अवैध कफ सिरप मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई: तीन राज्यों में 25 ठिकानों पर छापेमारी

ED conducts major raids

अवैध कफ सिरप मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई: तीन राज्यों में 25 ठिकानों पर छापेमारी

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोडीन आधारित अवैध कफ सिरप के निर्माण, भंडारण और तस्करी से जुड़े एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी है। इस कार्रवाई के तहत एजेंसी ने तीन राज्यों—उत्तर प्रदेश, झारखंड और गुजरात—में कुल 25 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की है। यह कार्रवाई सुबह 7:30 बजे के आसपास आरम्भ हुई और पूरे दिन जारी रही।
ईडी की यह जांच मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा बन चुके अवैध कफ सिरप व्यापार और उससे जुड़े काले धन के नेटवर्क को खत्म करने के मकसद से की जा रही है। यह पूरा मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दर्ज किया गया है। एजेंसी का ध्यान उन लोगों पर केंद्रित है जो न सिर्फ अवैध दवाइयों का निर्माण करते थे बल्कि उन्हें विभिन्न जिलों और सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर भेजकर करोड़ों रुपये की कमाई भी कर रहे थे।

मुख्य आरोपी और उनके नेटवर्क पर शिकंजा

छापेमारी जिन 25 स्थानों पर की जा रही है, वे मुख्य रूप से प्रमुख आरोपी शुभम जायसवाल, उनके करीबी सहयोगी आलोक सिंह, अमित सिंह, और चार्टर्ड अकाउंटेंट विष्णु अग्रवाल से जुड़े हुए बताए जाते हैं। ईडी के अधिकारियों के अनुसार, शुभम जायसवाल इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालक है, जो इस समय फरार है और माना जा रहा है कि वह दुबई में छिपा हुआ है। वहीं, उसका पिता भोला प्रसाद पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। चार्टर्ड अकाउंटेंट विष्णु अग्रवाल की भूमिका भी जांच के दायरे में है, क्योंकि उन पर आरोप है कि उन्होंने संदिग्ध वित्तीय लेन-देन को वैध दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ईडी की टीमें उनके दफ्तर और निजी स्थानों से भी दस्तावेज, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और अन्य आवश्यक डिजिटल रिकॉर्ड जब्त कर रही हैं।

किन शहरों में हुई छापेमारी

ईडी की टीमें तीन राज्यों के कई प्रमुख शहरों में सक्रिय हैं। जिनमें  लखनऊ, वाराणसी, जौनपुर और सहारनपुर (उत्तर प्रदेश), रांची (झारखंड), अहमदाबाद (गुजरात) शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर ईडी के अधिकारी वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन, स्टॉक रजिस्टर, नकदी के स्रोत, दवा सप्लाई चैन और अन्य अहम दस्तावेजों की गहन जांच कर रहे हैं।

30 से अधिक एफआईआर पर आधारित ईडी की कार्रवाई

जानकारी के मुताबिक, ईडी ने यह मामला उन 30 से अधिक एफआईआर के आधार पर दर्ज किया है, जो पिछले दो महीनों में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों—लखनऊ, वाराणसी, सोनभद्र, सहारनपुर और गाज़ियाबाद—में दर्ज की गई थीं। इन एफआईआर में अवैध रूप से कोडीन आधारित कफ सिरप के भंडारण, परिवहन, बिक्री और यहां तक कि सीमा पार तस्करी तक का खुलासा हुआ था। कोडीन एक नियंत्रित पदार्थ है, जिसका उपयोग डॉक्टर की सलाह पर ही सीमित मात्रा में किया जा सकता है। लेकिन इस कफ सिरप गैंग ने इसका बड़े पैमाने पर अवैध उत्पादन और वितरण किया, जिसका इस्तेमाल नशे के रूप में किया जाने लगा। यही वजह है कि इसे न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना गया, बल्कि यह अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय अपराध का रूप लेता जा रहा था।

एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई

ईडी की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क ने 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति एकत्रित की है। यह धन विभिन्न तरीकों से—जैसे नकली बिलिंग, हवाला, शेल कंपनियों और फर्जी दवाइयों की सप्लाई—के माध्यम से इकट्ठा किया गया। ईडी इसकी भी जांच कर रही है कि इस पैसे का इस्तेमाल कहां किया गया और किन-किन खातों में इसे भेजा गया।

उत्तर प्रदेश पुलिस की अब तक की कार्रवाई

इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने अब तक कुल 32 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें सप्लाई नेटवर्क से जुड़े लोग, गोदाम संचालक, ट्रांसपोर्टर, दवा कारोबार से जुड़े व्यक्ति और अन्य शामिल हैं। राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की है, जो स्थानीय स्तर पर पुलिस और ईडी के साथ मिलकर जांच को आगे बढ़ा रही है।

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