इन दिनों "मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र संधि" यानी UNCCD के हस्ताक्षरकर्ता
देशों का सम्मेलन UNCCD COP17 मंगोलिया की राजधानी उलानबातर में आयोजित किया जा रहा है।
इस दौरान, चीनी प्रतिनिधिमंडल ने सम्मेलन स्थल पर "चाइना पवेलियन" नामक एक प्रदर्शनी
लगाई, जिसमें मरुस्थलीकरण नियंत्रण और रोकथाम में चीन की उपलब्धियों को विभिन्न
दृष्टिकोणों से प्रस्तुत किया गया। चीन की उपलब्धियों और व्यावहारिक अनुभव को काफी सराहना
मिली।
इस प्रदर्शनी में चित्रों, वीडियो और भौतिक प्रदर्शनों के माध्यम से "थ्री-नॉर्थ" परियोजना जैसी
नवोन्मेषी पद्धतियों और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया है। इसमें घास के मैदानों के संरक्षण और
पुनर्स्थापन, वैज्ञानिक मरुस्थलीकरण नियंत्रण और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के परिणामों में चीन के
अनुभवों को साझा किया गया है।
बता दें कि "थ्री-नॉर्थ" परियोजना चीन में तीन-उत्तरी आश्रय-पट्टी प्रणाली निर्माण परियोजना को
संदर्भित करती है। यह चीन के तीन प्रमुख क्षेत्रों – उत्तर-पश्चिम, उत्तरी चीन और पश्चिमी उत्तर-पूर्व – में
कार्यान्वित एक बड़े पैमाने की कृत्रिम वानिकी पारिस्थितिक परियोजना है। इसका उद्देश्य हवा और
रेत से होने वाले खतरों और मिट्टी के कटाव को रोकना और नियंत्रित करना तथा पारिस्थितिक
पर्यावरण में सुधार करना है।
विभिन्न देशों के अधिकारियों, विशेषज्ञों, विद्वानों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों और
मीडियाकर्मियों ने "चाइना पवेलियन" प्रदर्शनी को देखा और उन्होंने विचारों का आदान-प्रदान किया।
इसके अलावा, सम्मेलन के दौरान, चीनी प्रतिनिधिमंडल ने लगभग 20 विषयगत सह-कार्यक्रमों का
भी आयोजन किया, जिनमें "मरुस्थलीकरण नियंत्रण को सशक्त बनाने में विज्ञान: चीन की हरित
महान दीवार की अभिनव पद्धतियाँ" शामिल थीं।
चीनी राष्ट्रीय वानिकी एवं घास-मैदान प्रशासन के मरुस्थलीकरण रोकथाम एवं नियंत्रण विभाग के
निदेशक हुआंग थ्साईयी ने कहा कि चीन के कुल भूभाग का लगभग एक चौथाई हिस्सा मरुस्थलीकृत
है। आधे सदी से अधिक के निरंतर प्रयासों के बाद, "रेत आगे बढ़ती है, जबकि लोग पीछे हटते हैं" से
"हरियाली आगे बढ़ती है और रेत पीछे हटती है" की ओर एक ऐतिहासिक परिवर्तन हासिल किया
गया है।
इस अधिकारी के अनुसार, चीन में मरुस्थलीकृत और रेतीली भूमि का क्षेत्रफल लगातार कम होता
जा रहा है, जिससे चीन भूमि क्षरण में "शून्य वृद्धि" हासिल करने वाला विश्व का पहला देश बन गया
है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)