बिहार की वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव… 65 लाख मतदाता सूची से कट सकते हैं…किशनगंज में सबसे ज्यादा नाम हुए बाहर…
बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची का मसौदा (ड्राफ्ट) जारी कर दिया गया है। लेकिन इस बार का ड्राफ्ट चौंकाने वाला खुलासा लेकर आया है। राज्यभर में करीब 65 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। सबसे गंभीर स्थिति किशनगंज विधानसभा क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां सबसे ज्यादा नामों के विलोपन की आशंका है। चुनाव आयोग ने यह ड्राफ्ट शुक्रवार को प्रकाशित किया है। जिसके बाद आपत्तियों और सुधार के लिए एक विशेष समय-सीमा निर्धारित की गई है।
किशनगंज में सबसे बड़ा विलोपन: क्या कारण हैं?
सूत्रों के मुताबिक, किशनगंज विधानसभा क्षेत्र से सर्वाधिक नाम हटने की संभावना इसलिए है क्योंकि यह क्षेत्र नेपाल और पश्चिम बंगाल की सीमाओं के करीब स्थित है और इसके आसपास की भौगोलिक स्थिति संवेदनशील मानी जाती है। 13 जुलाई को चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया था कि बीएलओ द्वारा किए गए विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान बड़ी संख्या में नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार के संदिग्ध घुसपैठिए पाए गए। इन लोगों के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड और निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज भी थे, जिससे वे अब तक मतदाता सूची में शामिल हो सके थे। लेकिन इस बार की जांच के दौरान इन्हें अपात्र पाया गया।
ड्राफ्ट लिस्ट के आंकड़े और चिंता
बिहार में 243 विधानसभा सीटों के लिए जारी मसौदा सूची में 91.69% मतदाताओं के फार्म आयोग को प्राप्त हुए हैं। अनुमान है कि इनमें से 65 लाख नाम हट सकते हैं। अकेले किशनगंज जिले के तहत आने वाले निर्वाचन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा विलोपन की संभावना जताई गई है। इसका सीधा प्रभाव सीमांचल क्षेत्र की राजनीतिक और सामाजिक संरचना पर पड़ सकता है, जहां आबादी का एक बड़ा हिस्सा अल्पसंख्यक समुदायों से आता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त का बयान
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा “मसौदा मतदाता सूची की डिजिटल और भौतिक प्रतियां बिहार के सभी 38 जिलों में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को प्रदान की जा रही हैं। अब जनता को अपने नामों की पुष्टि और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा।
चुनाव आयोग की सख्ती और दस्तावेजों की जांच
बीएलओ की टीम ने इस बार गहन स्तर पर घर-घर जाकर जांच की। कई जगहों पर ऐसे लोग पाए गए जो भारतीय नागरिकता का दावा तो कर रहे थे, लेकिन उनका जन्म स्थान, नागरिकता प्रमाण और निवास इतिहास संदिग्ध पाया गया। बिहार चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब सूची में केवल उन्हीं नामों को शामिल किया जाएगा जिनकी नागरिकता और पहचान पूरी तरह प्रमाणित होगी।
वोटर लिस्ट में नाम है या नहीं, कैसे जांचें?
बिहार के नागरिक अपने नाम की पुष्टि राज्य चुनाव आयोग की वेबसाइट https://ceobihar.nic.in
पर जाकर कर सकते हैं।
अगर नाम नहीं है तो क्या करें?
फॉर्म 6 भरकर नया नाम जुड़वा सकते हैं
फॉर्म 7 के जरिए किसी गलत नाम या फर्जी व्यक्ति पर आपत्ति दर्ज की जा सकती है
प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों में उपलब्ध है
राजनीतिक असर और बहस
किशनगंज जैसे सीमावर्ती जिले में इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने से राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। यह जिला मुस्लिम बहुल और सीमांचल की राजनीति का केंद्र माना जाता है। यहां से सांसद और विधायक अक्सर धार्मिक व जातिगत समीकरणों के आधार पर चुने जाते रहे हैं। 65 लाख नामों का हटना न सिर्फ चुनावी गणना को प्रभावित करेगा, बल्कि यह प्रश्न भी खड़ा करेगा कि पिछले वर्षों में ये नाम कैसे जुड़ गए थे। बिहार की मतदाता सूची में हो रहे बड़े पैमाने पर विलोपन ने आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। खासकर किशनगंज जैसे जिलों में जहां घुसपैठ, नागरिकता और पहचान के सवाल लंबे समय से चर्चा में हैं, वहां की स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील है। अब जनता, राजनीतिक दल और प्रशासन—सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि कितने लोगों के नाम वापस जुड़ते हैं और कितनों को स्थायी रूप से हटाया जाता है। प्रकाश कुमार पांडेय