दीपों की जगमगाहट… रंगोली की खूबसूरती… मिठाइयों की मिठास और अपनों के साथ खुशियां बांटने का उत्साह…नमस्कार बहुत बहुत स्वागत है आपका….मै हुं आपके साथ सीमा…सबसे पहले आप सभी को दीपावली पर्व की बहुत बहुत शुभकामनाएं .. दीपावली का त्योहार अपने साथ उमंग, उल्लास और नई उम्मीदें लेकर आता है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में दीप जलाकर उनका स्वागत किया गया था। तभी से दीपावली बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक बन गई। दीपावली के दिन सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
दीपों से रोशन हुआ हर घर-आंगन
खुशियों और उमंग का महापर्व
दीपावली पर जगमगाया देश
दीपों की रोशनी, खुशियों की बहार
अपनों के साथ खुशियां बांटने का उत्साह
धनतेरस पर धन-धान्य की कामना
छोटी दीपावली का धार्मिक महत्व
दीपों से जगमगाया दीपावली का त्योहार
दीपावली पर हर घर में खुशियां
अंधकार पर प्रकाश की विजय
दीपों की रोशनी, खुशियों की बहार
मां लक्ष्मी के स्वागत में सजे घर
दीपावली पर बाजारों में रौनक
रोशनी और उल्लास का महापर्व
दीपावली लाई खुशियों की सौगात
दीपों से रोशन हुआ हर आंगन
दीपावली का त्योहार खुशियों, रोशनी और आस्था का पर्व है। इस खास मौके पर घरों से लेकर बाजारों तक रौनक दिखाई देती है। लोग घरों की सजावट करते हैं, दीप जलाते हैं और मिठाइयां बांटकर खुशियां मनाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दीपावली से जुड़े हर पर्व का अपना विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है? दीपावली का त्योहार भारतीय संस्कृति, आस्था और परंपराओं का प्रतीक है। पांच दिनों तक चलने वाले इस उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है, इसके बाद छोटी दीपावली, मुख्य दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज मनाई जाती है। हर दिन का अपना धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। कहीं भगवान धन्वंतरि की पूजा होती है, तो कहीं मां लक्ष्मी की आराधना। गोवर्धन पूजा में प्रकृति के प्रति कृतज्ञता जताई जाती है, वहीं भाई दूज भाई-बहन के प्रेम का संदेश देता है।
धनतेरस, छोटी दीपावली, मुख्य दीपावली और गोवर्धन पूजा से जुड़ी खास परंपराएं।धनतेरस से दीपोत्सव की शुरुआत होती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है और लोग शुभ वस्तुओं की खरीदारी करते हैं। इसके बाद छोटी दीपावली यानी नरक चतुर्दशी मनाई जाती है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देती है।मुख्य दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। घरों को दीपों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में दीप जलाए गए थे।दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। दीपावली के दूसरे दिन देशभर में गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है और उन्हें अन्नकूट का भोग लगाकर प्रकृति और पशुधन की रक्षा की कामना की जाती है।
दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है, जिन्हें आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस दिन लोग सोने-चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी करते हैं। घरों में दीप जलाकर सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है। धनतेरस पर सोने-चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी करना मंगलकारी माना जाता है। घरों में दीप जलाकर सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है। धनतेरस हमें धन के साथ-साथ आरोग्य और खुशहाली के महत्व का भी संदेश देता है। आप सभी को धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं।
बुराई पर अच्छाई की जीत–नरक चतुर्दशी
धनतेरस के बाद नरक चतुर्दशी मनाई जाती है, जिसे छोटी दीपावली भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन नरकासुर का वध कर लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इस पर्व पर घरों में दीप जलाए जाते हैं और उत्सव की तैयारियां की जाती हैं। नरक चतुर्दशी का संदेश है।
दीपावली — रोशनी और खुशियों का महापर्व
दीपावली का पर्व दीपों की रोशनी, खुशियों और नई उम्मीदों का प्रतीक है। इस दिन घरों को रंगोली, फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जाता है। शाम को मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में लोगों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। दीपावली बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की विजय का संदेश देती है।
भाई-बहन के प्रेम का पर्व है भाई दूज
दीपावली उत्सव का समापन भाई दूज पर होता है। यह अंतिम प्रमुख पर्वों में भाई दूज का विशेष महत्व रहता है। इसी दिन बहनें अपने अपने भाइयों के मस्तक पर तिलक कर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।भाई भी अपनी बहनों के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे, जिसके बाद इस पर्व की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। भाई दूज भाई-बहन के अटूट रिश्ते, स्नेह और विश्वास का प्रतीक है।