कच्चा तेल 100 डॉलर के नीचे, फिर भी पेट्रोल-डीजल में राहत क्यों नहीं?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए बड़ी राहत की खबर है। सोमवार को कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया। भारत जैसे देश के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा आयात करता है। यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होता है तो भारत का आयात बिल और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो सकता है।
लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यही है—जब कच्चा तेल सस्ता हो रहा है तो पेट्रोल-डीजल के दाम क्यों नहीं घट रहे?
तेल सस्ता, लेकिन पंप पर कीमत स्थिर
6 अक्टूबर को सरकारी तेल कंपनियों आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर है। मुंबई में पेट्रोल 111.31 रुपये और डीजल 97.97 रुपये के आसपास है।
यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट का तत्काल फायदा उपभोक्ताओं को नहीं मिला। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि तेल कंपनियां केवल एक दिन के कच्चे तेल के भाव को देखकर खुदरा कीमत तय नहीं करतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों का रुझान, रुपये की स्थिति, रिफाइनिंग लागत, टैक्स और दूसरे खर्च मिलकर अंतिम कीमत तय करते हैं।
नायरा की बढ़ोतरी ने बढ़ाई चिंता
दूसरी तरफ निजी तेल कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल में 5 रुपये और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी के 7 हजार से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर इसका असर दिख रहा है।
नायरा के पंपों पर पेट्रोल करीब 119.54 रुपये और डीजल 102.64 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। यही वजह है कि वाहन चालकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकारी तेल कंपनियां भी आने वाले दिनों में कीमत बढ़ा सकती हैं।
फिलहाल राहत की बात यही है कि सरकारी तेल कंपनियों ने कीमतें बढ़ाने का फैसला नहीं किया है।
100 डॉलर के नीचे तेल, क्या जेब को मिलेगी राहत?
कच्चे तेल का 100 डॉलर से नीचे आना निश्चित तौर पर सकारात्मक संकेत है, लेकिन एक-दो दिन की गिरावट से पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी आ सकती है। तेल बाजार में असली राहत तभी मानी जाएगी जब कच्चा तेल लंबे समय तक निचले स्तर पर बना रहे।
यही वजह है कि सरकार और तेल कंपनियां फिलहाल सावधानी के साथ कदम बढ़ा रही हैं।
अलग-अलग शहरों में अलग कीमत क्यों?
पेट्रोल-डीजल की कीमत पूरे देश में एक जैसी नहीं है। चंडीगढ़ में पेट्रोल 98.10 रुपये और डीजल 86.09 रुपये है, जबकि हैदराबाद में पेट्रोल 115.69 रुपये और डीजल 103.82 रुपये प्रति लीटर है।
इस अंतर की बड़ी वजह राज्यों के अलग-अलग टैक्स और स्थानीय शुल्क हैं। यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल एक ही कीमत पर बिकता है, लेकिन उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते अलग-अलग राज्यों में कीमत बदल जाती है।
अभी राहत की उम्मीद कम क्यों?
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती अनिश्चितता है। एक तरफ कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर से नीचे आई है, दूसरी तरफ पश्चिम एशिया का तनाव बाजार को लगातार प्रभावित कर रहा है।
इसलिए फिलहाल तस्वीर यह है कि कच्चा तेल सस्ता हुआ है, लेकिन पेट्रोल-डीजल सस्ता नहीं हुआ। सरकारी कंपनियों ने कीमतें रोककर जरूर राहत दी है, लेकिन बड़ी कटौती के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में लंबे समय तक स्थिर और कम कीमत जरूरी होगी।
यानी वाहन चालकों के लिए अभी सबसे बड़ी खबर पेट्रोल-डीजल का सस्ता होना नहीं, बल्कि कीमतों का स्थिर रहना है। असली राहत तब होगी, जब कच्चे तेल की गिरावट का फायदा लगातार कई दिनों या हफ्तों तक बना रहे और उसका असर सीधे पेट्रोल पंप की कीमतों पर दिखाई दे।