खेती-बाड़ी स्पेशल : खाली पड़ी जमीन से भी हो सकती है छप्परफाड़ कमाई… लगाइए ये फसल – आवारा पशु भी नहीं करेंगे नुकसान

Farming Special Cultivation of turmeric on vacant land can earn huge profits

खेती-बाड़ी स्पेशल : खाली पड़ी जमीन से भी हो सकती है छप्परफाड़ कमाई… लगाइए ये फसल – आवारा पशु भी नहीं करेंगे नुकसान

नई दिल्ली। अगर आपके पास खाली पड़ी जमीन है और आप सोच रहे हैं कि कौन सी फसल लगाकर कम मेहनत में ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है, तो हल्दी आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। यह एक ऐसी नकदी फसल है जिसकी मांग हमेशा बनी रहती है और खास बात यह है कि इसे आवारा पशु भी नुकसान नहीं पहुंचाते।

हल्दी की खेती क्यों है फायदे का सौदा?

हल्दी में एंटीवायरल और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, इसलिए इसका उपयोग मसालों, औषधियों और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में लगातार बढ़ रहा है।
बाजार में हल्दी की मांग सालभर बनी रहती है, जिससे किसानों को फसल बिकने की चिंता नहीं रहती। यह फसल कम पानी और देखभाल में भी अच्छी तरह तैयार हो जाती है। एक बीघा खेत में हल्दी बोने पर 15 हजार रुपए लागत आती है और यह 60 से 80 रुपए प्रति किलो बिकती है। एक बीघा में 4-5 क्विंटल तक की पैदावार हो जाती है।

खेत की ओर देखें में भी नहीं आवारा पशु

दूसरी फसलों के मुकाबले हल्दी के पौधों को आवारा पशु खाना पसंद नहीं करते। इसका कारण यह है कि हल्दी की गांठ जमीन के अंदर होती है, जिसे जानवर निकाल नहीं पाते। इस वजह से किसानों को फसल बचाने के लिए बाड़बंदी पर खर्च नहीं करना पड़ता।

डबल फायदा – खाद भी फ्री

हल्दी की कटाई के बाद बचा हुआ पौधा खेत में इकट्ठा कर जैविक खाद बना लिया जाता है। इस खाद का उपयोग दूसरी फसलों में करने से पैदावार और बढ़ जाती है। यानी किसान को हल्दी से सिर्फ नकदी कमाई ही नहीं, बल्कि फ्री की खाद भी मिलती है।

हल्दी की खेती का तरीका

ऐसी जमीन चुनें जहां पानी की निकासी अच्छी हो।
उत्तम क्वालिटी के बीजों की बुवाई करें।
समय-समय पर निराई और हल्की सिंचाई करते रहें।
90-120 दिनों में फसल तैयार हो जाती है।
कटाई के बाद गांठों की सफाई कर सीधे मंडी में बेचा जा सकता है।

हल्दी की खेती किसानों के लिए कम मेहनत और ज्यादा मुनाफे का बेहतरीन विकल्प है। इसमें लागत कम, जोखिम कम और मुनाफा ज्यादा है। यही वजह है कि इसे “किसानों की नकदी फसल” कहा जाता है।

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