वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर: ग्वालियर-चंबल में बादल, पारा 1.7 डिग्री गिरा; चार दिन तक कई जिलों में आंधी-बारिश के आसार
मध्यप्रदेश में मार्च के दूसरे पखवाड़े में मौसम का मिजाज तेजी से बदलता नजर आ रहा है। प्रदेश के ग्वालियर-चंबल अंचल में रविवार को दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रही, जिसके कारण तापमान में करीब 1.7 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का यह बदला हुआ रुख अगले चार दिनों तक देखने को मिल सकता है। इस दौरान कई जिलों में आंधी, गरज-चमक और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। हालांकि राजधानी भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे शहरों में अभी भी गर्मी का असर बना हुआ है।
मौसम विभाग के अनुसार रविवार को प्रदेश के कई जिलों में बादल छाए रहने के कारण तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की गई। ग्वालियर में अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि दतिया में 32.4 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं महाकौशल और वनांचल क्षेत्रों में भी तापमान सामान्य से थोड़ा कम रहा। छिंदवाड़ा में अधिकतम तापमान 36 डिग्री, सिवनी में 35.6 डिग्री, मंडला में 37.2 डिग्री और बालाघाट में 35 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। दिनभर बादलों की मौजूदगी के बावजूद अधिकांश स्थानों पर बारिश दर्ज नहीं की गई, लेकिन बादलों की वजह से तेज धूप से लोगों को कुछ राहत जरूर मिली।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के कई बड़े शहरों में भी तापमान में मामूली गिरावट देखने को मिली है। भोपाल में रविवार को अधिकतम तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि इंदौर और उज्जैन में तापमान 35.5 डिग्री के आसपास रहा। ग्वालियर में तापमान 32.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो पिछले दिनों की तुलना में कम है। वहीं जबलपुर में अधिकतम तापमान 35.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
हालांकि प्रदेश के कुछ हिस्सों में अभी भी गर्मी का असर बना हुआ है। विशेष रूप से नर्मदापुरम क्षेत्र पिछले कुछ दिनों से तेज गर्मी और लू की चपेट में रहा है। यहां तीन दिनों तक दिन का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। रविवार को हालांकि तापमान में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई और अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। इसके बावजूद यह प्रदेश के सबसे गर्म शहरों में शामिल बना हुआ है।
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में मार्च के इस दौर में पहली बार मावठा जैसी स्थिति बनने की संभावना है। यानी बादलों के साथ हल्की बारिश और गरज-चमक का दौर देखने को मिल सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ और एक ट्रफ लाइन (द्रोणिका) के सक्रिय होने के कारण प्रदेश के कई जिलों में मौसम अस्थिर बना रहेगा।
वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के मुताबिक 17 मार्च के आसपास एक और नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय हो सकता है, जिसका प्रभाव मध्यप्रदेश के मौसम पर भी पड़ेगा। इस कारण अगले कुछ दिनों तक बादल, तेज हवा, गरज-चमक और कहीं-कहीं हल्की बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। मौसम विभाग का मानना है कि इस बदलाव के कारण प्रदेश में तापमान में कुछ हद तक गिरावट भी देखने को मिल सकती है और गर्मी से थोड़ी राहत मिल सकती है।
मौसम विभाग ने आगामी तीन दिनों के लिए कुछ जिलों में बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई है। 16 मार्च को बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडोरी और अनूपपुर जिलों में मौसम बदल सकता है। इन क्षेत्रों में हल्की बारिश के साथ तेज हवा और बिजली चमकने की संभावना है।
इसके बाद 17 मार्च को सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडोरी और अनूपपुर में मौसम का यही मिजाज बने रहने का अनुमान है। वहीं 18 मार्च को ग्वालियर-चंबल सहित कई जिलों में आंधी और बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, शहडोल, अनूपपुर, डिंडोरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में मौसम विभाग ने गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवा चलने की संभावना जताई है।
गौरतलब है कि मार्च के दूसरे सप्ताह में ही प्रदेश में गर्मी का असर काफी बढ़ गया था। कई जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया था। नर्मदापुरम में शनिवार को अधिकतम तापमान 40.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग 6.9 डिग्री ज्यादा था। इसके अलावा खरगोन भी प्रदेश के सबसे गर्म जिलों में शामिल रहा, जहां तापमान 39.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश के अन्य जिलों जैसे मंडला, रतलाम, दमोह, खंडवा, खजुराहो, रायसेन, शाजापुर, गुना, नरसिंहपुर, सतना, सिवनी, बैतूल, छिंदवाड़ा, टीकमगढ़, उमरिया, सागर और धार में भी तापमान 37 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया गया। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गर्मी तेजी से बढ़ रही है। हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक बादलों की आवाजाही और संभावित बारिश के कारण तापमान में हल्की गिरावट देखने को मिल सकती है। इससे लोगों को तीखी गर्मी से अस्थायी राहत मिल सकती है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च के अंत तक गर्मी का प्रभाव फिर से तेजी से बढ़ सकता है और तापमान में एक बार फिर उछाल देखने को मिल सकता है।