धमतरी मखाना हब : छत्तीसगढ़ सरकार की इस योजना से किसानों और महिलाओं की बदल रही तकदीर…

Chhattisgarh government

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में अब कृषि के क्षेत्र में एक नई पहल देखने को मिल रही है। जिला प्रशासन ने यहां मखाना की खेती को बढ़ावा देने का फैसला किया है, जिससे वनांचल क्षेत्र में किसानों और महिला स्व-सहायता समूहों के लिए आय के नए अवसर खुलेंगे। इस पहल के तहत धमतरी को भविष्य में मखाना हब के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।

मखाना एक ऐसा पौधा है जो तालाबों, दलदलों और आर्द्रभूमि जैसे स्थिर जल स्रोतों में उगाया जाता है। इसकी खेती में लागत अपेक्षाकृत कम होती है और मुनाफा अधिक मिलता है। यही वजह है कि इसे किसानों के लिए लाभकारी नकदी फसल माना जाता है। प्रशासन का मानना है कि इस पहल से खासतौर पर ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा।

वनांचल क्षेत्र में आय का नया स्रोत

धमतरी जिले के नगरी वनांचल क्षेत्र में मखाना खेती की शुरुआत आजीविका संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस योजना के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को खेती से जोड़ा जा रहा है, ताकि वे स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें। जिला प्रशासन ने इसके लिए कुल 100 एकड़ भूमि चिन्हित की है, जहां चरणबद्ध तरीके से मखाना की खेती को विकसित किया जाएगा। शुरुआती चरण में संकरा क्षेत्र में करीब 25 एकड़ भूमि पर खेती की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।

धान से दोगुनी आय की संभावना

मखाना खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें लागत कम और मुनाफा ज्यादा होता है। प्रशासन के अनुसार जिन किसानों को धान की खेती से लगभग 32 हजार रुपये की आय होती थी, वहीं मखाना की खेती से यह आय बढ़कर 64 हजार रुपये तक पहुंच सकती है। कुरूद ब्लॉक के तीन गांवों में करीब 20 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना उत्पादन की शुरुआत भी कर दी गई है। इससे किसानों के बीच इस फसल को लेकर उत्साह बढ़ा है।

महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की राह

मखाना खेती को महिला स्व-सहायता समूहों से जोड़ने का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। छोटे-छोटे तालाबों और डबरियों में भी मखाना उगाया जा सकता है, जिससे सीमित संसाधनों के बावजूद महिलाएं खेती से अच्छी आय अर्जित कर सकती हैं। प्रशासन का मानना है कि इस पहल से वनांचल क्षेत्र की महिलाओं को रोजगार मिलेगा और वे परिवार की आय में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगी।

मखाना की खेती क्यों है फायदेमंद

मखाना की खेती कई मायनों में किसानों के लिए लाभदायक है। इसका पौधा स्थिर जल में उगता है और इसका प्रसार बीजों से होता है। अंकुरण के लिए पूरी तरह परिपक्व बीजों की जरूरत होती है, लेकिन एक बार फसल होने के बाद अगले साल उसी के बीज से नए पौधे आसानी से उग जाते हैं। इस कारण इसकी खेती में लागत बहुत कम आती है। साथ ही मखाना पोषक तत्वों से भरपूर होता है और बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

जलवायु भी अनुकूल

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नगरी क्षेत्र की जलवायु, पर्याप्त जल उपलब्धता और प्राकृतिक वातावरण मखाना उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल है। यही कारण है कि यहां इस फसल के सफल होने की संभावनाएं काफी अधिक मानी जा रही हैं। यदि यह प्रयोग सफल होता है तो आने वाले समय में धमतरी न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश में भी मखाना उत्पादन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

प्रशासन की निगरानी और प्रशिक्षण

धमतरी कलेक्टर ने हाल ही में संकरा क्षेत्र का दौरा कर मखाना खेती की तैयारियों का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि मखाना खेती वनांचल क्षेत्र में आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि स्व-सहायता समूहों को तकनीकी प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज और विपणन की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

नई उम्मीद की कहानी

धमतरी में मखाना खेती की यह पहल केवल एक कृषि परियोजना नहीं बल्कि ग्रामीण विकास की नई उम्मीद भी है। छोटे-छोटे तालाबों और डबरियों से शुरू हुई यह पहल आने वाले समय में हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति बदल सकती है।प्रशासन और किसानों के संयुक्त प्रयासों से धमतरी अब मखाना उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है, जो प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।

Exit mobile version