नेशनल हेराल्ड केस: दिल्ली पुलिस की EOW ने कर्नाटक के डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार को भेजा नोटिस, 19 दिसंबर तक मांगा जवाब

EOW issues notice to Karnataka Deputy CM DK Shivakumar seeks response by 19 December

नेशनल हेराल्ड केस: दिल्ली पुलिस की EOW ने कर्नाटक के डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार को भेजा नोटिस, 19 दिसंबर तक मांगा जवाब

नई दिल्ली। नेशनल हेराल्ड केस की जांच में दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंसेस विंग (EOW) ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता डी.के. शिवकुमार को नोटिस जारी किया है। EOW ने उनसे वित्तीय लेनदेन, फंड ट्रांसफर, बैंक विवरण और Young Indian कंपनी से जुड़ी संभावित जानकारियों की जानकारी देने के लिए कहा है। नोटिस में उल्लेख है कि शिवकुमार के पास मामले से संबंधित “महत्वपूर्ण दस्तावेज और सूचनाएं” हो सकती हैं। यह नोटिस 29 नवंबर को जारी किया गया था और इसके अनुसार, शिवकुमार को 19 दिसंबर तक या तो व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना है अथवा मांगी गई सभी जानकारी दस्तावेजों सहित भेजनी है।

नोटिस में क्या कहा गया है?
EOW द्वारा भेजे गए नोटिस में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि 3 अक्टूबर 2024 को दर्ज किए गए नेशनल हेराल्ड केस की जांच में शिवकुमार की भूमिका संदिग्ध नहीं, लेकिन महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नोटिस में कहा गया है कि उनके पास ऐसे वित्तीय ट्रांजैक्शनों और राजनीतिक संबंधों की जानकारी हो सकती है, जिनका Young Indian कंपनी, कांग्रेस और AJL (Associated Journals Limited) से सीधा संबंध है।

नोटिस में मांगी गई जानकारी में शामिल हैं

शिवकुमार की निजी पृष्ठभूमि और आर्थिक विवरण

Young Indian के साथ किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध

कांग्रेस पार्टी से जुड़े लेनदेन की जानकारी

बैंक ट्रांसफर और फंड के स्रोत

किसी भी कांग्रेस समिति या Young Indian के अधिकारियों से हुई बातचीत

क्या शिवकुमार ने किसी के निर्देश पर कोई भुगतान किया?

EOW ने कहा है कि यह जानकारी नेशनल हेराल्ड केस में चल रही जांच के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

शिवकुमार का आरोप “BJP टारगेट कर रही है
जानकारी के अनुसार, शिवकुमार के करीबियों का कहना है कि यह नोटिस राजनीतिक द्वेष का हिस्सा हो सकता है। सूत्रों का आरोप है कि भाजपा शिवकुमार को इसलिए निशाना बना रही है क्योंकि उन्होंने “सरकार के दबाव में आने से इनकार कर दिया”।
सूत्रों का दावा हैशिवकुमार कांग्रेस के “सबसे ज्यादा निशाने पर रहे नेताओं” में से एक हैं। वे पार्टी नेतृत्व की कई महत्वपूर्ण रणनीतियों में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। “BJP उन्हें झुकाना चाहती है, लेकिन सफल नहीं होगी।” हालांकि भाजपा की ओर से इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

EOW ने क्या लिखा है नोटिस में?

नोटिस में साफ लिखा है— “यह सूचित किया जाता है कि EOW, दिल्ली पुलिस उपरोक्त दर्ज मामले की जांच कर रही है और आपके पास इस केस से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी होने की संभावना है।” जांच अधिकारी ने शिवकुमार से सभी दस्तावेज, ईमेल, बैंक स्टेटमेंट और लेनदेन का विवरण देने को कहा है। साथ ही पूछा गया है कि कहीं उन्होंने Young Indian या कांग्रेस के किसी भी सदस्य के कहने पर कोई वित्तीय लेनदेन किया है या नहीं।

नेशनल हेराल्ड केस क्या है?

नेशनल हेराल्ड मामला सबसे पहले भाजपा नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा उठाया गया था। उनका आरोप था कि

1. AJL को कांग्रेस से मिला 90 करोड़ रुपये का कर्ज

Associated Journals Limited (AJL), जो नेशनल हेराल्ड अखबार का प्रकाशक है, को कांग्रेस पार्टी की ओर से लगभग 90.25 करोड़ रुपये का बिना ब्याज वाला कर्ज दिया गया था।
स्वामी का आरोप है कि यह कर्ज कभी वापस नहीं किया गया।

2. Young Indian की भूमिका

नवंबर 2010 में Young Indian नाम की कंपनी बनाई गई थी, जिसकी शुरुआती पूंजी केवल 5 लाख रुपये थी।
स्वामी का आरोप है—

Young Indian ने AJL का लगभग पूरा शेयरहोल्डिंग अपने कब्जे में ले लिया।

इसके जरिए AJL की लगभग 5,000 करोड़ रुपये की संपत्ति Young Indian में ट्रांसफर हो गई।

Young Indian में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की 76% हिस्सेदारी है।

3. ED और EOW की जांच

ED ने इस मामले में पहले से ही मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू कर रखी है। इसी आधार पर EOW ने भी एफआईआर दर्ज की है।
EOW का आरोप है कि—

इसमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और विश्वासघात के तत्व शामिल हैं।

कांग्रेस फंड का उपयोग “संदिग्ध ट्रांजैक्शन” में किया गया।

राजनीतिक बवाल तेज होना तय

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार है, और शिवकुमार उपमुख्यमंत्री होने के साथ-साथ राज्य के सबसे शक्तिशाली नेताओं में गिने जाते हैं।
इस नोटिस के बाद राजनीतिक गर्माहट बढ़ना तय है।

कांग्रेस का पक्ष

पार्टी का कहना है कि यह “केंद्र द्वारा विपक्ष को दबाने की राजनीतिक कार्रवाई” है।

भाजपा का रुख

भाजपा का कहना है कि “जांच एजेंसियाँ अपना काम कर रही हैं और कानून अपने तरीके से आगे बढ़ रहा है।” कर्नाटक की राजनीति पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि शिवकुमार राज्य में कांग्रेस के कद्दावर लीडर और चुनावों में मुख्य रणनीतिकार माने जाते हैं।

आगे क्या होगा?

अब सवाल यह है कि शिवकुमार 19 दिसंबर को दिल्ली में EOW के सामने पेश होंगे या दस्तावेज के जरिए ही जवाब देंगे। कानूनी जानकारों का मानना है कि पेश होना अनिवार्य नहीं है, लेकिन मांगी गई जानकारी देना आवश्यक है। अगर EOW को जानकारी संतोषजनक नहीं लगती, तो आगे पूछताछ बढ़ सकती है।

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