पिछले साल 2023 में हुए पांच राज्य के विधानसभा चुनाव में नई सरकार बनी और अब कामकाज शुरु कर दिया गया है, लेकिन चुनाव के दौरान सरकार बनाने के लिए पार्टियों ने जमकर लोकलुभावनी घोषणाएं कीं। वादे किये, जिन्हें अब पूरा करने का नंबर आ गया है, लेकिन इन वादों को पूरा करने के लिए राज्य की सरकार को बजट की कमी से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में चाहे बीजेपी हो या कांग्रेस की सरकार सभी कर्ज लेने की तैयारी में जुटी हैं।
- कर्ज लेने वाले राज्यों में सबसे आगे तमिलनाडू
- राजस्थान सरकार पर 5,37,013 करोड़ रुपया का कर्ज
- गले तक कर्ज में डूबी है राजस्थान सरकार
- जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए बजट बड़ी चुनौती
- राजस्थान में राजस्व जुटाने की चुनौती
राजस्थान सरकार की बात करें तो यह राज्य गले तक कर्ज में डूबा है। रिजर्व बैंक की रिपोर्ट पर भरोसा करें तो साल 2022-23 में राजस्थान का कर्ज बढ़कर 5,37,013 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। पंजाब के बाद राजस्थान ही वो राज्य है जो देश का सबसे ज्यादा कर्जदार है। राजस्थान को कांग्रेस से जीतने के बाद बीजेपी के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि राजस्व कैसे लाया जाए। अरबों डॉलर की चुनौती भजनलाल सरकार के सामने बनी हुई है। इस बीच आरबीआई ने साल 2023 के आखरी दिन राज्यों का जनवरी-मार्च तिमाही में उधारी का कैलेंडर जारी कर दिया है। इसके अनुसार सभी राज्य इस अवधि में 4.13 लाख करोड़ रुपए का कर्ज बाजार से लेंगे। जारी वर्ष 2023-24 में अप्रैल से अक्टूबर के बीच 7 महीने में कुल 2.58 लाख करोड़ रुपए बाजार से उठाए थे। यानी अगले तीन माह में वे 7 माह में जुटाई राशि से 60% ज्यादा कर्ज ले रहे हैं। इनमें कर्नाटक, मध्यप्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ टॉप टेन में शामिल हैं। इन राज्यों के विधानसभा चुनाव 2023 में हुए हैं, जिनमें किये गये वादों और घोषणाओं को पूरा करने के लिए पैसों की जरुरत होगी। मध्य प्रदेश, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ तो इन तीन महीनों में जो कर्ज ले रहे हैं, वह 2022-23 के 12 महीनों से भी ज्यादा है।
कर्ज लेने में आगे तमिलनाडू, दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र
2023-24 के दौरान कर्ज लेने के मामले में सबसे आगे तमिलनाडू राज्य है। दूसरे नंबर पर आंध्र प्रदेश है। और तीसरे नंबर पर महाराष्ट्र शामिल है। मध्यप्रदेश की बात करें तो अगले तीन माह में करीब 37.5 हजार करोड़ कर्ज यह राज्य लेने वाला है। पिछले सात माह में यह कर्ज केवल 15 हजार करोड़ था। इसे मिलाकर 31 मार्च 2024 तक उसका सालाना कर्ज 50 हजार करोड़ से ज्यादा हो सकता है। यह अपने आप में रिकॉर्ड होगा।
तीन माह में मप्र लेगा 11 हजार करोड़ का कर्ज
मध्यप्रदेश ने 2022-23 में केवल 26 हजार 849 करोड़ रुपए कर्ज लिया था। यानी अगले 3 माह में मध्यप्रदेश सरकार पिछले पूरे साल के कर्ज से भी 39.68% ज्यादा कर्ज ले रही है। वहीं छत्तीसगढ़ सरकार तीन माह में 11 हजार करोड़ की बड़ी राशि बतौर कर्ज लेने जा रही है। दरअसल मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक जैसे राज्यों में सत्ता में आने वाली सभी पार्टियों ने वोटर्स को लुभाने के लिए कई लोकलुभावन योजनाएं या तो चलाई हैं या चलाने का वादा किया था। ऐसे में इन राज्यों के सामने जरूरी खर्च के लिए बजट जुटाने के लिए कर्ज लेने के अतिरिक्त दूसरा कोई साधन नहीं है।