धनतेरस आज…बाजार सजे..पांच दिनी दीपोत्सव का आगाज….स्वदेशी सामान की बढ़ी मांग …GST घटने से बढ़ी रौनक

Dhanteras marks the beginning of the five day Diwali festival

धनतेरस आज…बाजार सजे..पांच दिनी दिपोत्सव का आगाज

धनतेरस से हुआ दीपोत्सव का शुभारंभ

आज धनतेरस है, और इसी के साथ पांच दिनी दीपोत्सव यानी दिवाली का शुभारंभ हो गया है। हर घर में आज भगवान धनवंतरि की पूजा होगी, जिन्हें आयुर्वेद और स्वास्थ्य के देवता माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धनवंतरि हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, और इसी दिन देवी लक्ष्मी भी क्षीर सागर से निकली थीं। इसलिए यह दिन धन, आरोग्य और समृद्धि का प्रतीक बन गया।

हर वर्ग के लिए शुभ खरीदारी

धनतेरस पर कुछ न कुछ खरीदना शुभ माना जाता है। अमीर हो या गरीब, हर कोई अपनी क्षमता के अनुसार कोई न कोई वस्तु खरीदता है। किसी के लिए यह दिन सोना-चांदी खरीदने का होता है तो कोई नए बर्तन या इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदता है।
कहा जाता है कि इस दिन की गई खरीदी से घर में लक्ष्मी का वास होता है और सालभर समृद्धि बनी रहती है।

नवरात्रि से शुरू हुआ त्योहारों का मौसम

भारत में त्योहारों की शुरुआत नवरात्रि से होती है और धनतेरस के साथ यह अपने शिखर पर पहुंच जाती है। इस बार सरकार ने जनता को बड़ा तोहफा दिया है — कई उत्पादों पर जीएसटी दरें घटाई गई हैं। इससे बाजारों में जबरदस्त रौनक है, दुकानें सजी हैं, और ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है।

जीएसटी घटने से खिल उठा बाजार

जीएसटी में राहत का सीधा असर बाजार पर दिख रहा है। घरेलू उपकरणों से लेकर सजावटी वस्तुओं तक, हर सेक्टर में बिक्री बढ़ी है। विक्रेताओं का कहना है कि खरीदारी में 20 से 25 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। लोग पहले की तुलना में अधिक उत्साह से त्यौहार मना रहे हैं और यह खर्च भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दे रहा है।

स्वदेशी सामानों की बढ़ी डिमांड

इस बार बाजार में एक खास ट्रेंड देखने को मिल रहा है — स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता। कोविड-19 के बाद प्रधानमंत्री मोदी के “वोकल फॉर लोकल” अभियान का असर अब बाजारों में साफ दिखता है। लोग मिट्टी के दीये, घरेलू सजावट के हस्तनिर्मित सामान, हाथ से बनी मिठाइयां, मिट्टी की मूर्तियां और स्थानीय ब्रांड्स को तरजीह दे रहे हैं। इससे न केवल स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन मिला है, बल्कि देश की मुद्रा देश में ही घूम रही है।

त्योहार अब आर्थिक उछाल का प्रतीक

कभी दीपावली सिर्फ रोशनी और खुशियों का त्योहार मानी जाती थी, लेकिन अब यह आर्थिक विकास का प्रतीक बन गई है। व्यापारी संगठनों का अनुमान है कि इस बार देश में रिकॉर्ड 4.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होगा। मॉल, ज्वेलरी शॉप्स, ऑटोमोबाइल डीलरशिप्स और ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर खरीदारी का उत्साह चरम पर है। त्योहारों के दौरान बढ़ी बिक्री ने देश की जीडीपी ग्रोथ को भी सहारा दिया है।

छोटे कारोबारियों के लिए सुनहरा मौका

त्योहारी सीजन न केवल बड़े ब्रांड्स के लिए बल्कि छोटे दुकानदारों के लिए भी उम्मीदों का मौसम लेकर आया है। शहरों से लेकर गांवों तक, स्थानीय बाजारों में बिक्री में भारी इजाफा हुआ है। लोग अब स्वदेशी दुकानदारों से सामान खरीदने को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था में “ग्रासरूट इकॉनॉमिक रिवाइवल” का संकेत है।

स्वदेशी अपनाने का असर साफ

कोविड काल के बाद उपभोक्ताओं की मानसिकता में बड़ा बदलाव आया है। अब वे लोकल उत्पादों को सिर्फ सस्ता विकल्प नहीं, बल्कि गर्व का प्रतीक मानते हैं। इससे दिया-बाती, सजावटी सामान, बर्तन, मिठाई, खिलौने और वस्त्र उद्योग को मजबूती मिली है। स्वदेशी उत्पादों की बिक्री में इस साल 30 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि देखने को मिली है।

कारोबारियों में जबरदस्त उत्साह

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल के अनुसार इस बार व्यापारियों को उम्मीद है कि त्योहारों का कारोबार पिछले वर्षों के सभी रिकॉर्ड तोड़ देगा। सर्वे के मुताबिक, दोनो प्रमुख कारण — जीएसटी में राहत और स्वदेशी उत्पादों की डिमांड — ने बाजार को नई ऊंचाई दी है।

दीपावली बनी आर्थिक रोशनी का पर्व

धनतेरस से दीपावली तक चलने वाला यह पांच दिनी पर्व अब केवल आस्था और परंपरा का नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के पुनरुत्थान का प्रतीक बन चुका है। हर दीया सिर्फ अंधकार मिटाने का प्रतीक नहीं, बल्कि आर्थिक उजाले का दूत बन गया है। इस त्यौहार ने साबित कर दिया है कि जब लोग अपनी देशी चीजों को अपनाते हैं। तो सिर्फ घर नहीं, देश भी जगमगा उठता है। इस धनतेरस पर बाजारों में सजी रौनक और लोगों के चेहरों पर चमक यही कहती है “जहां स्वदेशी है, वहीं सच्ची समृद्धि है। (प्रकाश कुमार पांडेय)

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