फर्जी मान्यता, 415 करोड़ का घोटाला और NIA तक पहुंची जांच — Al-Falah यूनिवर्सिटी पर घिरता शिकंजा
फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी (Al-Falah University) इन दिनों देश की दो सबसे बड़ी जांच एजेंसियों—ED और NIA—के रडार पर है। मनी लॉन्ड्रिंग, फर्जी मान्यता और 415 करोड़ रुपये की संदिग्ध हेराफेरी के आरोपों के बीच मंगलवार की शाम प्रवर्तन निदेशालय ने यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार किया। अदालत ने बुधवार को सिद्दीकी को 13 दिन की ईडी कस्टडी में भेज दिया है। यह कार्रवाई उस व्यापक जांच का हिस्सा है जिसमें यूनिवर्सिटी से कथित रूप से जुड़े एक टेरर मॉड्यूल के भी खुलासे हुए हैं।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े चैरिटेबल ट्रस्ट पर आरोप है कि उन्होंने छात्रों के अभिभावकों से फर्जी मान्यता का दावा करके करोड़ों रुपये वसूले, जिन्हें बाद में कथित तौर पर संदिग्ध खातों में भेजा गया। ईडी की प्रारंभिक जांच में ही 415.10 करोड़ रुपये की संदिग्ध लेन-देन की जानकारी सामने आई है।
ईडी की कार्रवाई: मान्यता के नाम पर करोड़ों की उगाही
ईडी ने बताया कि यूनिवर्सिटी और उसे संचालित करने वाले ट्रस्ट ने 2014-15 से 2024-25 के दौरान दाखिल आयकर रिटर्न में भारी मात्रा में धन को “स्वैच्छिक योगदान” और “शैक्षिक प्राप्ति” के रूप में दर्शाया है। जांच के दौरान यह पाया गया कि अभिभावकों से वसूली गई फीस—जिसे वे यूनिवर्सिटी की मान्यता और वैधता के भरोसे पर चुका रहे थे—वास्तव में कई फर्जी दावों के आधार पर ली गई थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, इन 10 वर्षों में कुल 415.10 करोड़ रुपये ऐसे लेन-देन में मिले हैं जिनका कोई स्पष्ट और वैध हिसाब उपलब्ध नहीं है। ईडी का अनुमान है कि इन पैसों को बेनामी संपत्तियों, दान के नाम पर फर्जी खातों और निजी लाभ के लिए उपयोग किया गया।
जवाद सिद्दीकी की गिरफ्तारी और अदालत में ईडी का पक्ष
ईडी ने अदालत में बताया कि जवाद सिद्दीकी ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी के पूरे वित्तीय संचालन पर सीधा प्रभाव रखते हैं। ऐसे में, अगर उन्हें कस्टडी में नहीं रखा गया तो वे: सबूत मिटा सकते हैं। दस्तावेजों में हेरफेर कर सकते हैं। अवैध फंड के प्रवाह को छिपा सकते हैं। अन्य सहयोगियों को सच उजागर करने से रोक सकते हैं इन गंभीर आशंकाओं को देखते हुए अदालत ने ईडी के पक्ष से सहमति जताई और सिद्दीकी को 13 दिन की कस्टडी में सौंपा।
टेरर मॉड्यूल से कनेक्शन: जांच का दायरा और गहरा
मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं है। अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम उस बड़े टेरर मॉड्यूल में भी उभरकर सामने आया है जिसमें जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 10 नवंबर को फरीदाबाद से भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद किए थे। इस गिरफ्तारी में कई शिक्षित लेकिन संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोग पकड़े गए थे। आरोपियों के मोबाइल, लैपटॉप और नेटवर्क की जांच में कुछ लिंक्स यूनिवर्सिटी के अंदर तक पाए गए।
इन घटनाओं के कुछ ही दिनों बाद दिल्ली के लाल किले के पास विस्फोट हुआ, जिसके तार भी शुरुआती जांच में अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों तक पहुंचे। गृह मंत्रालय ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी है। इसका मतलब है कि अब वित्तीय अनियमितताओं से लेकर संभावित आतंकी गतिविधियों तक हर पहलू पर पैनी नजर रखी जा रही है।
ईडी क्या जांच रही है?
ईडी की जांच कई स्तरों पर आगे बढ़ रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यूनिवर्सिटी की फीस, डोनेशन और फंड का असली प्रवाह क्या था? 415 करोड़ रुपये किस-किस चैनल के जरिए ट्रांसफर हुए? क्या इन पैसों का उपयोग बेनामी संपत्तियों की खरीद में हुआ? क्या फर्जी मान्यता के नाम पर जुटाई गई रकम किसी आतंकी गतिविधि के फंडिंग से जुड़ी है? क्या यूनिवर्सिटी प्रशासन और ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी भी मामले में शामिल हैं? जांच रिकॉर्ड: कैसे पकड़ा गया 415 करोड़ का फर्जीवाड़ा। ईडी ने 2014-15 से 2024-25 तक यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट के बैंक स्टेटमेंट। टैक्स रिटर्न। डोनेशन और फीस रजिस्टर। फंड ट्रांसफर रिकॉर्ड। प्रॉपर्टी खरीद दस्तावेज आदि की गहन जांच की। इन दस्तावेजों में “स्वैच्छिक योगदान” और “शैक्षिक प्राप्ति” के नाम पर बड़ी रकम दिखाई गई, लेकिन कोई विस्तृत रिकॉर्ड या दस्तावेजी आधार उपलब्ध नहीं था। इसी विसंगति ने घोटाले की परतें खोलना शुरू कर दिया।
क्या है आगे की राह?
अब इस मामले में दो अलग-अलग लेकिन जुड़े हुए ट्रैक पर जांच चल रही है।
1. ईडी की जांच — वित्तीय घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग पर केंद्रित
415 करोड़ के लेन-देन की असली प्रकृति
बेनामी संपत्तियों का पता लगाना
अन्य शामिल व्यक्तियों की भूमिका
2. NIA की जांच — संभावित आतंकी कनेक्शन पर
यूनिवर्सिटी परिसर में कौन-कौन लोग मॉड्यूल से जुड़े थे
क्या यूनिवर्सिटी की सुविधाओं का उपयोग आतंकी गतिविधियों के लिए किया गया
फंडिंग के पीछे मोटिव और नेटवर्क
अल-फलाह यूनिवर्सिटी का मामला केवल एक वित्तीय घोटाले का नहीं, बल्कि शिक्षा संस्थान की आड़ में चल रहे बड़े नेटवर्क के उजागर होने का भी संकेत देता है। फर्जी मान्यता देकर अभिभावकों से करोड़ों रुपये हड़पना, संदिग्ध लेन-देन छिपाना और आतंकी मॉड्यूल से कथित संबंध—ये सभी बातें इस केस को बेहद गंभीर श्रेणी में ले जाती हैं। आने वाले दिनों में ईडी और NIA की कार्रवाई से यह साफ हो जाएगा कि यह मामला कितनी गहराई तक फैला है और इसमें कौन-कौन बड़े चेहरे बेनकाब होंगे।





