भारत के रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने शुक्रवार को कहा कि तेजी से बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात में देश की सुरक्षा और रणनीतिक मजबूती के लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तकनीकी प्रतिस्पर्धा ने पूरी दुनिया की व्यवस्था को बदल दिया है। ऐसे में भारत को रक्षा उत्पादन और समुद्री क्षमताओं में स्वदेशी ताकत बढ़ाने की दिशा में तेज कदम उठाने होंगे।
बदलते वैश्विक परिदृश्य और ऊर्जा मार्गों पर बढ़ते तनाव ने सुरक्षा रणनीति को और अहम बना दिया है
कोलकाता में आयोजित “Sagar Sankalp – Reclaiming India’s Maritime Glory” कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि दुनिया में पुराने शक्ति संतुलन और सोच तेजी से बदल रहे हैं। विशेष रूप से मध्य पूर्व में जारी तनाव और अहम ऊर्जा मार्गों जैसे Strait of Hormuz पर अस्थिरता का असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों ने यह साफ कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता अब अस्थायी नहीं बल्कि नई सामान्य स्थिति बनती जा रही है, इसलिए भारत को अपनी सुरक्षा तैयारियों को और मजबूत करना होगा।
आधुनिक तकनीक के दौर में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना भारत के लिए रणनीतिक आवश्यकता बन गई है
रक्षा मंत्री ने कहा कि तकनीक की तेजी से हो रही प्रगति ने युद्ध और सुरक्षा की प्रकृति को पूरी तरह बदल दिया है। ऐसे समय में भारत के लिए जरूरी है कि वह रक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकों में खुद को मजबूत बनाए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पिछले कुछ वर्षों में लागू की गई नीतिगत और संरचनात्मक सुधारों की वजह से देश में रक्षा निर्माण क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार नई पहल कर रही है।
घरेलू रक्षा उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि से भारत की क्षमता तेजी से बढ़ रही है
रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का रक्षा उत्पादन पहली बार ₹1.5 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया। इसके साथ ही रक्षा निर्यात भी अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंचते हुए लगभग ₹24,000 करोड़ दर्ज किए गए। उन्होंने उम्मीद जताई कि अप्रैल 2026 तक यह निर्यात करीब ₹29,000 करोड़ तक पहुंच सकता है। सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2029-30 तक रक्षा निर्यात को ₹50,000 करोड़ तक ले जाना है, जिससे भारत वैश्विक रक्षा बाजार में मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सके।
भारतीय नौसेना के लिए बनने वाले सभी नए युद्धपोत और पनडुब्बियां अब देश के भीतर ही तैयार की जा रही हैं
रक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि भारत धीरे-धीरे “Builder’s Navy” की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में Indian Navy के लिए ऑर्डर किए गए सभी युद्धपोत और पनडुब्बियां देश के ही शिपयार्ड में बन रही हैं। सरकार का लक्ष्य शिपयार्ड को अत्याधुनिक तकनीक वाले केंद्रों में बदलना है, जहां डिजिटल डिजाइन, मॉड्यूलर निर्माण तकनीक और मजबूत सप्लाई चेन के जरिए विश्वस्तरीय जहाज बनाए जा सकें।
समुद्री क्षेत्र में बड़े निवेश और निजी भागीदारी से भारत को वैश्विक जहाज निर्माण केंद्र बनाने की योजना
सरकार की दीर्घकालिक समुद्री रणनीति के तहत Maritime India Vision 2030 और Maritime Amrit Kaal Vision 2047 के माध्यम से करीब ₹3 लाख करोड़ के निवेश की योजना बनाई गई है। इस निवेश का उद्देश्य आधुनिक शिपबिल्डिंग क्लस्टर विकसित करना और देश के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। रक्षा मंत्री ने MSME, स्टार्टअप और स्थानीय उद्योगों की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक युद्धपोतों के निर्माण में कई उद्योगों का संयुक्त योगदान होता है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत को दुनिया के शीर्ष 10 जहाज निर्माण देशों में और 2047 तक शीर्ष 5 देशों में शामिल करना है।