अब डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना नहीं मिलेगा कफ सिरप केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, दवा दुकानों पर सख्ती शुरू

अब डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना नहीं मिलेगा कफ सिरप

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, दवा दुकानों पर सख्ती शुरू

देशभर में कफ सिरप से जुड़ी मौतों और गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब कफ सिरप बिना डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन के नहीं बेचा जाएगा। सरकार की शीर्ष नियामक संस्था—औषध परामर्श समिति—ने अपनी 67वीं बैठक में कफ सिरप को ओवर द काउंटर (OTC) दवाओं की सूची से हटाने का फैसला मंजूर कर लिया है।

यह निर्णय कफ सिरप की अनियंत्रित बिक्री, गलत उपयोग और मिलावटी दवाओं के कारण बच्चों में हुई मौतों के मद्देनजर लिया गया है। नई व्यवस्था के बाद देशभर के मेडिकल स्टोर केवल वही कफ सिरप बेच सकेंगे, जिसके लिए मरीज डॉक्टर की पर्ची दिखाएंगे।

क्यों उठाया गया यह कदम?

हाल ही में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत के कई मामले सामने आने से देशभर में चिंता बढ़ गई थी। मध्य प्रदेश में कफ सिरप “कोल्ड्रिफ” पीने के बाद कम से कम 24 बच्चों की मौत हो गई थी। गुजरात, राजस्थान समेत कई राज्यों में भी ऐसे मामले दर्ज किए गए। विदेशों में भी भारत में बने कफ सिरप के कारण गंभीर घटनाएं हुईं। जिसमें उज्बेकिस्तान में 68 बच्चों की मौत। इंडोनेशिया में 200 से अधिक बच्चों की मौत।

गाम्बिया में भी कई बच्चों की मौत हुई।

इन घटनाओं ने भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाया। बाद में डब्ल्यूएचओ ने भारत में बनी तीन संदिग्ध दवाओं की पहचान भी की। जिनमें श्रीसन फार्मास्युटिकल्स की कोल्ड्रिफ, रेडनेक्स फार्मास्युटिकल्स की रेस्पिफ्रेश TR,शेप फार्मा की रीलाइफ शामिल थीं। इन सभी घटनाओं ने केंद्र सरकार को सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर किया।

अभी तक कफ सिरप क्यों आसानी से मिल जाता था? भारत में अधिकतर कफ सिरप ओवर द काउंटर आता था, यानी मेडिकल स्टोर बिना किसी पर्चे के बेच देते थे। इससे दो बड़ी समस्याएं उत्पन्न हुईं अनियंत्रित उपयोग और ओवरडोज़। नकली या मिलावटी कफ सिरप की बिक्री को बढ़ावा। अक्सर लोग खांसी-जुकाम में बिना डॉक्टर की सलाह के कफ सिरप पी लेते थे। कई बार ये एंटीबायोटिक्स से बने होते हैं, जिससे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बढ़ने का खतरा रहता है।

नई व्यवस्था कैसे काम करेगी?

सरकार के नए नियम के मुताबिक कफ सिरप OTC कैटेगरी से बाहर कर दिया गया है। मेडिकल स्टोर बिना प्रिस्क्रिप्शन कफ सिरप नहीं बेच पाएंगे। ड्रग इंस्पेक्टर हर जिले में निरीक्षण करेंगे। बिना पर्चे दवा बेचने पर कानूनी कार्रवाई और लाइसेंस रद्द होने का खतरा होगा। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि लोग सही मात्रा और सही दवा डॉक्टर की सलाह पर ही लें।

डॉक्टर की पर्ची से ही मिलने के फायदे क्या हैं?

1. बच्चों की मौतों के मामलों में कमी

नकली और मिलावटी सिरप पर रोक लगेगी।

2. दवाओं का गलत उपयोग रुकेगा

लोग अपनी मर्जी से एंटीबायोटिक या स्ट्रॉन्ग कफ सिरप नहीं ले पाएंगे।

3. नशे के लिए कफ सिरप खरीदने वालों पर लगाम

कई राज्यों में युवा नशे के रूप में कुछ कफ सिरप का उपयोग कर रहे थे।

4. एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस रोकेगा

डॉक्टर तय करेंगे कि कौन सी दवा किस मरीज के लिए ठीक है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

डॉक्टरों का मानना है कि कफ सिरप में कई बार अल्कोहल, स्ट्रॉन्ग एंटीहिस्टामिन और सेडेटिव मिलाए होते हैं, जिससे बच्चों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

नई व्यवस्था से दवा का गलत सेवन और ओवरडोज़ दोनों कम होंगे।

कुल मिलाकर यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण?

कफ सिरप की अनियंत्रित बिक्री देश के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन चुकी थी।लगातार आती मौतों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिरती साख ने सरकार को कदम उठाने के लिए मजबूर किया।  अब दवा खरीदने पर सख्ती बढ़ेगी, जिससे गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित होगी।  सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि यह कदम बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर उठाया गया है।  अगर आप मेडिकल स्टोर जाते हैं, तो अब कफ सिरप लेने से पहले डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन साथ ले जाना अनिवार्य होगा। यह फैसला देश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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