क्रिकेटर राहुल चाहर के पिता पर साइबर ठगों का ‘डिजिटल अरेस्ट’ हमला, समझदारी से नाकाम की साजिश

Cricketer Rahul Chahar father was attacked by cyber criminals with a digital arrest

क्रिकेटर राहुल चाहर के पिता पर साइबर ठगों का ‘डिजिटल अरेस्ट’ हमला, समझदारी से नाकाम की साजिश

भारतीय क्रिकेटर राहुल चाहर के पिता देशराज सिंह पर साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट का नाटक रचकर रुपये ठगने का प्रयास किया। वर्दीधारी बनकर वीडियो कॉल करने वाले ठगों ने उन्हें पुलिस कार्रवाई की धमकी दी और ऑनलाइन भुगतान की मांग की। लेकिन देशराज की समझदारी और सूझबूझ ने इस पूरी ठगी को नाकाम कर दिया। उन्होंने ठगों को डांटकर जवाब दिया और कॉल काट दी।

कैसे हुआ पूरा मामला

आगरा के थाना जगदीशपुरा क्षेत्र के नरसी गांव में रहने वाले देशराज सिंह, जो भारतीय क्रिकेटर राहुल चाहर के पिता हैं, ने बताया कि उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आई। कॉलर ने कहा कि “आपका मोबाइल नंबर जल्द बंद होने वाला है, कृपया अपना आधार नंबर बताइए। देशराज सिंह ने बिना किसी शंका के आधार नंबर साझा कर दिया, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद उनके मोबाइल पर एक व्हाट्सऐप वीडियो कॉल आई।
कॉल रिसीव करते ही उन्होंने देखा कि सामने एक व्यक्ति पुलिस अधिकारी की वर्दी पहने टेबल पर बैठा था और उसके पीछे दो-तीन लोग भी पुलिस की वर्दी में खड़े थे। वीडियो देखकर ऐसा लग रहा था जैसे किसी थाने या ऑफिस का माहौल हो।

‘तुम्हारे फोन से अपराध हुआ है’
धमकी से शुरू हुआ ठगी का खेल
वीडियो कॉल में बैठे वर्दीधारी व्यक्ति ने कहा, “तुम्हारे फोन नंबर से गलत काम हुआ है। तुम पर केस दर्ज हो सकता है और जेल जाना पड़ेगा। इसके बाद उसने कहा कि अगर वो इस मामले को “यहां से निपटाना” चाहते हैं, तो ऑनलाइन भुगतान कर दें। यहीं देशराज सिंह को शक हुआ। उन्होंने ठग से पूछा, “अगर मुझसे कोई गलती हुई है तो मैं खुद थाने आकर बात कर लूंगा, ऑनलाइन पैसे क्यों भेजूं?” इतना सुनते ही सामने वाला ठग गुस्से में बोला, “तो फिर हम तुम्हारे घर पर पुलिस भेज रहे हैं। देशराज सिंह ने उस ठग को कड़ी फटकार लगाई और कहा, “भेज दो, देख लूंगा। झूठे कॉल करने से पहले सोच लिया करो। इस पर ठग ने झट से कॉल काट दी।

देशराज ने दिखाई समझदारी, बचा लिया नुकसान

देशराज सिंह ने तुरंत परिवार को पूरी घटना बताई और कहा कि इस तरह की कॉल्स से सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ क्षण के लिए उन्हें भरोसा हो गया था कि कोई सरकारी कॉल है, लेकिन वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी देखकर उन्हें समझ में आ गया कि यह कोई साइबर ठगों की चाल है। उन्होंने कहा अगर मैं थोड़ी देर और बहस करता तो शायद वो किसी लिंक या QR कोड भेज देता और मुझसे रुपये निकलवा लेता। मैंने तुरंत फोन काट दिया और नंबर ब्लॉक कर दिया।”

‘डिजिटल अरेस्ट’ का बढ़ता खतरा

हाल के दिनों में ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी के मामलों में तेजी आई है। इसमें ठग खुद को पुलिस, CBI या साइबर विभाग का अधिकारी बताकर पीड़ितों को वीडियो कॉल करते हैं। वे कहते हैं कि उनके नाम से कोई अपराध हुआ है या बैंक अकाउंट में गड़बड़ी है। फिर ऑनलाइन लिंक या QR कोड भेजकर पैसे वसूलते हैं। साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, अब ठग AI और वीडियो एडिटिंग टूल्स का इस्तेमाल कर वर्दीधारी पुलिस का नकली सेटअप बनाते हैं। इससे आम व्यक्ति को शुरुआत में कॉल असली लगती है और वो डर के मारे ठगों के जाल में फंस जाता है।

पुलिस ने जारी की चेतावनी

आगरा पुलिस ने इस घटना के बाद लोगों को चेतावनी दी है कि किसी भी व्यक्ति से वीडियो कॉल या फोन पर आधार, OTP या बैंक डिटेल्स साझा न करें। अगर कोई खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर धमकी दे तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें। पुलिस का कहना है कि कानूनी कार्रवाई या गिरफ्तारी कभी ऑनलाइन नहीं होती। अगर किसी मामले में जांच चल रही है, तो पुलिस व्यक्ति को नोटिस या समन के जरिए बुलाती है, न कि व्हाट्सऐप कॉल से।”
राहुल चाहर के परिवार ने दी प्रतिक्रिया
भारतीय क्रिकेटर राहुल चाहर के परिवार ने कहा कि यह घटना सबके लिए चेतावनी है। देशराज सिंह ने बताया कि उन्होंने पहले भी साइबर अपराध से जुड़े कई वीडियो देखे थे, इसीलिए वे तुरंत सतर्क हो गए। उन्होंने कहा कि “अब ठग इतने स्मार्ट हो गए हैं कि वो सरकारी दफ्तर जैसी पृष्ठभूमि बनाकर डराने की कोशिश करते हैं। हर किसी को समझना चाहिए कि कानून के नाम पर किसी से ऑनलाइन पैसे नहीं लिए जा सकते।”

जनजागरूकता की जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों में साइबर जागरूकता की कमी है। डिजिटल अरेस्ट, फर्जी इनकम टैक्स कॉल, बैंक KYC अपडेट जैसे धोखे अब रोज़मर्रा के बन गए हैं। सरकार और पुलिस लगातार जागरूकता अभियान चला रही है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में अब भी लोग डर या भरोसे में आकर ठगी के शिकार हो जाते हैं। देशराज सिंह ने जिस तरह अपनी सूझबूझ से ठगों की चाल नाकाम की, वह एक मिसाल है। अगर उन्होंने डर या घबराहट में कोई भुगतान कर दिया होता, तो लाखों रुपये का नुकसान हो सकता था। यह घटना चेतावनी है कि कोई भी ‘डिजिटल अरेस्ट’ या ‘ऑनलाइन पुलिस’ कॉल महज ठगी का जाल है। सतर्क रहें, किसी भी अंजान कॉल या लिंक पर भरोसा न करें, और साइबर अपराधियों के खिलाफ आवाज उठाएं। प्रकाश कुमार पांडेय

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