मध्यप्रदेश सरकार की पहल:ई-उपार्जन…किसानों को MSP का लाभ दिलाने वाली पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था

E Procurement

घर बैठे पंजीयन से लेकर सीधे खाते में भुगतान तक की सुविधा

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ पारदर्शी और आसान तरीके से उपलब्ध कराने के लिए ई-उपार्जन प्रणाली का संचालन कर रही है। इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से किसानों को पंजीयन, स्लॉट बुकिंग, उपज विक्रय और भुगतान जैसी सभी सुविधाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं।

किसानों के लिए आसान हुई खरीदी प्रक्रिया

ई-उपार्जन पोर्टल के जरिए किसान घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से अपना पंजीयन करा सकते हैं। पंजीयन के बाद किसान अपनी सुविधा के अनुसार स्लॉट बुकिंग कर उपार्जन केंद्र पर अनाज विक्रय कर सकते हैं। खरीदी के बाद उन्हें तत्काल पावती भी प्रदान की जाती है।

सात कार्यदिवस में खाते में पहुंचती है राशि

पोर्टल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि किसानों द्वारा विक्रय किए गए अनाज का भुगतान सीधे उनके आधार लिंक्ड बैंक खाते में किया जाता है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भुगतान राशि सात कार्यदिवस के भीतर किसानों के खातों में जमा कर दी जाती है।

पूरे प्रदेश की हो रही डिजिटल मॉनिटरिंग

ई-उपार्जन योजना के अंतर्गत गेहूं, धान, ज्वार, बाजरा, चना, मसूर, सरसों सहित विभिन्न फसलों की खरीदी और निगरानी की जाती है। इसके माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों में खरीदी व्यवस्था को डिजिटल रूप से मॉनिटर किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है।

छह चरणों में पूरी होती है प्रक्रिया

ई-उपार्जन प्रणाली के तहत किसान पंजीयन, स्लॉट बुकिंग, खरीदी, परिवहन, संग्रहण और भुगतान जैसे छह प्रमुख चरण शामिल हैं। पूरी प्रक्रिया सॉफ्टवेयर आधारित होने से अनाज की आवाजाही और भंडारण पर भी प्रभावी निगरानी रखी जाती है।

राष्ट्रीय स्तर पर मिल चुका है सम्मान

ई-उपार्जन परियोजना को वर्ष 2011-12 में ‘बेस्ट आईटी इनिशिएटिव’ तथा CSI-Nihilent e-Governance Award जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। यह उपलब्धि डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की महत्वपूर्ण सफलता मानी जाती है।

किसानों के लिए वरदान बनी डिजिटल व्यवस्था

ई-उपार्जन पोर्टल ने किसानों को लंबी प्रक्रियाओं और अनावश्यक भागदौड़ से राहत दी है। पारदर्शी खरीदी, समय पर भुगतान और ऑनलाइन सुविधाओं के कारण यह योजना प्रदेश के लाखों किसानों के लिए एक भरोसेमंद व्यवस्था बनकर उभरी है।

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