बारिश, ओलावृष्टि या कीट से फसल बर्बाद हुई तो किसान को मिलेगा सहारा, जानिए मौसम आधारित फसल बीमा योजना का पूरा गणित

Crop Insurance Scheme process

खेती में सबसे बड़ा जोखिम सिर्फ लागत और बाजार भाव का नहीं, बल्कि मौसम का भी है। बारिश, सूखा, ओलावृष्टि, तापमान में अचानक बदलाव, कीट और रोग जैसी प्राकृतिक परिस्थितियां एक पूरी फसल को चौपट कर सकती हैं। ऐसे जोखिम से किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत मौसम आधारित फसल बीमा योजना संचालित की जा रही है। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से जुड़ी यह योजना किसानों के लिए खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका लक्ष्य उत्पादन जोखिम को कम करना और प्राकृतिक आपदा की स्थिति में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।

योजना का असली मकसद क्या है?

इस योजना की शुरुआत 4 जुलाई 2016 को हुई। इसका मूल उद्देश्य उद्यानिकी फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के साथ किसानों को उत्पादन जोखिम से सुरक्षा देना है। यदि कोई अधिसूचित फसल प्राकृतिक आपदा, प्रतिकूल मौसम, कीट या रोग के कारण प्रभावित होती है तो बीमा कवरेज के माध्यम से किसान को वित्तीय सुरक्षा प्रदान की जाती है।

यानी किसान के लिए यह योजना महज बीमा नहीं, बल्कि मौसम की अनिश्चितता के खिलाफ एक वित्तीय सुरक्षा कवच है। खासकर उन किसानों के लिए इसका महत्व बढ़ जाता है जिनकी आय किसी एक मौसम की फसल पर काफी हद तक निर्भर करती है।

सबसे बड़ा सवाल—किसान को कितना प्रीमियम देना होगा?

योजना की सबसे अहम बात इसका प्रीमियम ढांचा है। उपलब्ध योजना विवरण के अनुसार किसान को अधिसूचित फसल की बीमित राशि का 5 प्रतिशत या वास्तविक प्रीमियम दर, जो भी कम हो, वहन करना होता है।

इसके बाद शेष प्रीमियम में सरकार की बड़ी हिस्सेदारी रहती है। सिंचित क्षेत्र में 25 प्रतिशत तक की सीमा के भीतर राज्य और केंद्र सरकार 50:50 के अनुपात में प्रीमियम वहन करते हैं। 25 प्रतिशत से अधिक की अतिरिक्त राशि राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाने का प्रावधान दिया गया है।

इसका सीधा मतलब है कि किसान को पूरी बीमा लागत अपनी जेब से नहीं उठानी पड़ती। सरकार प्रीमियम भार का बड़ा हिस्सा वहन करके बीमा को किसानों के लिए अधिक सुलभ बनाती है।

कौन किसान ले सकता है लाभ?

योजना का लाभ सभी पात्र किसानों के लिए उपलब्ध है और इसका क्षेत्र ग्रामीण के साथ-साथ शहरी क्षेत्र भी बताया गया है। यानी लाभार्थी वर्ग को केवल किसी एक विशेष श्रेणी तक सीमित नहीं किया गया है।

ऋणी किसानों के लिए योजना ऐच्छिक है। यदि कोई ऋणी किसान बीमा नहीं कराना चाहता तो उसे संबंधित बैंक को कट-ऑफ तारीख से 7 दिन पहले लिखित सूचना देने का विकल्प दिया गया है। वहीं गैर-ऋणी किसान भी निर्धारित प्रक्रिया और दस्तावेजों के साथ अधिसूचित फसल का बीमा करा सकते हैं।

आवेदन कहां और कैसे होगा?

किसानों के लिए आवेदन प्रक्रिया को कई माध्यमों से उपलब्ध कराया गया है। किसान CSC सेंटर, बैंक शाखा या अधिकृत बीमा कंपनी के एजेंट के माध्यम से आवेदन कर सकता है। गैर-ऋणी किसान निर्धारित वेबसाइट माध्यम से स्वयं नामांकन का विकल्प भी इस्तेमाल कर सकता है।

दस्तावेजों की बात करें तो आधार कार्ड, नवीनतम भूमि अभिलेख जैसे खसरा/खतौनी, बैंक पासबुक जिसमें IFSC और खाता संख्या दर्ज हो अथवा रद्द चेक, फसल बुवाई प्रमाण-पत्र और विधिवत भरा हुआ प्रस्ताव प्रमुख दस्तावेजों में शामिल हैं। बटाईदार या साझेदार किसान के मामले में जमीन बटाई से संबंधित शपथ पत्र भी आवश्यक हो सकता है।

समय सीमा को लेकर सबसे ज्यादा सावधानी जरूरी

योजना में आवेदन की समय सीमा स्पष्ट रखी गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार रबी  फसल के लिए 15 दिसंबर से पहले आवेदन की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। यही वह बिंदु है जहां किसान को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। बीमा योजना का लाभ तभी प्रभावी होगा जब किसान संबंधित फसल, क्षेत्र और निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजीयन कराए। अंतिम तारीख निकल जाने के बाद बीमा कराने का अवसर प्रभावित हो सकता है।

दावा और भुगतान का मतलब क्या?

योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह समय है जब किसान की फसल वास्तव में मौसम या अन्य अधिसूचित जोखिम से प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में बीमा दावा और भुगतान की प्रक्रिया प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एवं मौसम आधारित फसल बीमा योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार होती है। योजना में जिले स्तर पर जिलाधिकारी और अधिकृत बीमा कंपनी से अपील का प्रावधान भी दिया गया है। विभागीय स्तर पर जिले के उप संचालक या सहायक संचालक भी पदभिहित अधिकारी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मौसम में लगातार बढ़ती अनिश्चितता के दौर में किसानों के लिए फसल बीमा की अहमियत सिर्फ मुआवजा पाने तक सीमित नहीं है। इसका बड़ा उद्देश्य खेती में जोखिम को कम करना है। किसान कम प्रीमियम देकर अपनी अधिसूचित फसल को संभावित नुकसान के खिलाफ सुरक्षित कर सकता है।

हालांकि, यहां एक बात सबसे महत्वपूर्ण है—बीमा अपने आप सुरक्षा नहीं देता, समय पर पंजीयन ही सुरक्षा की पहली शर्त है। किसान को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसकी फसल अधिसूचित है, आवेदन निर्धारित समय सीमा में हुआ है, दस्तावेज सही हैं और बैंक खाते की जानकारी ठीक दर्ज है।

इस लिहाज से मौसम आधारित फसल बीमा योजना खेती के जोखिम और सरकारी सुरक्षा के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है। किसान के लिए इसका सबसे बड़ा संदेश साफ है—मौसम पर नियंत्रण भले नहीं हो सकता, लेकिन मौसम के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान के जोखिम को बीमा के जरिए काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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