दिल्ली ब्लास्ट फंडिंग: हवाला नेटवर्क का पर्दाफाश, यूपी में मेवात एजेंट और 30 संदिग्धों की तलाश तेज
दिल्ली ब्लास्ट फंडिंग ट्रेल हवाला नेटवर्क: दिल्ली विस्फोट मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसमें शामिल फंडिंग नेटवर्क से जुड़े कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। खुफिया जानकारी और पूछताछ से यह उजागर हुआ है कि फरीदाबाद के अल-फलाह विश्वविद्यालय से जुड़े कथित “डॉक्टर मॉड्यूल” को किसी संगठन से सीधे नहीं, बल्कि दिल्ली और उसके आसपास सक्रिय एक हवाला नेटवर्क के माध्यम से फंडिंग मिल रही थी। यह नेटवर्क कथित तौर पर संदिग्ध डॉक्टरों, डॉ. मुजम्मिल, डॉ. उमर और डॉ. शाहीन तक पैसा पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था।
जांच एजेंसियों को कई तकनीकी और भौतिक सबूतों के आधार पर संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था और इसका मेवात क्षेत्र के एक एजेंट के साथ गहरा संबंध था। यही एजेंट मॉड्यूल को हवाला के पैसे से जोड़ने वाली कड़ी था और कथित तौर पर नकदी पहुंचाने के लिए जिम्मेदार था। इस नेटवर्क का दायरा अब और बढ़ गया है, क्योंकि एक डायरी में 30 से अधिक नाम और नंबर पाए गए हैं, जिससे जांच को एक नई दिशा मिली है।
हवाला नेटवर्क मेवात एजेंट के जरिए जुड़ा था
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली और आसपास के इलाके लंबे समय से हवाला गतिविधियों के लिए संवेदनशील माने जाते रहे हैं। इस मामले की शुरुआती जांच के निष्कर्ष भी इसी दिशा में इशारा कर रहे हैं। एजेंसियों के अनुसार, डॉक्टर मॉड्यूल के सदस्य, डॉ. मुजम्मिल, डॉ. उमर और डॉ. शाहीन, किसी बड़े हवाला ऑपरेटर के सीधे संपर्क में नहीं थे। इसके बजाय, वे मेवात के एक एजेंट के माध्यम से दिल्ली के हवाला नेटवर्क तक पहुंचे। सूत्रों का दावा है कि एजेंट ने सबसे पहले डॉ. शाहीन से संपर्क किया और बाद में इसी संपर्क की श्रृंखला के माध्यम से वह डॉ. मुजम्मिल तक पहुंचा। एजेंट कुछ हफ्ते पहले ही डॉ. उमर से भी मिला था। इसी एजेंट ने कथित तौर पर हवाला का पैसा प्राप्त किया, जिसे बाद में मॉड्यूल के सदस्यों तक पहुंचाया गया। इस पूरी प्रक्रिया में इस बात का खास ध्यान रखा गया कि कोई भी डिजिटल रिकॉर्ड न बने और फंड के स्रोत को पूरी तरह से छुपाया जा सके।
पूरा नेटवर्क अल-फलाह विश्वविद्यालय से शुरू हुआ
जांच अधिकारियों के अनुसार, इस मॉड्यूल का आधार हरियाणा के फरीदाबाद जिले के धौज इलाके में स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय के आसपास था। वहां पढ़ने वाले या रहने वाले कुछ लोग कथित तौर पर मॉड्यूल के संपर्क में आए और धीरे-धीरे एक समूह बन गया। विस्फोट की योजना, आवश्यक सामग्री की खरीद और लॉजिस्टिक्स से संबंधित निर्णय इसी नेटवर्क के माध्यम से लिए गए। एजेंसियों का कहना है कि फंडिंग का प्रवाह इस नेटवर्क की रीढ़ था। हवाला के जरिए मिला पैसा कथित सदस्यों तक पहुंचता था और इसका इस्तेमाल उनके रोजमर्रा के खर्चों के साथ-साथ अन्य तैयारियों के लिए भी किया जाता था।
आतंकी फंडिंग: कहां-कहां हुआ खर्च?
