छांगुर बाबा के खिलाफ ED की बड़ी कार्रवाई: 14 ठिकानों पर छापे, 106 करोड़ की विदेशी फंडिंग की जांच”

ED took major action against Changur Baba

छांगुर बाबा के खिलाफ ईडी की बड़ी कार्रवाई: 14 ठिकानों पर छापे, 106 करोड़ की विदेशी फंडिंग की जांच”

धार्मिक रूपांतरण और अवैध फंडिंग के गंभीर आरोपों में घिरे जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। यूपी के बलरामपुर से लेकर मुंबई तक उनके 14 ठिकानों पर छापेमारी की गई है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी फंडिंग के माध्यम से कथित रूप से धर्मांतरण कराने और सामाजिक शांति भंग करने के आरोपों की जांच के तहत की गई है।

14 ठिकानों पर ईडी का छापा: उत्तर से पश्चिम तक फैला नेटवर्क

11 जुलाई 2025 को सुबह 5 बजे से ईडी की टीमें उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के उतरौला कस्बे के 12 स्थानों और मुंबई के दो स्थानों पर एक साथ छापेमारी कर रही हैं। यह छापे धार्मिक रूपांतरण और अवैध विदेशी फंडिंग के आरोपों के संबंध में शुरू हुई व्यापक जांच का हिस्सा हैं। सूत्रों के अनुसार, ईडी को संदेह है कि छांगुर बाबा और उनके नेटवर्क द्वारा विदेशों, विशेष रूप से मिडिल ईस्ट देशों से फंड प्राप्त कर भारत में अवैध रूप से धर्मांतरण अभियान चलाया गया। इसके साथ ही साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने और सामाजिक समरसता को भंग करने की साजिश का भी अंदेशा जताया गया है।

106 करोड़ रुपये, 40 बैंक अकाउंट और मिडिल ईस्ट से लिंक

ईडी द्वारा दर्ज प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) के अनुसार, छांगुर बाबा के नाम से जुड़े 40 बैंक खातों में अब तक लगभग 106 करोड़ रुपये की राशि जमा होने की जानकारी सामने आई है। इन पैसों के स्रोत मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट के देशों से बताए गए हैं। जांच एजेंसी को संदेह है कि इन खातों में जमा धनराशि को भारत में धर्मांतरण गतिविधियों, सार्वजनिक असंतोष पैदा करने और राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में अव्यवस्था फैलाने के लिए इस्तेमाल किया गया।

कौन हैं छांगुर बाबा? धर्म और राजनीति का विवादित चेहरा

जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा खुद को एक धार्मिक प्रचारक बताते हैं, लेकिन उनके खिलाफ कई राज्यों में विवादों और आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। उनके ऊपर आरोप है कि उन्होंने गरीब, पिछड़े और अनुसूचित जातियों के लोगों को लालच देकर या डर दिखाकर उनका धर्मांतरण कराया। जांच एजेंसी के मुताबिक, ये गतिविधियां सुनियोजित तरीके से वर्षों से चलाई जा रही थीं और इसके लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय फंडिंग मिल रही थी। इससे पहले भी यूपी पुलिस ने उन पर विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किए थे, लेकिन मामला तब राष्ट्रीय सुर्खियों में आया जब उनके खातों में अरबों की विदेशी फंडिंग का खुलासा हुआ।

ED की जांच का दायरा बढ़ा, कई सहयोगियों पर नजर

ईडी सिर्फ छांगुर बाबा तक ही सीमित नहीं है। जांच एजेंसी अब उनके सहयोगियों, संगठनों, और एनजीओ की भी जांच कर रही है जो उनके साथ जुड़े हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, बाबा के करीब 20 सहयोगियों और उनके द्वारा चलाए जा रहे 7 संगठनों की गतिविधियों की गहन जांच की जा रही है। इनमें से कुछ संगठन एनजीओ के नाम पर विदेशों से चंदा लेते थे और उन पैसों का इस्तेमाल धर्मांतरण जैसी संवेदनशील गतिविधियों में होता था।

ईडी ने जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, बैंक प्रबंधन और आयकर विभाग से भी दस्तावेज और सहयोग मांगा है ताकि इन फंड्स के स्रोत और उपयोग का पूरा विवरण सामने लाया जा सके।

कानूनी प्रक्रिया तेज, साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप गंभीर

धार्मिक रूपांतरण कोई अपराध नहीं है यदि यह स्वेच्छा से हो, लेकिन जब इसे जबरदस्ती, लालच, या झूठे वादों के आधार पर किया जाए और वह भी विदेशी धन से प्रायोजित होकर—तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए बड़ा खतरा बन जाता है। ईडी के अधिकारियों का कहना है कि छांगुर बाबा के खिलाफ कार्रवाई PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के तहत की जा रही है। अगर उनके खिलाफ लगे आरोप साबित होते हैं, तो उन्हें लंबी सजा के साथ-साथ उनके संपूर्ण नेटवर्क को अवैध घोषित किया जा सकता है। इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने भी गंभीरता से लिया है, और जरूरी हुआ तो NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) इसमें शामिल हो सकती है।
छांगुर बाबा के खिलाफ ईडी की छापेमारी केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि एक पूरे नेटवर्क और सुनियोजित योजना के खिलाफ है, जिसमें विदेशी फंडिंग, धार्मिक रूपांतरण, और सामाजिक अस्थिरता फैलाने की साजिश के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में इस केस के और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। जहां एक ओर केंद्र सरकार इस तरह की गतिविधियों पर सख्ती दिखा रही है। वहीं इस कार्रवाई के राजनीतिक और सामाजिक असर पर भी नज़र रखी जा रही है। छांगुर बाबा की गिरफ्तारी के बाद अब उसकी संपत्ति को जब्त करना और उसे सहयोग करने वालों पर शिकंजा कसने की प्रक्रिया अगले चरण में देखी जा सकती है। —(प्रकाश कुमार पांडेय)

Exit mobile version