आज के चीन को समझने के लिए चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) को समझना भी जरूरी है। 16 से
29 अक्टूबर तक चीन की राजधानी पेइचिंग में आयोजित सीपीसी की 20वीं केंद्रीय समिति के पांचवें
पूर्ण सत्र में पार्टी के व्यापक और सख्त शासन को लगातार आगे बढ़ाने से जुड़े कई अहम मुद्दों पर
चर्चा की गई और संबंधित निर्णय को मंजूरी दी गई। इसने दुनिया को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की
शासन व्यवस्था को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर दिया है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने भी इस पर
ध्यान दिया है और सकारात्मक प्रतिक्रियाएं दी हैं।
आज दुनिया तेजी से बदलते हालात और बढ़ती अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है। ऐसे में
राजनीतिक दल प्रभावी शासन कैसे सुनिश्चित करें, यह पूरी दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती बन
गया है। 10 करोड़ से अधिक सदस्यों वाली दुनिया की सबसे बड़ी सत्तारूढ़ पार्टी के सामने भी यह
सवाल अहम है कि वह इतिहास में कई राजनीतिक दलों के उत्थान और पतन के चक्र से कैसे बच
सकती है। इसका जवाब पार्टी अनुशासन को लगातार मजबूत करने और खुद में सुधार की प्रक्रिया
जारी रखने की उसकी प्रतिबद्धता में छिपा है। नवंबर 2012 में सीपीसी की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस के
बाद से पार्टी ने व्यापक और सख्त अनुशासन लागू करने पर लगातार जोर दिया है। इससे पार्टी के
आत्म-सुधार के प्रयासों को एक नई दिशा मिली है।
सीपीसी की सफलता का एक अहम आधार नियमों और संस्थागत व्यवस्था के जरिए पार्टी का
संचालन करना है। पिछले कुछ वर्षों में पार्टी ने अपने संस्थागत ढांचे को लगातार मजबूत किया है
और इन व्यवस्थाओं की खूबियों को देश की शासन क्षमता में बदला है। इस तरह चीन ने राजनीतिक
दलों के सामने आने वाली शासन संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए एक अलग संस्थागत मॉडल
पेश किया है।
भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना भी दुनिया के लगभग सभी देशों के सामने एक बड़ी चुनौती है। इस
मामले में सीपीसी ने अपने तरीके से भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को आगे बढ़ाया है। पार्टी की 18वीं
राष्ट्रीय कांग्रेस के बाद से देशभर में अनुशासन निरीक्षण और निगरानी एजेंसियों ने 81.05 लाख
मामलों की जांच की है और 79.22 लाख लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। इन
प्रयासों को भ्रष्टाचार से निपटने के क्षेत्र में चीन के अनुभव के रूप में देखा जा रहा है, जिससे दूसरे
देशों को भी सीख मिल सकती है।
इसके अलावा, जनसमर्थन किसी भी राजनीतिक दल की सबसे बड़ी ताकत होता है। पार्टी के व्यापक
और सख्त शासन को चीन में जनसमर्थन मजबूत करने से भी जोड़ा जा रहा है। वर्ष 2025 में किए
गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक, 95.5 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने सीपीसी केंद्रीय समिति के आठ सूत्री
नियमों को लागू करने के प्रयासों का सकारात्मक मूल्यांकन किया। वहीं, मिस्र और इंडोनेशिया जैसे
देशों की राजनीतिक हस्तियों का मानना है कि जनता को केंद्र में रखकर काम करना ही चीनी
कम्युनिस्ट पार्टी की लगातार सफलता का एक प्रमुख कारण है।
ऐसे समय में जब पश्चिमी देशों के कई राजनीतिक दल संस्थागत कमजोरियों और शासन संबंधी
चुनौतियों से जूझ रहे हैं, सीपीसी के पार्टी प्रबंधन और आत्म-सुधार के तरीके दुनिया के सामने एक
अलग उदाहरण पेश करते हैं। इससे पश्चिमी मॉडल की नकल करने के बजाय अपनी परिस्थितियों
के अनुसार शासन व्यवस्था विकसित करने की सोच को भी बढ़ावा मिला है। खासकर ग्लोबल साउथ
के देशों के राजनीतिक दलों के लिए चीन का यह अनुभव उपयोगी साबित हो सकता है। आने वाले
समय में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की शासन व्यवस्था से जुड़े ये अनुभव दुनिया के विभिन्न देशों में
राजनीतिक और प्रशासनिक सुधारों पर चर्चा को नई दिशा दे सकते हैं।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)