एक खुफिया अधिकारी ने खुलासा किया कि हवाला नेटवर्क से मिले पैसे का इस्तेमाल मॉड्यूल के कथित सदस्यों ने विभिन्न तैयारियों के लिए किया। सूत्रों के अनुसार, पैसा मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्यों पर खर्च किया गया:
- अमोनियम नाइट्रेट जैसे रसायनों की खरीद।
- विस्फोट में इस्तेमाल की गई कार का भुगतान।
- विस्फोट से संबंधित अन्य उपकरण और सामग्री।
- स्थानों की बार-बार रेकी करने के दौरान होने वाले खर्च।
- यात्रा, ईंधन, आवास और अन्य लॉजिस्टिकल कार्यों पर होने वाले खर्च।
अधिकारी ने यह भी कहा कि इस तरह की गतिविधियों के लिए नकदी की अधिक आवश्यकता होती है, यही कारण है कि बैंकिंग प्रणाली में कोई रिकॉर्ड छोड़ने से बचने के लिए हवाला नेटवर्क को चुना गया।
एक डायरी में 30 से अधिक नाम और नंबर दर्ज – एक नई लीड
जांच में एक महत्वपूर्ण सफलता तब मिली जब एजेंसियों ने डॉ. मुजम्मिल के कमरे से एक डायरी बरामद की। इस डायरी में 30 से अधिक व्यक्तियों के नाम और मोबाइल नंबर थे। कुछ एंट्री में उनके आगे रकम भी लिखी हुई थी। जांच दल अब यह पता लगाने में जुटे हैं।
ये लोग कौन हैं?
वे देश के किस क्षेत्र में सक्रिय हैं?
मॉड्यूल या फंडिंग चेन से उनका क्या संबंध है?
क्या वे व्यक्ति, जिनके नाम के आगे रकम लिखी है, हवाला का पैसा लेने या पहुंचाने में शामिल हैं। इस डायरी के आधार पर, एजेंसियों ने मोबाइल नंबरों से लोकेशन हिस्ट्री, कॉल रिकॉर्ड और सोशल कॉन्टैक्ट्स का विश्लेषण करना शुरू कर दिया है।
जांच के दायरे में बैंक खाते के लेनदेन
एजेंसियां संदिग्ध डॉक्टरों के बैंक खातों की भी जांच कर रही हैं। सूत्रों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों के लेनदेन, नकद निकासी, अचानक जमा, संदिग्ध खातों से ट्रांसफर और अन्य गतिविधियों की बारीकी से जांच की जा रही है। यदि किसी भी खाते में कोई असामान्य गतिविधि या संदिग्ध जमा/निकासी पाई जाती है, तो उसे हवाला श्रृंखला से जोड़ा जाएगा।
फंडिंग चेन को तोड़ने पर केंद्रित जांच एजेंसियां
अधिकारियों का कहना है कि किसी भी आतंकवादी गतिविधि का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उसकी फंडिंग चेन होती है। अगर पैसे का प्रवाह रोक दिया जाए, तो मॉड्यूल की गतिविधियों को नियंत्रित करना आसान हो जाता है। यही कारण है कि एजेंसियां इस मामले में फंडिंग प्रदान करने वाले हर व्यक्ति, माध्यम और श्रृंखला की पहचान कर रही हैं। दिल्ली का हवाला नेटवर्क पहले भी कई जांचों में सामने आ चुका है, लेकिन इस बार संदिग्ध डॉक्टरों के मॉड्यूल से इसका संबंध एक नए प्रकार का मामला माना जा रहा है।
जांच में उभर रहा हवाला नेटवर्क का पैटर्न
पैसा पहले दिल्ली में हवाला ऑपरेटरों तक पहुंचता था। वहां से इसे मेवात के एक एजेंट द्वारा प्राप्त किया जाता था। और फिर, यह पैसा डॉक्टर मॉड्यूल के सदस्यों तक पहुंचाया जाता था। यह प्रणाली तेज, गोपनीय और बहु-स्तरीय थी, जिससे पैसा बैंकिंग प्रणाली में दर्ज हुए बिना प्रवाहित होता रहता था।
आगे की जांच में और बड़े खुलासे की संभावना
जांच एजेंसियों का मानना है कि मॉड्यूल की फंडिंग की पूरी संरचना अभी तक सामने नहीं आई है। संभावना है कि डायरी, डिजिटल डेटा, बैंक लेनदेन और एजेंट के संपर्कों के माध्यम से और भी नामों की पहचान की जाएगी। एक अधिकारी ने कहा कि आने वाले दिनों में हवाला प्रणाली में शामिल लोगों, पैसा पहुंचाने वालों और मॉड्यूल के संपर्कों की पहचान और स्पष्ट हो सकती है।





