मायावती की तरह अंत निश्चित; CJI गवई पर कांग्रेस नेता का बड़ा बयान
कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद उदित राज ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई को लेकर तीखी नाराज़गी जताई है। उन्होंने कहा कि सीजेआई गवई अगर चाहें तो मिनी अंबेडकर बन सकते थे, लेकिन मौक़े का सही उपयोग नहीं कर पाए।
क्या बोले उदित राज?
उदित राज ने एक्स (Twitter) पर लिखा है कि “गवई जी जब सीजेआई नहीं बने थे तो बड़ी उम्मीद थी कि पहली बार एक अंबेडकराइट इस पद पर पहुंच रहा है। हालात खराब होने के कारण लोगों को भरोसा था कि इनके आने पर सुधार होगा। मौका मिला भी, लेकिन अब समय तेजी से निकल रहा है। SIR का मामला खुद सुनना चाहिए था क्योंकि यह लोकतंत्र बचाने का सवाल है। अगर अभी भी कुछ कर जाते हैं तो ठीक है, वरना मायावती की तरह अंत होना निश्चित है।” बीआर गवई मई 2025 में देश के 52वें चीफ जस्टिस बने। वह अनुसूचित जाति से आने वाले दूसरे CJI हैं। (पहले केजी बालाकृष्णन थे।) गवई का कार्यकाल सिर्फ 6 महीने का है और नवंबर 2025 में उनका कार्यकाल समाप्त हो जाएगा।
क्यों नाराज हैं उदित राज?
कांग्रेस और आरजेडी सहित विपक्षी दल बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का विरोध कर रहे हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच कर रही है। उदित राज चाहते थे कि यह केस खुद CJI गवई सुनें। उदित राज के इस बयान ने न सिर्फ न्यायपालिका पर बल्कि दलित राजनीति और विपक्ष की रणनीति पर भी नई बहस छेड़ दी है। गौरतलब है कि बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण एसआईआर मुद्दा गरमा गया है। यहां कांग्रेस और आरजेडी समेत तमाम विपक्षी पार्टियों ने विरोध प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जताई है। अब मामला सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर भी पहुंचा। जहां जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने इस पूरे मामले की की सुनवाई चल रही है। इस बीच कांग्रेस नेता की ओर से इस बात को लेकर नाराजगी जाहिर की कि चीफ जस्टिस ने इसे खुद नहीं सुना।प्रकाश कुमार पांडेय





