सीडब्ल्यूसी की महत्वपूर्ण बैठक
साल 2024 से पहले कांग्रेस को गुलाम नबी आजादी के पार्टी छोड़ने से बढ़ा झटका लगा है। ऐसे में कांग्रेस अपने आप का एकजुट करने में जुट गई है। कांग्रेस की शीर्ष नीति निर्धारक इकाई यानी कांग्रेस कार्य समिति में पार्टी नेताओं की नाराजगी पर भी चर्चा हो सकती है। इसके अलावा सबसे बड़ा मुद्दा पार्टी के नए अध्यक्ष के चुनाव से जुड़ा है। पार्टी अध्यक्ष के चुनाव से जुड़े कार्यक्रम को मंजूरी दी जाएगी। पार्टी सूत्र बताते हैं कि बैठक ऑनलाइन होगी। जिसमें अध्यक्ष के चुनाव के विस्तृत कार्यक्रम को स्वीकृति देने के साथ ही सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व पर विश्वास जताया जा सकता है। सीडब्ल्यूसी की इस महत्वपूर्ण बैठक से पहले कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि अध्यक्ष के चुनाव की पूरी प्रक्रिया को होने में पहले से निर्धारित कार्यक्रम के मुकाबले कुछ सप्ताह की देरी होने की संभावना है। क्योंकि पार्टी का ध्यान इस समय भारत जोड़ो यात्रा पर है ऐसे में पार्टी की कुछ राज्य इकाइयां जरूरी औपचारिकताएं पूरी नहीं कर पाई हैं। बता दें सीडब्ल्यूसी ने पिछले साल जिस कार्यक्रम को मंजूरी दी थी। उसके मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 21 अगस्त से प्रारंभ होकर 20 सितंबर तक पूरी होना थी। सीडब्ल्यूसी ने पिछले साल फैसला किया था कि ब्लॉक समितियों के लिए चुनाव 16 अप्रैल से 31 मई तक किये जाएंगे। तो जिला समितियों के अध्यक्षों के चुनाव एक जून से 20 जुलाई के बीच कराए जाएंगे। कांग्रेस की प्रदेश इकाइयों के अध्यक्षों और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी यानी एआईसीसी के सदस्यों के चुनाव 21 जुलाई से 20 अगस्त के बीच होगा। इसके अलावा एआईसीसी अध्यक्ष का चुनाव 21 अगस्त से 20 सितंबर के बीच किया जाएगा। लेकिन चुनाव कार्यक्रम के बीच भारज जोड़ो यात्रा आ गई। ऐसे में प्रक्रिया में कुछ सप्ताह की देरी हो सकती है और अक्टूबर में पार्टी को पूर्णकालिक अध्यक्ष मिल जाने की संभावना जताई जा रही है। बता दें कांग्रेस इन दिनों भारत जोड़ो यात्रा की तैयारी में जुटी है। इस यात्रा के दौरान करीब पांच महीने में दक्षिण में कन्याकुमारी से लेकर उत्तर में कश्मीर तक 3570 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी। यह 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों से गुजरेगी। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों में छोटे स्तर पर भारत जोड़ो यात्राएं निकाली जाएंगी।
ऑनलाइन जुडेंगे सोनिया राहुल और प्रियंका
सीडब्ल्यूसी की बैठक ऐसे समय होगी जब सोनिया अपनी चिकित्सकीय जांच के लिए विदेश में हैं। उनके साथ राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी हैं। पार्टी सूत्र बताते है कि ये तीनों शीर्ष नेता सीडब्ल्यूसी की ऑनलाइन बैठक में भाग लेंगे।
राहुल को मनाने में जुटे नेता
राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ही नहीं पार्टी के कई नेता ऐसे हैं जो चाहते हैं कि राहुल गांधी फिर से पार्टी अध्यक्ष बने। राहुल से जिम्मेदारी संभालने की सार्वजनिक रूप से अपील की जा रही है। हालांकि इस मामले पर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। पार्टी नेता यह भी कहते हैं कि राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनने के अपने रुख पर अडे़ हैं। गहलोत ने पिछले दिनों इन खबरों को खास तवज्जो नहीं दी थी कि वे कांग्रेस अध्यक्ष पद के सबसे प्रमुख दावेदार हैं। गहलोत का कहना है कि राहुल गांधी को इसके लिए मनाया जा रहा है कि वे पार्टी की कमान दोबारा संभालें।इसका प्रयास अंतिम क्षण तक किया जाएगा। गहलोत की यह टिप्पणी कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी से मुलाकात के एक दिन बाद आई थी। मुलाकात के बाद यह चर्चा शुरू हो गई थी कि इसमें गहलोत को पार्टी अध्यक्ष बनाने पर चर्चा हुई होगी। दरअसल राहुल गांधी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। तक अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर सोनिया गांधी पार्टी की कमान संभाल रही हैं।
गुलाम के बाद सब होना चाहते हैं आजाद
वरिष्ठ गुलाम नबी आजादी ने कांग्रेस क्या छोड़ा कई नेता अब कांग्रेस से आजाद होना चाहते हैं। ऐसे में जी 23 ग्रुप के नेताओं के इस्तीफा भी का दौर शुरू हो गया है। जिसमें तेलंगाना के कद्दावर नेता एमए खान का नाम शामिल है। खान ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने से पहले उन्होंने भी कांग्रेस की बर्बादी के लिए राहुल गांधी को जिम्मेदार बताया बता दें खान कांग्रेस में बागी जी23 ग्रुप के सक्रिय सदस्य थे। 2008 से लेकर 2020 तक वे राज्यसभा सांसद रहे। कांग्रेस छोड़ने से पहले उन्होंने भी सोनिया गांधी के नाम चिट्ठी लिखी। जिसमें कहा कांग्रेस देश के जनता को यह समझाने में नाकाम रही कि पार्टी बदलाव कर रही है। देश को आगे ले जाना चाहती है। जब तक आप यानी सोनिया गांधी सक्रिय थीं तब तक पार्टी में सीनियर नेताओं की सुनी जाती थी उनसे सुझाव लिये जाते थे लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं होता। ऐसे में कांग्रेस से 40 साल पुराना नाता औ यात्रा को वे समाप्त कर रहे हैं। दरअसल एमए खान तेलंगाना कांग्रेस के कद्दावर नेता माने जाते हैं। उनकी पकड़ राज्य के करीब 12 विधानसभा और 2 लोकसभा सीटों पर है। इधर जी 23 के सदस्य और पंजाब से सांसद मनीष तिवारी भी नाराज बताए जा रहे हैं। उन्होंने भी कांग्रेस हाईकमान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। तिवारी ने कहा कि हाईकमान समझौता करने के मूड में नहीं था। इसलिए गुलाम नबी पार्टी छोड़ के चले गए। तिवारी ने आगे कहा कि वे किराएदार नहीं हैंए वे इस घर को बनाने वाले हैंए इसलिए पार्टी छोड़ कर नहीं जाएंगे।




