Delhi Blast: मेरठ जोन फिर हाई अलर्ट पर — हर दशक में पकड़ा गया एक आतंकी, इस बार निशाने पर पढ़े-लिखे युवा

Delhi Blast Meerut zone again on high alert one terrorist arrested every decade

Delhi Blast: मेरठ जोन फिर हाई अलर्ट पर — हर दशक में पकड़ा गया एक आतंकी, इस बार निशाने पर पढ़े-लिखे युवा

दिल्ली में हाल ही में हुए ब्लास्ट के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश (वेस्ट यूपी) का मेरठ जोन एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है। इस जोन में पहले भी कई आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हो चुका है और अब एक बार फिर अलर्ट का स्तर बढ़ा दिया गया है। इस बार आतंक का तरीका भी बदला हुआ बताया जा रहा है — लक्ष्य है पढ़े-लिखे, शिक्षित वर्ग को गुमराह करना।

हाई अलर्ट पर मेरठ जोन

दिल्ली धमाके के बाद मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मुरादाबाद, बुलंदशहर और हापुड़ समेत पूरे मेरठ जोन में सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। एडीजी मेरठ जोन भानु भास्कर ने बताया कि अंतरजनपदीय और अंतरराज्यीय सीमाओं पर बैरियर लगाकर वाहनों की तलाशी ली जा रही है। रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिस की चौकसी बढ़ा दी गई है। उन्होंने कहा, “हमने नदियों के किनारों और गांवों के बीच आने-जाने वाले रास्तों पर भी निगरानी बढ़ाई है। साइबर सेल और पुलिस मित्र सोशल मीडिया पर संदिग्ध गतिविधियों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।” एडीजी के अनुसार, एटीएस और एसटीएफ की टीमें भी अपने स्तर से जांच में जुटी हैं। जनता को भी सतर्क रहने को कहा गया है। “लोग खुलकर सूचनाएं दे रहे हैं और उनका नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जा रहा है,” उन्होंने बताया।

इस बार निशाने पर पढ़े-लिखे युवा

एडीजी भानु भास्कर ने कहा कि इस बार आतंक संगठनों की रणनीति अलग है — उन्होंने “पढ़े-लिखे और शिक्षित वर्ग को गुमराह करने की कोशिश की है। उन्होंने बताया कि मेरठ जोन की सीमाएं दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से लगती हैं, इसलिए इन सभी राज्यों की पुलिस और खुफिया एजेंसियों के बीच निरंतर समन्वय किया जा रहा है। एडीजी ने कहा, “कुछ लोग पथभ्रष्ट होकर गलत रास्ते पर चले गए हैं, लेकिन जनता ऐसे लोगों को बेनकाब करने में हमारी मदद कर रही है। सोशल मीडिया और साइबर प्लेटफ़ॉर्म पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की उकसाने वाली गतिविधि को रोका जा सके।”

डॉक्टर मॉड्यूल पर शिकंजा

दिल्ली ब्लास्ट केस में जांच एजेंसियां अब एक ‘डॉक्टर मॉड्यूल’ की जांच कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, अब तक जितने भी संदिग्ध सामने आए हैं, वे सभी मेडिकल पृष्ठभूमि से हैं। इस मॉड्यूल से जुड़े नामों में डॉ. आदिल, डॉ. उमर, डॉ. परवेज़ और डॉ. शाहीन शामिल बताए जा रहे हैं। सभी आरोपी उच्च शिक्षा प्राप्त हैं और विभिन्न मेडिकल संस्थानों में काम कर चुके हैं। एडीजी भानु भास्कर ने कहा, “जांच में तेजी लाई गई है, लेकिन फिलहाल अधिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।” सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इन डॉक्टरों को सोशल मीडिया और ऑनलाइन इस्लामिक चैट ग्रुप्स के ज़रिए प्रभावित किया गया।

वेस्ट यूपी: आतंक का पुराना गढ़

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पिछले दो दशकों के दौरान कई बड़े आतंकी या जासूसी मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ है। हर दशक में यहां से किसी न किसी आईएसआई या आतंकी नेटवर्क से जुड़े लोग पकड़े गए।

महत्वपूर्ण घटनाएं:

19 अक्टूबर 2018: मेरठ कैट का जवान कंचन पाकिस्तान को गोपनीय सूचना भेजते हुए पकड़ा गया।

27 नवंबर 2015: मेरठ कैंट से आईएसआई एजेंट इजाज़ गिरफ्तार।

16 अगस्त 2014: मेरठ से संदिग्ध एजेंट आसिफ अली दबोचा गया।

10 जनवरी 2009: सहारनपुर से आमिर अहमद उर्फ़ भूरा की गिरफ्तारी।

12 दिसंबर 2008: लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी फहीम अंसारी मेरठ से पकड़ा गया।

21 जून 2007: बिजनौर में दो हुजी आतंकी आरडीएक्स के साथ गिरफ्तार।

10 मार्च 2005: मेरठ से आईएसआई एजेंट खलील हुसैन शाह गिरफ्तार।

18 अप्रैल 2004: मेरठ की रूबी बेगम आईएसआई से जुड़े होने के आरोप में पकड़ी गई।

14 मार्च 2003: मुजफ्फरनगर से जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकी गिरफ्तार।

15 जुलाई 2002: मुजफ्फरनगर से एक आईएसआई एजेंट गिरफ्तार।

9 जुलाई 2002: मुरादाबाद से हिज्बुल मुजाहिदीन के पांच आतंकी गिरफ्तार।

इन घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को लगातार सतर्क रहने पर मजबूर किया। अब दिल्ली ब्लास्ट के बाद एक बार फिर मेरठ जोन की भूमिका अहम हो गई है।

जब शिक्षित वर्ग आतंकी रास्ते पर मुड़ा

पिछले कुछ वर्षों में देशभर में शिक्षित युवाओं का कट्टरपंथ की ओर झुकाव बढ़ा है। 2024: केरल की एक मेडिकल छात्रा ISIS के ऑनलाइन सेल से जुड़ी मिली। 2023: मुंबई के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने डार्क वेब से बम कोडिंग सीखी और युवाओं को ट्रेनिंग दी। 2022: दिल्ली के एक जूनियर डॉक्टर पर आतंकी संगठन को शरण देने का आरोप लगा। 2021: बेंगलुरु के आईटी कर्मचारी ने विदेशी फंडिंग से 2 लाख डॉलर की क्रिप्टो राशि आतंकी समर्थकों को भेजी। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह “नई पीढ़ी का कट्टरपंथ” है, जिसमें बंदूक या बॉर्डर की जगह साइबर नेटवर्क और वैचारिक गुमराह करने के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।

भरोसा ही सबसे बड़ी ताकत

मेरठ जोन पुलिस अब साइबर, फिजिकल और सोशल मॉनिटरिंग — तीनों स्तर पर अलर्ट है। एडीजी भानु भास्कर ने कहा हम जनता से अपील करते हैं कि अफवाहों से दूर रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें। जनता और पुलिस के बीच भरोसा ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि जन सहयोग के बिना आतंकवाद से लड़ाई अधूरी है। दिल्ली ब्लास्ट की जांच में हर नए सुराग के साथ मेरठ जोन एक बार फिर देश की सुरक्षा व्यवस्था के केंद्र में है।

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