इसी साल मई महीने की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में हुए हादसे के बाद सेना द्वारा ग्राउंड किए गए स्वदेशी एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर (एएलएच) यानी ध्रुव एक बार फिर से उड़ान भरने के लिए तैयार हैं। बीते समय में लगातार हो रही दुर्घटनाओं की वजह से सशस्त्र सेनाओं द्वारा इनके उड़ान भरने पर रोक लगाई गई थी। लेकिन हादसों के तुरंत बाद गठित की गई व्यापक जांच पड़ताल के बाद हेलिकॉप्टर में आ रही कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर उचित कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल ध्रुव को व्यापक जांच-पड़ताल के बाद आपात परिस्थितियों में समूह में यानी बैच में उड़ान भरने की अनुमति दी गई है। रक्षा सूत्रों ने बताया कि सेना, वायुसेना, नौसेना और तटरक्षक बल द्वारा कुल करीब 300 से अधिक एएलएच ध्रुव का प्रयोग किया जा रहा है। लेकिन हादसों के बाद गठित की गई सैन्य जांच में हादसों के पीछे हेलिकॉप्टर के डिजाइन और धातु संबंधी कमी वजह बनकर सामने आई है। यहां बता दें कि एएलएच का डिजाइन और विकास हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा किया गया है।
बीते पांच साल में हुए दर्जन भर हादसे
गौरतलब है कि पिछले पांच सालों में ध्रुव हेलिकॉप्टर कुल करीब दर्जनभर बार हादसों के शिकार हुए हैं। इसमें जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में मई-2023 में हुआ हादसा भी शामिल है। जिसमें सेना का एक जवान शहीद हो गया था और दो पायलट घायल हो गए थे। इससे पहले 26 मार्च में कोच्चि में तटरक्षक बल के एक ध्रुव हेलिकॉप्टर की आपातकालीन लैंडिंग करानी पड़ी थी। 8 मार्च को नौसेना ने अरब सागर में एएलएच की आपात लैंडिंग कराई थी।
सीईएमआईएलएसी ने की ध्रुव की जांच
10 मई को एएलएच में आई कमियों की जांच करने के लिए सरकार ने अपनी शीर्ष नियामक संस्था सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्दीनेस एंड सर्टिफिकेशन, बेंगलुरु (सीईएमआईएलएसी) को हेलिकॉप्टरों को प्रमाणपत्र देने की जिम्मेदारी सौंपी थी। इस संबंध में सीईएमआईएलएसी ने अप्रैल के अंतिम सप्ताह में तीनों सशस्त्र सेनाओं और तटरक्षक बल को एक पत्र लिखा था। हेलिकॉप्टर की कंट्रोल रॉड और उसकी हवाई क्षमता को परखने के लिए डिजाइन की समीक्षा करने की बात संस्था द्वारा कही गई थी। सीईएमआईएलएसी रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के तहत कार्य करता है। जिसने हेलिकॉप्टर में आई तकनीकी खामियों को हादसों की मुख्य वजह बताया है। साथ ही मशीन में बुस्टर कंट्रोल रॉड को भी एक अनिवार्य अंग माना है। यह रॉड पायलट को हेलिकॉप्टर की गति पर नियंत्रण करने में मदद करते हैं। शुरुआत में हेलिकॉप्टर को अनिवार्य जांच के बाद 100 घंटे की उड़ान की अनुमति दी गई है। इसके बाद 500 घंटे और एक साल की उड़ान अनुमति दी गई है।