VB-G RAM G: मनरेगा का युग खत्म! 1 जुलाई से VB-G RAM G लागू..राज्यों को उठाना होगा 40% खर्च अधिसूचना जारी

VB-G RAM G

ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में बड़ा बदलाव…अब राज्यों पर भी बढ़ेगा आर्थिक बोझ

करीब दो दशक तक ग्रामीण भारत में रोजगार की सबसे बड़ी गारंटी मानी जाने वाली मनरेगा योजना अब इतिहास बनने जा रही है। केंद्र सरकार ने सोमवार को अधिसूचना जारी कर साफ कर दिया कि 1 जुलाई 2026 से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी MGNREGA पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। अब केन्द्र सरकार की ओर से नई योजना “विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण जिसे VB-G RAM G कहा जाता है वह लागू होगी।

ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि 1 जुलाई 2026 से मनरेगा कानून और उसके तहत जारी सभी नियम, योजनाएं, आदेश और दिशानिर्देश समाप्त माने जाएंगे। यह अधिसूचना ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव रोहिणी आर भाजीभाकरे की ओर से जारी की गई।

केंद्र सरकार ने VB-G RAM G कानून को पिछले साल दिसंबर 2025 में पारित किया था। नई योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार के साथ-साथ आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण देना बताया गया है।

नई योजना के तहत अब हर ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। यह पहले की मनरेगा योजना से 25 दिन ज्यादा है, क्योंकि मनरेगा में 100 दिन रोजगार की गारंटी थी। हालांकि, सबसे बड़ा बदलाव फंडिंग पैटर्न में किया गया है।

नई व्यवस्था के अनुसार सामान्य राज्यों में खर्च का अनुपात 60:40 रहेगा, यानी 60 प्रतिशत खर्च केंद्र और 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकारें उठाएंगी। वहीं पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी राज्यों और विधानसभा वाले केंद्रशासित प्रदेशों में यह अनुपात 90:10 रहेगा। बिना विधानसभा वाले केंद्रशासित प्रदेशों में पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी।

सरकार का कहना है कि नई योजना सिर्फ मजदूरी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, आजीविका बढ़ाने और गांवों में स्थायी विकास को बढ़ावा देने पर फोकस करेगी।

हालांकि, विपक्ष ने इस नई योजना के कई प्रावधानों पर सवाल खड़े किए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्र सरकार ने राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है। खासतौर पर फंड शेयरिंग व्यवस्था को लेकर कई राज्य सरकारों ने चिंता जताई है।

विपक्ष ने यह भी कहा है कि कृषि के पीक सीजन के दौरान रोजगार गारंटी में अस्थायी रोक लगाने का प्रावधान किसानों और मजदूरों दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके अलावा “नॉर्मेटिव एलोकेशन” जैसे प्रावधानों को लेकर भी बहस छिड़ गई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मनरेगा सिर्फ एक रोजगार योजना नहीं थी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बड़ा सहारा बन चुकी थी। ऐसे में उसका खत्म होना और नई व्यवस्था लागू होना ग्रामीण राजनीति और राज्यों की वित्तीय स्थिति दोनों पर बड़ा असर डाल सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक नई योजना में रोजगार के दिनों की संख्या बढ़ाना सकारात्मक कदम माना जा सकता है, लेकिन राज्यों पर बढ़ने वाला आर्थिक बोझ आने वाले समय में विवाद का कारण बन सकता है। कई राज्य पहले से वित्तीय दबाव में हैं और अब उन्हें ग्रामीण रोजगार योजना में अतिरिक्त धन देना होगा।

1 जुलाई 2026 से लागू होने वाली यह नई व्यवस्था ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने का दावा कर रही है, लेकिन इसका वास्तविक असर जमीन पर कैसा होगा, यह आने वाले महीनों में साफ हो पाएगा।

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