टोक्यो को पीछे छोड़ेगा दिल्ली-एनसीआर, जेवर एयरपोर्ट बनेगा विकास की नई उड़ान
दिल्ली-एनसीआर बनेगा ग्लोबल सिटी
दिल्ली-एनसीआर आने वाले वर्षों में केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा और आधुनिक शहरी क्षेत्र बनने की राह पर है।
संयुक्त राष्ट्र की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, अगले चार वर्षों में दिल्ली-एनसीआर आबादी और विकास के मामले में टोक्यो को पीछे छोड़ देगा। वर्तमान में यहां करीब 3.5 करोड़ लोग रहते हैं और क्षेत्र लगातार नोएडा, गुड़गांव और गाजियाबाद की दिशा में फैलता जा रहा है।
जेवर एयरपोर्ट से नई उड़ान
दिल्ली-एनसीआर की इस विकास यात्रा में सबसे बड़ा कदम होगा नोएडा के जेवर में बन रहा नया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा — नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA)। यह एयरपोर्ट दिसंबर से वाणिज्यिक उड़ानों के लिए शुरू होने जा रहा है। इसे उत्तर प्रदेश सरकार और स्विस कंपनी ज्यूरिख एजी के सहयोग से बनाया जा रहा है। यह न केवल एक नया हवाई अड्डा होगा बल्कि उत्तर भारत के आर्थिक नक्शे को बदलने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर हब साबित होगा।
टोक्यो को देगा कड़ी टक्कर
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे टोक्यो का हनेडा एयरपोर्ट शहर के विस्तार का केंद्र बना, वैसे ही जेवर एयरपोर्ट पूर्वी दिल्ली-एनसीआर के विकास का इंजन बनेगा। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) ने दक्षिण और पश्चिम दिल्ली को विकसित किया, वहीं जेवर एयरपोर्ट मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, मथुरा और आगरा जैसे शहरों को नई दिशा देगा। इससे रोजगार, रियल एस्टेट, शिक्षा और पर्यटन को नई ऊंचाइयां मिलेंगी।
विशाल पैमाने पर तैयारियां जारी
जेवर एयरपोर्ट नोएडा से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर बन रहा है।पहले चरण में इसमें एक रनवे और एक टर्मिनल (टी1) होगा, जिसकी सालाना क्षमता 1.2 करोड़ यात्रियों की होगी। भविष्य में इसे चार रनवे और पांच टर्मिनलों तक विस्तार दिया जाएगा, जिससे यह हर साल 7 करोड़ यात्रियों को संभाल सकेगा। इसके साथ ही यहां कार्गो हब, विमान मरम्मत केंद्र और लॉजिस्टिक पार्क जैसे कई प्रोजेक्ट भी विकसित किए जा रहे हैं।
पूर्वी क्षेत्रों को मिलेगी रफ्तार
इंदिरा गांधी एयरपोर्ट की तरह, नोएडा एयरपोर्ट क्षेत्रीय विकास की धुरी बनेगा। इससे पूर्वी यूपी के कई जिले और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र सीधे जुड़ जाएंगे। मेरठ एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के माध्यम से जेवर से दिल्ली और आगरा तक की यात्रा बेहद आसान और तेज हो जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, एयरपोर्ट चालू होने के बाद आस-पास के क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश और आवासीय विकास की गति कई गुना बढ़ेगी।
दस शहरों से उड़ानें शुरू
केंद्रीय विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने जानकारी दी कि शुरुआती चरण में जेवर एयरपोर्ट से कम से कम 10 शहरों के लिए उड़ानें शुरू की जाएंगी। इनमें मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, अहमदाबाद और जयपुर जैसे प्रमुख शहर शामिल होंगे। सरकार का लक्ष्य है कि दूसरे चरण में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी शुरू की जाएं।
यह कदम दिल्ली-एनसीआर को एक डुअल एयरपोर्ट सिटी मॉडल में बदल देगा, जिससे यात्री भार दोनों एयरपोर्टों में संतुलित रहेगा।
अत्याधुनिक तकनीक और सुविधाएं
नोएडा एयरपोर्ट को पूरी तरह से डिजिटल और स्पर्शरहित यात्रा अनुभव के लिए डिजाइन किया गया है। यहां 3डी बॉडी स्कैनर, बायोमेट्रिक बोर्डिंग, फेस रिकग्निशन और स्मार्ट सुरक्षा प्रणाली जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। दो बड़े एग्जीक्यूटिव लाउंज, एक वीआईपी टर्मिनल, स्मार्ट कार पार्किंग और सौर ऊर्जा से संचालित ग्रिड सिस्टम इसकी खासियतें होंगी। एयरपोर्ट के सीईओ क्रिस्टोफ श्नेलमैन के अनुसार, इसे “स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य के अद्भुत मेल” के रूप में विकसित किया जा रहा है।
आर्थिक विकास को नई दिशा
जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी में रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट बताती है कि अकेले एयरपोर्ट से लगभग 1 लाख प्रत्यक्ष और 2 लाख अप्रत्यक्ष नौकरियां सृजित होंगी। इसके अलावा रियल एस्टेट, हॉस्पिटैलिटी, शिक्षा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में विदेशी निवेश बढ़ेगा।
जब इंदिरा गांधी और नोएडा एयरपोर्ट साथ मिलकर काम करेंगे, तो यह क्षेत्र भारत का सबसे बड़ा आर्थिक कॉरिडोर बन जाएगा।
विकास की नई उड़ान
दिल्ली-एनसीआर का यह परिवर्तन केवल इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीमित नहीं रहेगा — यह भारत की वैश्विक पहचान को एक नए स्तर पर ले जाएगा। जेवर एयरपोर्ट सिर्फ एक हवाई अड्डा नहीं, बल्कि उत्तर भारत की आर्थिक क्रांति का प्रतीक बनने जा रहा है।
जैसे टोक्यो, लंदन या न्यूयॉर्क अपने-अपने देशों की प्रगति का प्रतीक बने, वैसे ही आने वाले दशक में दिल्ली-एनसीआर “इंडिया की ग्लोबल गेटवे सिटी” कहलाएगा। (प्रकाश कुमार पांडेय )