नई दिल्ली। कैंसर का नाम सुनते ही डर पैदा होना स्वाभाविक है, लेकिन मेडिकल विशेषज्ञों की सबसे अहम सलाह यही है कि कैंसर को लेकर डरने के बजाय समय रहते उसके संकेतों को पहचानना और जरूरी जांच कराना ज्यादा महत्वपूर्ण है। अखबार में प्रकाशित स्वास्थ्य संबंधी विशेष रिपोर्ट में बदलती जीवनशैली, तंबाकू सेवन और समय पर जांच को कैंसर से बचाव और शुरुआती पहचान के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।
कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर की कुछ कोशिकाएं असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं। कई मामलों में शुरुआती चरण में इसके लक्षण बेहद सामान्य दिखाई दे सकते हैं, इसलिए उन्हें नजरअंदाज करना बीमारी की पहचान में देरी कर सकता है। वहीं समय रहते बीमारी का पता चलने पर उपचार के विकल्प और परिणाम बेहतर हो सकते हैं।
हर गांठ कैंसर नहीं, लेकिन जांच जरूरी
शरीर में किसी तरह की असामान्य गांठ, लंबे समय तक रहने वाली सूजन या बदलाव दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। रिपोर्ट का महत्वपूर्ण संदेश है कि हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन किसी भी असामान्य बदलाव की चिकित्सकीय जांच जरूरी है। इसी तरह शरीर के किसी हिस्से में लगातार दर्द, असामान्य रक्तस्राव, बिना स्पष्ट कारण वजन कम होना, लंबे समय तक रहने वाली कमजोरी या ऐसी समस्या जो सामान्य उपचार के बावजूद ठीक न हो, उसे लेकर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि इन लक्षणों का मतलब सीधे कैंसर होना नहीं है। कई अन्य बीमारियों में भी ऐसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। लेकिन लगातार बने रहने वाले या असामान्य लक्षणों की जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।
तंबाकू बना कैंसर का बड़ा जोखिम
कैंसर के जोखिम को बढ़ाने वाले कारणों में तंबाकू का सेवन सबसे महत्वपूर्ण कारकों में शामिल है। सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, खैनी और दूसरे तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल कई प्रकार के कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है। खास तौर पर मुंह, गले और फेफड़ों से जुड़े कैंसर के मामलों में तंबाकू एक प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है। तंबाकू के धुएं और उसमें मौजूद हानिकारक रसायन शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए कैंसर की रोकथाम की दिशा में सबसे प्रभावी कदमों में से एक है तंबाकू से दूरी बनाना। जो लोग तंबाकू का सेवन करते हैं, उनके लिए इसे छोड़ना स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण कदम है।
इलाज सिर्फ कीमोथेरेपी तक सीमित नहीं
कैंसर के इलाज को लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ा डर अक्सर कीमोथेरेपी को लेकर होता है। लेकिन आधुनिक चिकित्सा में कैंसर का उपचार केवल कीमोथेरेपी तक सीमित नहीं है। कैंसर के प्रकार, उसकी अवस्था, शरीर में उसके फैलाव और मरीज की स्थिति के आधार पर डॉक्टर अलग-अलग उपचार पद्धतियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इनमें सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी विधियां शामिल हो सकती हैं। हर मरीज के लिए उपचार का तरीका अलग हो सकता है। इसलिए किसी दूसरे मरीज के इलाज को देखकर अपने उपचार का अनुमान लगाना सही नहीं है। विशेषज्ञ डॉक्टर जांच रिपोर्ट और बीमारी की स्थिति के आधार पर उपचार की रणनीति तय करते हैं। यानी कैंसर का मतलब यह नहीं कि इलाज का रास्ता खत्म हो गया। चिकित्सा विज्ञान में लगातार नए उपचार विकल्प विकसित हो रहे हैं।
परिवार में कैंसर का इतिहास तो रहें ज्यादा सतर्क
अगर परिवार में किसी करीबी सदस्य को कैंसर रहा है, तो व्यक्ति को अपनी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर अतिरिक्त सजग रहना चाहिए। हालांकि परिवार में कैंसर का इतिहास होने का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति को निश्चित रूप से कैंसर होगा। कुछ कैंसर में आनुवंशिक या पारिवारिक जोखिम की भूमिका हो सकती है। ऐसे मामलों में डॉक्टर से पारिवारिक इतिहास साझा करना महत्वपूर्ण होता है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार उचित स्क्रीनिंग या जेनेटिक काउंसलिंग की सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा उम्र, लिंग, जीवनशैली और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर भी अलग-अलग कैंसर की स्क्रीनिंग की जरूरत हो सकती है। सबसे जरूरी बात है कि लक्षण आने का इंतजार करने के बजाय उम्र और जोखिम के अनुसार स्वास्थ्य जांच की योजना बनाई जाए।
जागरूकता और समय पर जांच सबसे बड़ा हथियार
कैंसर से लड़ाई में जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण हथियारों में से एक है। शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना, नियमित स्वास्थ्य जांच कराना, तंबाकू और धूम्रपान से बचना, संतुलित जीवनशैली अपनाना और डॉक्टर की सलाह का पालन करना जोखिम कम करने में मदद कर सकता है। साथ ही किसी भी संदिग्ध लक्षण को देखकर खुद से कैंसर का निष्कर्ष निकालना भी सही नहीं है। इंटरनेट या सोशल मीडिया की जानकारी के आधार पर इलाज शुरू करने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। कैंसर का नाम डर पैदा कर सकता है, लेकिन जागरूकता उस डर को कम कर सकती है। समय पर पहचान, सही जांच और विशेषज्ञ की सलाह के साथ उपचार की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं। इसलिए संदेश साफ है— कैंसर से डरिए नहीं… शरीर के संकेत पहचानिए, समय पर जांच कराइए और जरूरत पड़ने पर तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लीजिए।