बिहार में रोजगार की बहार: मत्स्य पालन से उद्यमिता को नई उड़ान… जानें क्या है बिहार सरकार का रोजगारपरक मिशन…!
बिहार सरकार राज्य के पठारी इलाकों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देकर उद्यमिता और रोजगार सृजन की दिशा में नया अध्याय लिख रही है। पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के मत्स्य निदेशालय द्वारा संचालित इस योजना का उद्देश्य पलायन की चुनौती से जूझते जिलों में स्थायी आजीविका का विकल्प प्रदान करना है।
- किन जिलों में हो रहा है क्रियान्वयन?
- इस योजना को दक्षिण बिहार के पठार बाहुल्य जिले जैसे
बिहार सरकार ने इसे पहले औरंगाबाद,गया, बांका,नवादा, जमुई, कैमूर, रोहतास और मुंगेर जिले में लागू किया है। यह जल स्रोतों की सीमित उपलब्धता के बावजूद यहां पर इन क्षेत्रों में मत्स्य पालन में अपार संभावनाएं दिखाता है।
SC/ST वर्ग के लिए विशेष प्रावधान
यह योजना SC एवं ST समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण पर केंद्रित है। योजना के तहत 1 एकड़ भूमि में 0.4 एकड़ जल क्षेत्र को तालाब में बदलने पर सब्सिडी दी जाती है।
क्या मिल रहा है अनुदान?
राज्य सरकार की ओर से तालाब निर्माण के साथ ही ट्यूबवेल और सोलर पंप अधिष्ठापन। उन्नत इनपुट जैसे मछली का बीज, चारा, देखरेख की व्यवस्था की जा रही है। करीब 16 लाख 70 हजार प्रति एकड़ जल क्षेत्र पर कुल लागत का करीब 80 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।
लाभ कैसे उठाएं?
इच्छुक लाभार्थी आधिकारिक वेबसाइट https://state.bihar.gov.in/ahd/CitizeHome
या अपने जिला मत्स्य कार्यालय से संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं।
योजना का प्रभाव
- स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार का मौका
- पलायन में कमी और गांव में ही आजीविका का साधन
- राज्य सरकार उद्देश्य मत्स्य पालन को लाभकारी व्यवसाय के तौर पर में स्थापित करना है
बिहार सरकार की यह पहल “मछली पालन = रोज़गार + उद्यमिता” के मॉडल को आगे बढ़ा रही है। यह केवल एक कृषि सहायक योजना नहीं, बल्कि गांव के युवाओं को उद्यमी बनाने की दिशा में उठाया गया ठोस कदम है। ( प्रकाश कुमार पांडेय)





