मध्यप्रदेश में कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने “कृषक कल्याण वर्ष 2026” के तहत व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि इस वर्ष सभी विभाग मिलकर कृषि योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने पर फोकस करेंगे, ताकि किसानों को सीधे लाभ मिल सके।
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कृषक कल्याण वर्ष में बड़ा फोकस
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हर विधानसभा में कृषि सम्मेलन
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किसानों के लिए नई योजनाएं तेज
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सस्ती बिजली से किसानों को राहत
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दूध उत्पादन में 25% की बढ़ोतरी
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लघु किसानों को किराये पर यंत्र
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सिंचाई रकबा बढ़ाने का बड़ा लक्ष्य
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कृषि से बढ़ेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
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सरकार का किसानों पर विशेष जोर
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कृषि विकास को मिलेगी नई रफ्तार
भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में आयोजित कृषि अभिमुखीकरण कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें किसानों तक प्रभावी रूप से पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश देश का इकलौता राज्य है, जहां किसानों को मात्र 5 रुपये में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है, जो सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रदेश की हर विधानसभा में कृषि सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन सम्मेलनों के लिए कृषि विभाग द्वारा प्रत्येक विधानसभा को 5 लाख रुपये की राशि दी जाएगी। इसका उद्देश्य किसानों को नई तकनीक, योजनाओं और आधुनिक खेती के तरीकों से जोड़ना है। साथ ही छोटे और सीमांत किसानों के लिए बड़ी राहत देते हुए कृषि यंत्र किराये पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जाएगी, जिससे उनकी लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ेगा। कार्यक्रम में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले डेढ़ साल में प्रदेश का दूध संकलन 25 प्रतिशत बढ़कर 12.50 लाख लीटर प्रतिदिन पहुंच गया है। सरकार का लक्ष्य इसे और बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाना है। इसके साथ ही दूध के दाम में 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से दुग्ध उत्पादकों को सीधा फायदा मिल रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ट्रैक्टर-ट्रॉली और भूसा बनाने की मशीन उपलब्ध करा रही है। वहीं “माता यशोदा योजना” के तहत स्कूली बच्चों को मुफ्त दूध वितरण की पहल की जा रही है, जिससे पोषण स्तर भी सुधरेगा और किसानों को बाजार भी मिलेगा। कृषि के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कुटीर और लघु उद्योगों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। शहद उत्पादन, फूड प्रोसेसिंग और होम स्टे जैसी योजनाओं के जरिए किसानों की आय के नए स्रोत विकसित किए जा रहे हैं। पर्यटन विभाग द्वारा होम स्टे योजना में 20 लाख रुपये तक की आय को जीएसटी से मुक्त रखा गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
प्रदेश में सिंचाई के क्षेत्र में भी तेजी से काम हो रहा है। सरकार ने सिंचाई का रकबा 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में यह लगभग 54 लाख हेक्टेयर है। जल संसाधन विभाग की विभिन्न परियोजनाओं और नदी जोड़ो योजनाओं से आने वाले समय कृषि को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। कृषि उत्पादन आयुक्त ने बताया कि मध्यप्रदेश पिछले 10 वर्षों से कृषि विकास दर में लगातार दो अंकों की वृद्धि दर्ज कर रहा है। इस गति को बनाए रखने के लिए “एग्रीस्टैक” जैसी डिजिटल योजनाओं को लागू किया गया है, जिससे किसानों का डेटा एक क्लिक पर उपलब्ध होता है और योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचता है।
सरकार ने फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए भी कदम उठाए हैं। ग्रीष्मकालीन उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय लिया गया है। वहीं गेहूं और अन्य फसलों की कटाई तथा नरवाई प्रबंधन के लिए कृषि यंत्र योजना को बढ़ावा दिया जा रहा है। औद्योगिक विकास के दृष्टिकोण से भी कृषि क्षेत्र को मजबूत किया जा रहा है। प्रदेश में 4 हजार से अधिक फूड प्रोसेसिंग प्लांट कार्यरत हैं और 47 कंपनियों ने 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश प्रस्ताव दिए हैं। कृषि निर्यात को 18 हजार करोड़ से बढ़ाकर 30 हजार करोड़ करने का लक्ष्य रखा गया है।