Election Commission of India: घर बैठे मतदान की सुविधा: बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए ईसीआई की बड़ी पहल
पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों को लेकर एक महत्वपूर्ण और मानवीय पहल की घोषणा की है। इस पहल के तहत अब 85 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं को घर बैठे पोस्टल बैलेट के माध्यम से मतदान की सुविधा दी जाएगी। आयोग का यह कदम न केवल मतदान प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाएगा, बल्कि उन मतदाताओं के लिए भी राहत लेकर आएगा जो शारीरिक रूप से मतदान केंद्र तक पहुंचने में असमर्थ हैं।
दरअसल, चुनाव आयोग ने पहले ही 15 March 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। तय कार्यक्रम के अनुसार असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि तमिलनाडु में 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। वहीं पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान संपन्न कराया जाएगा। सभी राज्यों के चुनाव परिणाम 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे।
चुनाव आयोग की इस नई व्यवस्था के तहत लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 60(सी) का उपयोग करते हुए पात्र मतदाताओं को पोस्टल बैलेट से मतदान का विकल्प दिया गया है। इसके अंतर्गत 85 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक और चिन्हित दिव्यांग (पीडब्ल्यूडी) मतदाता घर बैठे ही अपना वोट डाल सकेंगे। इसके लिए उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म 12डी भरकर आवेदन करना होगा, जिसे अधिसूचना जारी होने के पांच दिनों के भीतर जमा करना अनिवार्य होगा।
इस पूरी प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए चुनाव आयोग ने बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) और अधिकृत मतदान टीमों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। ये अधिकारी सीधे मतदाताओं के घर पहुंचकर पोस्टल बैलेट के माध्यम से मतदान की प्रक्रिया पूरी कराएंगे। इस दौरान मतदान की गोपनीयता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाएगा। इस पहल का दायरा केवल बुजुर्गों और दिव्यांगों तक सीमित नहीं है। चुनाव आयोग ने आवश्यक सेवाओं में लगे सेवा मतदाताओं को भी इस सुविधा के दायरे में शामिल किया है। अग्निशमन, स्वास्थ्य सेवाएं, बिजली, परिवहन, एम्बुलेंस, विमानन और सरकारी परिवहन जैसे क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारी अपने विभाग के नोडल अधिकारी के माध्यम से पोस्टल बैलेट के लिए आवेदन कर सकेंगे। इससे उन कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी, जो चुनाव ड्यूटी या आवश्यक सेवाओं में व्यस्त रहने के कारण मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच पाते।
इसके अलावा, चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी और अधिकृत मीडिया कर्मियों को भी अनुपस्थित मतदाताओं की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे मतदाता भी पोस्टल बैलेट सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। यह कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तकनीकी स्तर पर भी चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलेट सिस्टम (ETPBS) का उपयोग किया है। इस प्रणाली के माध्यम से उम्मीदवारों की सूची अंतिम होने के बाद सेवा मतदाताओं को बैलेट इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भेजा जाएगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि डाक खर्च की आवश्यकता भी समाप्त हो जाएगी। मतदाता अपने वोट को निर्धारित सुविधा केंद्र पर जमा कर सकेंगे।
हालांकि, पोस्टल बैलेट के माध्यम से मतदान करने वाले सभी मतदाताओं के लिए यह जरूरी होगा कि वे अपने मतपत्र 4 मई 2026 को सुबह 8 बजे तक संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) के पास पहुंचा दें। समय सीमा का पालन न करने पर वोट की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा। चुनाव आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के साथ इस सुविधा की व्यापक जानकारी साझा करें, ताकि अधिक से अधिक पात्र मतदाता इसका लाभ उठा सकें। इसके साथ ही मतदाताओं को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जाने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारतीय लोकतंत्र को और अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे उन वर्गों की भागीदारी बढ़ेगी, जो अब तक विभिन्न कारणों से मतदान प्रक्रिया से दूर रह जाते थे। कुल मिलाकर, चुनाव आयोग की यह पहल न केवल तकनीकी और प्रशासनिक सुधार का उदाहरण है, बल्कि यह लोकतंत्र के उस मूल सिद्धांत को भी मजबूत करती है, जिसमें हर नागरिक को मतदान का समान अवसर मिलना चाहिए। आने वाले चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस सुविधा का कितना व्यापक असर पड़ता है और कितने मतदाता इसका लाभ उठाते हैं।