Credit Card Tips: क्रेडिट कार्ड का सिर्फ ₹500 बकाया छोड़ना भी पड़ सकता है भारी, ब्याज के साथ बिगड़ सकता है पूरा हिसाब

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते समय ज्यादातर लोग बिल की बड़ी रकम पर ध्यान देते हैं, लेकिन छोटी बची हुई राशि को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। मसलन, अगर किसी ग्राहक ने अपने क्रेडिट कार्ड का लगभग पूरा बिल चुका दिया और सिर्फ ₹500 बाकी रह गए, तो यह रकम छोटी जरूर है, लेकिन इसका असर बड़ा हो सकता है। समय पर पूरा भुगतान नहीं होने पर कार्ड जारी करने वाला बैंक या वित्तीय संस्थान अपनी शर्तों के अनुसार बकाया राशि पर ब्याज लगा सकता है। इसके अलावा टैक्स और लागू शुल्क भी जुड़ सकते हैं। इसलिए सिर्फ मिनिमम अमाउंट भरकर यह मान लेना कि पूरा भुगतान हो गया, सही नहीं है।

मिनिमम पेमेंट करने से पूरा ब्याज खत्म नहीं होता है

क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट में आमतौर पर Total Amount Payable और Minimum Amount Due अलग-अलग दिए जाते हैं। मिनिमम राशि जमा करने से ग्राहक का भुगतान ओवरड्यू होने से बच सकता है, लेकिन इससे पूरा बकाया खत्म नहीं होता। अगर ₹500 बाकी हैं तो उस राशि पर कार्ड की शर्तों के अनुसार ब्याज लग सकता है। इसलिए कार्डधारक को सिर्फ मिनिमम पेमेंट के बजाय पूरा बिल चुकाने की कोशिश करनी चाहिए।

₹500 के छोटे बकाये पर ब्याज कैसे बढ़ सकता है, इसे ऐसे समझिए

मान लीजिए किसी क्रेडिट कार्ड पर सालाना ब्याज दर 42 फीसदी है। इसे मासिक आधार पर करीब 3.5 फीसदी माना जाए तो ₹500 की रकम एक महीने तक बकाया रहने पर करीब ₹17.50 ब्याज बन सकता है। इसके ऊपर टैक्स और अन्य लागू शुल्क भी हो सकते हैं। हालांकि वास्तविक गणना कार्ड की शर्तों, लेनदेन की तारीख और भुगतान के तरीके पर निर्भर करेगी।

पूरा बिल न भरने पर ब्याज-मुक्त अवधि का फायदा भी प्रभावित हो सकता है

क्रेडिट कार्ड पर खरीदारी करने के बाद आमतौर पर 20 से 50 दिनों तक का ब्याज-मुक्त समय मिल सकता है। यह अवधि बिलिंग साइकिल और भुगतान की तारीख पर निर्भर करती है। लेकिन इसका लाभ लेने के लिए पिछला स्टेटमेंट बैलेंस तय समय में पूरी तरह चुकाना जरूरी होता है। अगर पिछली रकम बकाया रह जाती है तो आगे की खरीदारी पर मिलने वाला ब्याज-मुक्त फायदा प्रभावित हो सकता है।

₹500 बाकी रहने के बाद नई खरीदारी करना और महंगा पड़ सकता है

अगर पुराने बिल में ₹500 बकाया है और ग्राहक इसके बाद भी क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करता रहता है, तो नई रकम भी ब्याज के दायरे में आ सकती है। ऐसे में बकाया राशि धीरे-धीरे बढ़ सकती है। इसलिए छोटी रकम को नजरअंदाज करने के बजाय पहले पुराने आउटस्टैंडिंग बैलेंस को साफ करना ज्यादा जरूरी है।

क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते समय इन तारीखों और रकम का रखें ध्यान

कार्डधारकों को हर महीने ट्रांजेक्शन डेट, बिलिंग डेट, पेमेंट की आखिरी तारीख और कुल बकाया राशि जरूर जांचनी चाहिए। सिर्फ मिनिमम अमाउंट भरने से भुगतान की जिम्मेदारी पूरी नहीं होती। क्रेडिट कार्ड की ब्याज दर और शुल्क अलग-अलग कार्डों में अलग हो सकते हैं, इसलिए अंतिम भुगतान से पहले अपने कार्ड के नियमों को देखना जरूरी है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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