कच्चे तेल की गिरावट से डीजल पर राहत की उम्मीद, लेकिन बड़ी कटौती अभी आसान नहीं

Drop in crude oil prices raises hopes of relief on diesel but a major cut is not easy for now

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट ने भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम घटने की उम्मीद जरूर बढ़ा दी है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड 3.4 प्रतिशत गिरकर 100.34 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई 4.51 प्रतिशत टूटकर 95.78 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। दोनों बेंचमार्क करीब 12 दिन के निचले स्तर पर पहुंच गए। हालांकि मंगलवार को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में हल्की वापसी हुई और ब्रेंट करीब 101 डॉलर के आसपास रहा।

  1. कच्चा तेल गिरा, डीजल पर राहत की उम्मीद
  2. ब्रेंट 100 डॉलर के करीब, क्या सस्ता होगा डीजल?
  3. सऊदी सप्लाई बढ़ी, तेल बाजार में बदला समीकरण
  4. अमेरिका-ईरान बातचीत से तेल पर दबाव
  5. डीजल कटौती की उम्मीद, लेकिन बड़ी गिरावट पर संशय

इस गिरावट के पीछे दो बड़े संकेत दिखाई दे रहे हैं। पहला, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक बातचीत की उम्मीद। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान किसी बातचीत या तनाव कम होने के संकेत मिलते हैं तो बाजार में मौजूद भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम कम हो सकता है। दूसरा, सऊदी अरब से तेल आपूर्ति में आंशिक सुधार। रॉयटर्स के अनुसार, 20 सितंबर को सऊदी अरामको ने सात सुपरटैंकरों में करीब 1.4 करोड़ बैरल कच्चा तेल लादा। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल का औसत प्रवाह भी अगस्त के करीब 7 लाख बैरल प्रतिदिन से बढ़कर हाल में लगभग 29 लाख बैरल प्रतिदिन हुआ है।

लेकिन यहीं सबसे बड़ा सवाल है—क्या अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने से भारत में डीजल भी तेजी से सस्ता होगा? फिलहाल इसका सीधा जवाब हां नहीं है। दिल्ली में 22 सितंबर को पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। पीपीएसी के आंकड़ों में भी 21 सितंबर को दिल्ली डीजल का खुदरा मूल्य 95.20 रुपये दर्ज है। भोपाल में डीजल करीब 99.64 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर है और यहां भी हाल के दिनों में बड़ी कटौती नहीं हुई है।

दरअसल, कच्चे तेल की कीमत के अलावा रुपये-डॉलर विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत, परिवहन, केंद्र और राज्य के टैक्स तथा तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति भी अंतिम खुदरा कीमत तय करती है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कुछ दिनों की गिरावट का असर पंप तक तुरंत और उसी अनुपात में पहुंचना जरूरी नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण संकेत आपूर्ति की स्थिति से मिल रहा है। आईईए के सितंबर आकलन के मुताबिक अगस्त में वैश्विक तेल उत्पादन 1.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन घटकर 100.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया। अगस्त में वैश्विक तेल भंडार में 95 मिलियन बैरल की और कमी आई और फरवरी से कुल कमी 507 मिलियन बैरल तक पहुंच गई। यानी बाजार में आपूर्ति का दबाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

डीजल में राहत की गुंजाइश जरूर बनी है, लेकिन अभी इसे भारी गिरावट की पक्की शुरुआत मानना जल्दबाजी होगी। यदि सऊदी आपूर्ति सामान्य होती है, होर्मुज से आवागमन बढ़ता है और अमेरिका-ईरान तनाव कम होता है, तो कच्चे तेल में और नरमी आ सकती है। इसके बाद ही घरेलू ईंधन कीमतों में बड़ी कटौती का रास्ता मजबूत होगा। फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए संकेत राहत वाला है, लेकिन राहत का असर पेट्रोल पंप तक पहुंचने में समय लग सकता है।

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