पांच राज्यों में चुनावी बिगुल आज बज सकता है, चुनाव आयोग शाम चार बजे करेगा तारीखों का ऐलान
देश की राजनीति में आज एक बड़ा घटनाक्रम सामने आ सकता है। संभावना जताई जा रही है कि आज शाम चुनाव आयोग पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा कर सकता है। इसके लिए चुनाव आयोग ने राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में शाम चार बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। इस प्रेस वार्ता में चुनाव कार्यक्रम, मतदान की तिथियां और मतगणना की तारीखों का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया जा सकता है।
जानकारी के मुताबिक जिन राज्यों में इस बार विधानसभा चुनाव होने हैं उनमें Assam, West Bengal, Kerala, Tamil Nadu और केंद्र शासित प्रदेश Puducherry शामिल हैं। इन सभी राज्यों में मौजूदा विधानसभाओं का कार्यकाल अगले कुछ महीनों में समाप्त होने वाला है, इसलिए संवैधानिक प्रावधानों के तहत समय रहते चुनाव कराना जरूरी है।
विज्ञान भवन से होगा चुनाव कार्यक्रम का ऐलान
सूत्रों के अनुसार Election Commission of India ने इस संबंध में सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। दिल्ली के Vigyan Bhavan में आयोजित होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त संयुक्त रूप से चुनाव कार्यक्रम की जानकारी देंगे। आम तौर पर चुनाव आयोग प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मतदान की तारीखों के साथ-साथ आचार संहिता लागू होने की घोषणा भी करता है। जैसे ही चुनाव की तारीखें घोषित होती हैं, वैसे ही संबंधित राज्यों में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो जाती है। इसके तहत सरकारों को नई योजनाओं की घोषणा करने या बड़े प्रशासनिक फैसले लेने से रोक दिया जाता है।
इन राज्यों में खत्म हो रहा है विधानसभा का कार्यकाल
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार पांचों राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल अलग-अलग तिथियों पर समाप्त हो रहा है। इनमें सबसे पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होगा, जो 7 मई तक मान्य है। इसके बाद तमिलनाडु विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को खत्म होगा। इसके अलावा असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई तक है, जबकि केरल विधानसभा का कार्यकाल 23 मई को समाप्त होगा। वहीं पुडुचेरी विधानसभा का कार्यकाल 15 जून तक है। इन समय सीमाओं को देखते हुए चुनाव आयोग को 7 मई से पहले पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों में मतदान प्रक्रिया पूरी करानी पड़ सकती है।
अलग-अलग चरणों में हो सकता है मतदान
पिछले चुनावों की तरह इस बार भी संभावना है कि मतदान एक ही दिन के बजाय कई चरणों में कराया जाए। खासकर पश्चिम बंगाल और असम जैसे बड़े और संवेदनशील राज्यों में सुरक्षा कारणों से कई चरणों में मतदान कराया जा सकता है। चुनाव आयोग आमतौर पर सुरक्षा बलों की उपलब्धता, मौसम की स्थिति, परीक्षाओं के कार्यक्रम और प्रशासनिक तैयारियों को ध्यान में रखते हुए चुनाव का विस्तृत कार्यक्रम तय करता है। इसलिए पांचों राज्यों में मतदान की तारीखें अलग-अलग हो सकती हैं और पूरा चुनाव कार्यक्रम कई सप्ताह तक चल सकता है।
राजनीतिक दलों ने तेज की तैयारियां
चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले ही विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। कई दलों ने उम्मीदवारों के चयन, प्रचार रणनीति और गठबंधन को लेकर बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। इन राज्यों में चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प होने की उम्मीद है। पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। वहीं असम में भी सत्ता बरकरार रखने और बदलाव की राजनीति के बीच चुनावी टकराव देखने को मिल सकता है। केरल में पारंपरिक रूप से दो प्रमुख राजनीतिक गठबंधनों के बीच सत्ता का संघर्ष रहता है। तमिलनाडु में भी प्रमुख क्षेत्रीय दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। वहीं पुडुचेरी में क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों के बीच राजनीतिक समीकरण चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।
सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां पूरी
चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार पांचों राज्यों में प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा की जा चुकी है। मतदान केंद्रों की संख्या, सुरक्षा बलों की तैनाती और चुनाव कर्मचारियों की व्यवस्था को लेकर राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और वीवीपैट मशीनों की उपलब्धता और उनकी जांच भी पूरी कर ली गई है। आयोग का कहना है कि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
लोकतंत्र का बड़ा उत्सव
भारत में विधानसभा चुनाव को लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। इन चुनावों के जरिए लाखों मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चयन करते हैं और राज्य की अगली सरकार तय होती है। आज शाम चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद देश की राजनीति का ध्यान इन पांच राज्यों पर केंद्रित हो जाएगा। चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही राजनीतिक दलों का प्रचार अभियान भी तेज हो जाएगा और आने वाले हफ्तों में इन राज्यों में चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म हो सकता है।