उपराष्ट्रपति चुनाव: जहां सोच पाना मुश्किल, वहीं से निकलेगा नाम — बीजेपी की उपराष्ट्रपति रेस में चौंकाने वाले चेहरे

Discussions within BJP on the names of potential candidates for the Vice Presidential election

जहां सोच पाना मुश्किल, वहीं से निकलेगा नाम — बीजेपी की उपराष्ट्रपति रेस में चौंकाने वाले चेहरे—-शेषाद्रि चारी और आचार्य देवव्रत संभावित दावेदार, पीएम मोदी कर सकते हैं सरप्राइज

Vice Presidential election: उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर बीजेपी के Discussions within BJP अंदर संभावित उम्मीदवारों के नाम पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार भी ऐसा नाम चुन सकते हैं, names of potential candidates जिसकी किसी ने कल्पना तक न की हो। चर्चा में दो बड़े नाम सबसे आगे हैं—आरएसएस पृष्ठभूमि वाले वरिष्ठ नेता शेषाद्रि चारी और गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत। नामांकन की आखिरी तारीख 21 अगस्त है, जबकि मतदान और नतीजों का ऐलान 9 सितंबर को होगा। इस चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद वोट देंगे, और एनडीए के पास दोनों सदनों में मजबूत संख्या बल होने से उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। सहयोगी दलों ने भी उपराष्ट्रपति उम्मीदवार तय करने की जिम्मेदारी पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को सौंप दी है।

शेषाद्रि चारी का नाम क्यों खास?

शेषाद्रि चारी आरएसएस से लंबे समय तक जुड़े रहे हैं और बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। वे कार्यालय मंत्री भी रह चुके हैं और संघ के अंग्रेजी मुखपत्र ऑर्गेनाइजर के संपादक रहे हैं। विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक मामलों के जानकार के रूप में उनकी पहचान है, खासकर चीन, पाकिस्तान और हिंद महासागर से जुड़े मुद्दों पर। अगर बीजेपी उनका नाम चुनती है, तो यह संघी पृष्ठभूमि के साथ रणनीतिक दृष्टि का भी मेल होगा।

आचार्य देवव्रत का जातीय समीकरण

आचार्य देवव्रत वर्तमान में गुजरात के राज्यपाल हैं और इससे पहले हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रह चुके हैं। हरियाणा के समालखा से आने वाले देवव्रत जाट समुदाय से हैं, वही बिरादरी जिससे पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ आते थे। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि जातीय समीकरण साधने के लिए बीजेपी उनके नाम पर भी दांव खेल सकती है।

पीएम मोदी का सरप्राइज फैक्टर

बीजेपी के अंदरूनी सूत्र कहते हैं—”जहां आप सोच नहीं सकते, वहीं से नाम आता है… ये बीजेपी है साहब।” इस संकेत से साफ है कि पार्टी एक बार फिर अप्रत्याशित चेहरा पेश कर सकती है। फिलहाल, पार्टी नेतृत्व के पास 20 अगस्त तक का वक्त है, उसके बाद अंतिम नाम सार्वजनिक होगा। प्रकाश कुमार पांडेय

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