ईरानी ने कहा आज वे भारत की उस नाराजगी की बात कह रही हैं, जो लोगों में है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDI अलायंस ने सदन में भारतीय संविधान के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया है। यह प्रस्ताव भारतीय संविधान के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट की राय की भी अवहेलना करता है।
क्या थे अनुच्छेद-370 के प्रावधान
बता दें अक्टूबर 1949 में अनुच्छेद 370 अस्तित्व में आया था जो कश्मीर को आंतरिक प्रशासन के मामलों में स्वायत्तता प्रदान करता था। उसे विदेशी मामलों के साथ ही आर्थिक, रक्षा और संचार को छोड़कर सभी मामलों में अपने नियम बनाने की अनुमति प्रदान करता था। भारतीय प्रशासित क्षेत्र ने एक अलग संविधान और एक अलग ध्वज की स्थापना की और बाहरी लोगों को राज्य में संपत्ति के विशेषाधिकार से वंचित कर दिया। अनुच्छेद 35A, 1954 के अनुच्छेद 370 में जोड़ा गया एक और प्रावधान, राज्य के विधायकों को स्थायी राज्य निवासियों के लिए अद्वितीय अधिकारों और विशेषाधिकारों की गारंटी देने में सक्षम बनाता है।