EDकी कार्रवाई को ममता ने बताया सियासी बदला…कहा सब जानते हैं ED किसके इशारे पर कर रही काम

ED AND CM Mamata Banerjee

ED की कार्रवाई को ममता ने बताया सियासी बदला…

कहा सब जानते हैं ED किसके इशारे पर कर रही काम

कोलकाता: फर्जी सरकारी नौकरी घोटाले में ED की देशभर में छापेमारी, ममता बनर्जी ने बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित फर्जी सरकारी नौकरी घोटाले से जुड़े एक बड़े संगठित गिरोह के खिलाफ देशभर में 15 स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूलता था। इस मामले में ईडी लंबे समय से जांच कर रही है और उसी क्रम में यह कार्रवाई की गई।

छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पीएसी) के प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचीं, जहां ईडी की टीमें मौजूद थीं। मुख्यमंत्री के अचानक वहां पहुंचने से राजनीतिक माहौल और गरमा गया। इस घटनाक्रम के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने केंद्र सरकार और केंद्रीय एजेंसियों पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि ईडी केंद्र के इशारे पर काम कर रही है।

केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल!

टीएमसी नेताओं ने कहा कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की छापेमारी यह दर्शाती है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को डराने और दबाने के लिए किया जा रहा है। पार्टी का आरोप है कि यह कार्रवाई कानून व्यवस्था के नाम पर नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध के तहत की जा रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर सत्तारूढ़ दल विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। ममता बनर्जी ने सवाल उठाया, “क्या ईडी का काम है, अमित शाह, किसी पार्टी का हार्ड डिस्क और उम्मीदवारों की सूची इकट्ठा करना?” उन्होंने आगे कहा, “जो गृह मंत्री देश की सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं, वही मेरे पार्टी के सारे दस्तावेज उठवा रहे हैं। अगर मैं भाजपा के दफ्तर पर छापा मार दूं तो उसका क्या नतीजा होगा?” मुख्यमंत्री के इस बयान ने राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया।

EDकी कार्रवाई को राज्य में होने वाले चुनावों से जोड़ा

ममता बनर्जी ने ईडी की कार्रवाई को राज्य में होने वाले आगामी चुनावों से भी जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव को देखते हुए उनकी पार्टी से जुड़ी जानकारियां जुटाई जा रही हैं। उन्होंने कहा, “एक तरफ पश्चिम बंगाल में एसआईआर के जरिए मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और दूसरी तरफ चुनाव के नाम पर मेरी पार्टी की सारी जानकारी इकट्ठा की जा रही है।” मुख्यमंत्री ने इन छापों को “दुर्भाग्यपूर्ण” करार देते हुए कहा कि टीएमसी के आईटी प्रमुख के घर पर छापा डालना बेहद निंदनीय है। उन्होंने सवाल किया, “क्या किसी राजनीतिक पार्टी के आईटी प्रमुख के घर पर छापा डालना केंद्रीय गृह मंत्री का काम है? यह कानून का पालन नहीं, बल्कि राजनीतिक बदले की भावना है।” टीएमसी नेताओं का कहना है कि पार्टी को बदनाम करने और कार्यकर्ताओं में डर पैदा करने के लिए इस तरह की कार्रवाइयां की जा रही हैं। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि यह सिलसिला जारी रहा तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

फर्जी सरकारी नौकरी रैकेट की जांच-ED

वहीं दूसरी ओर, प्रवर्तन निदेशालय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। ईडी का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई फर्जी सरकारी नौकरी रैकेट की जांच के तहत की जा रही है और इसके पीछे कोई राजनीतिक मंशा नहीं है। एजेंसी के अधिकारियों के अनुसार, उनके पास ठोस सबूत हैं, जिनके आधार पर यह तलाशी अभियान चलाया गया। ईडी का दावा है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर कई लोगों से लाखों रुपये की ठगी की गई। जांच एजेंसी ने कहा कि छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल सबूत और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले इस तरह की कार्रवाई से राज्य की राजनीति और अधिक ध्रुवीकृत हो सकती है। एक तरफ जहां टीएमसी इसे केंद्र की साजिश बता रही है, वहीं भाजपा का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। भाजपा नेताओं ने कहा कि यदि कोई घोटाले में शामिल नहीं है तो उसे जांच से डरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने टीएमसी पर आरोप लगाया कि वह भ्रष्टाचार के मामलों से ध्यान हटाने के लिए राजनीतिक रंग दे रही है। फिलहाल, फर्जी सरकारी नौकरी घोटाले की जांच जारी है और ईडी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं।  इस बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र सरकार के बीच टकराव ने राज्य की राजनीति को और गरमा दिया है। अब यह देखना होगा कि इस जांच का राजनीतिक और कानूनी स्तर पर क्या असर पड़ता है और आने वाले चुनावों में इसका क्या प्रभाव देखने को मिलता है।

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