अयोध्या में ऐतिहासिक दिन, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी श्रीराम यंत्र की स्थापना
भव्य आयोजन का साक्षी बनेगा अयोध्या
हिंदू नववर्ष के पावन अवसर पर अयोध्या में आज भव्य और ऐतिहासिक आयोजन होने जा रहा है। द्रौपदी मुर्मू श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना करेंगी। इस कार्यक्रम को लेकर पूरे शहर में उत्साह का माहौल है और देश-विदेश से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं।
अभिजीत मुहूर्त में होगी विशेष स्थापना
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शुभ अभिजीत मुहूर्त में मंदिर के दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र की विधि-विधान से स्थापना करेंगी। इस धार्मिक अनुष्ठान को बेहद शुभ और प्रभावशाली माना जाता है। वैदिक मंत्रोच्चार और पूजन के बीच यह आयोजन मंदिर के आध्यात्मिक महत्व को और ऊंचाई देगा।
7000 से ज्यादा मेहमान होंगे शामिल
इस भव्य समारोह में करीब सात हजार विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। कार्यक्रम में भारत के अलग-अलग राज्यों के अलावा तुर्की, इटली और अमेरिका जैसे देशों से भी मेहमान पहुंच रहे हैं। राष्ट्रपति मुर्मू इन अंतरराष्ट्रीय अतिथियों को सम्मानित भी करेंगी, जिससे आयोजन की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुबह 11 बजे महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचेंगी। वहां से वह सीधे राम मंदिर परिसर जाएंगी। उनका यह दौरा करीब चार घंटे का रहेगा, जिसमें स्थापना, पूजा और विभिन्न धार्मिक स्थलों के दर्शन शामिल हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी रहेंगे मौजूद
समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और राम मंदिर ट्रस्ट के कई प्रमुख सदस्य शामिल होंगे। प्रशासन ने आयोजन को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और शाम पांच बजे तक भारी वाहनों की एंट्री पर रोक लगाई गई है।
150 किलो स्वर्णमंडित यंत्र बनेगा आकर्षण
श्रीराम यंत्र लगभग 150 किलोग्राम का स्वर्णमंडित यंत्र है, जिसकी स्थापना के लिए कई दिनों से धार्मिक अनुष्ठान चल रहे थे। इस यंत्र को विशेष वैदिक विधियों से तैयार किया गया है। संत-महंतों और श्रद्धालुओं में इस ऐतिहासिक स्थापना को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।
स्थापना के बाद राम परिवार का पूजन
यंत्र स्थापना के बाद राष्ट्रपति मुर्मू भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान के दर्शन-पूजन करेंगी। इसके साथ ही वह महर्षि वाल्मीकि, माता शबरी और निषादराज मंदिर में भी दर्शन करेंगी। इसे समाज के सभी वर्गों के सम्मान और समरसता के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
श्रमिकों से भी कर सकती हैं संवाद
राष्ट्रपति मुर्मू मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिकों से भी मुलाकात कर सकती हैं। यह कदम उन हजारों श्रमिकों के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है, जिन्होंने इस भव्य मंदिर के निर्माण में अपनी मेहनत और समर्पण दिया है।
धार्मिक ही नहीं, आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक
धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार श्रीराम यंत्र केवल एक पूजा का हिस्सा नहीं, बल्कि भगवान राम की मर्यादा, धर्म और शक्ति का प्रतीक है। इसकी स्थापना से मंदिर परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और श्रद्धालुओं को मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन का अनुभव मिलेगा।
आस्था से ऊर्जा केंद्र बनेगा राम मंदिर
अब तक राम मंदिर आस्था का केंद्र था, लेकिन श्रीराम यंत्र की स्थापना के बाद इसे एक शक्तिशाली आध्यात्मिक ऊर्जा केंद्र के रूप में देखा जाएगा। यंत्र स्थापना की परंपरा प्राचीन वैदिक और तांत्रिक विधाओं से जुड़ी है, जिसमें विशेष ज्यामितीय संरचना और मंत्रों के माध्यम से दिव्य ऊर्जा का आह्वान किया जाता है।