पानी के बहाव में छिपा है जीवन के अस्तित्व का रहस्य!…जीवन के लिए तरल पदार्थों का प्रवाह क्यों जरूरी?

Even a minor change in the physical laws of the universe would make the existence of life impossible

क्या ब्रह्मांड के भौतिक नियमों में मामूली बदलाव भी जीवन के अस्तित्व को असंभव बना सकता है? वैज्ञानिकों के एक अध्ययन ने इस सवाल को नई दिशा दी है। शोध के मुताबिक, ब्रह्मांड के कुछ मूलभूत भौतिक स्थिरांकों का मान यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है कि तरल पदार्थ किस तरह बहेंगे और जीवित कोशिकाओं के भीतर जीवन के लिए जरूरी प्रक्रियाएं संभव होंगी या नहीं।

लंदन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी के भौतिक विज्ञानी कोस्त्या ट्राचेंको के सैद्धांतिक अध्ययन में तरल पदार्थों की श्यानता यानी बहने के दौरान उनके प्रवाह का प्रतिरोध और जीवन की संभावनाओं के बीच संबंध की पड़ताल की गई है। यह शोध Science Advances में प्रकाशित हुआ। इसके बाद 2025 में The European Physical Journal E में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में रक्त जैसे जटिल जैविक तरल पदार्थों के व्यवहार पर भी विचार किया गया।

जीवन के लिए तरल पदार्थों का प्रवाह क्यों जरूरी?

जीवित कोशिकाओं के भीतर लगातार गतिविधियां होती रहती हैं। पोषक तत्वों को सही जगह पहुंचना होता है, अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकलना होता है और रासायनिक क्रियाओं के लिए अणुओं का एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचना आवश्यक होता है। विसरण की प्रक्रिया भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यदि किसी तरल पदार्थ की श्यानता बहुत अधिक हो जाए, तो अणुओं की आवाजाही धीमी पड़ सकती है। इसके विपरीत, तरल के प्रवाह के गुणों में दूसरी दिशा का बड़ा बदलाव भी जैविक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है। इसीलिए पानी और रक्त जैसे तरल पदार्थों के गुण जीवन की कार्यप्रणाली से गहराई से जुड़े हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, इलेक्ट्रॉन का आवेश और प्लांक स्थिरांक जैसे मूलभूत भौतिक मान पदार्थों के व्यवहार को प्रभावित करते हैं। इनमें बदलाव होने पर तरल पदार्थों की श्यानता भी बदल सकती है। हालांकि, यह निष्कर्ष सैद्धांतिक गणनाओं पर आधारित है। वैज्ञानिकों ने वास्तव में इन स्थिरांकों को बदलकर जीवों पर प्रयोग नहीं किया है।

क्या जीवन के अनुकूल है हमारा ब्रह्मांड?

इस शोध का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि किसी ब्रह्मांड में तारे बन सकते हैं, ग्रहों का निर्माण हो सकता है और जीवन के लिए जरूरी कार्बन तथा ऑक्सीजन जैसे तत्व भी मौजूद हो सकते हैं। फिर भी वहां के तरल पदार्थों के गुण ऐसे हो सकते हैं कि कोशिकाओं के भीतर जीवन की आवश्यक प्रक्रियाएं चल ही न पाएं।

इससे संकेत मिलता है कि जीवन के अस्तित्व के लिए केवल सही रासायनिक तत्वों का होना पर्याप्त नहीं है। उन तत्वों को जीवन के अनुकूल परिस्थितियों में काम करने का अवसर देने वाले भौतिक नियम भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

रक्त के अध्ययन से मिला नया संकेत

2025 के अध्ययन में वैज्ञानिकों ने रक्त की श्यानता और मूलभूत भौतिक स्थिरांकों के बीच संभावित संबंध की जांच की। रक्त साधारण पानी नहीं है। इसमें प्लाज्मा, लाल रक्त कोशिकाएं और अन्य घटक होते हैं, जिनकी परस्पर क्रियाएं उसके प्रवाह को प्रभावित करती हैं।

शोध इस बात की पड़ताल करता है कि इन जटिल जैविक गुणों को नियंत्रित करने वाले कुछ नियमों का संबंध प्रकृति के मूलभूत भौतिक सिद्धांतों से किस तरह हो सकता है। हालांकि, रक्त के व्यवहार को केवल भौतिक स्थिरांकों के आधार पर समझना संभव नहीं है। कोशिकाओं की संरचना और उनके बीच होने वाली क्रियाएं भी अहम हैं।

क्या प्रकृति के नियम जीवन के लिए विशेष रूप से अनुकूल हैं?

यही वह सवाल है जो इस शोध को व्यापक वैज्ञानिक महत्व देता है। भौतिक स्थिरांकों के मौजूदा मान क्यों ऐसे हैं कि तारे, ग्रह, रासायनिक तत्व और जीवन की प्रक्रियाएं संभव हो पाती हैं? इसका अभी कोई निर्णायक उत्तर नहीं है।

कुछ वैज्ञानिक इस विषय को ब्रह्मांड के सूक्ष्म समायोजन यानी फाइन ट्यूनिंग की बहस से जोड़कर देखते हैं। लेकिन यह कहना कि ब्रह्मांड के नियम जीवन के लिए जानबूझकर बनाए गए हैं, इस शोध से सिद्ध नहीं होता। इसी तरह, भौतिक स्थिरांक किसी विकासवादी प्रक्रिया से बदलते हैं, इसका भी अभी प्रमाण नहीं है।

पानी का सहज बहाव और रक्त का शरीर में संचार सामान्य जैविक घटनाएं लग सकती हैं, लेकिन इनके पीछे प्रकृति के मूलभूत नियम काम करते हैं। यह शोध जीवन के अस्तित्व को समझने के लिए एक नई सैद्धांतिक दिशा प्रस्तुत करता है। फिलहाल यह जीवन की उत्पत्ति का अंतिम उत्तर नहीं, बल्कि इस गहरे रहस्य को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सवाल है।

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