संघ के 100 साल पूरे होने के बाद भविष्य की दिशा पर टिकी निगाहें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का विजयादशमी उत्सव इस बार ऐतिहासिक और संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। महाराष्ट्र के नागपुर स्थित रेशिमबाग मैदान में 20 अक्टूबर 2026 को सुबह 7:40 बजे आयोजित होने वाले कार्यक्रम में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत का संबोधन प्रस्तावित है। इस कार्यक्रम में दैनिक जागरण के मुख्य संपादक संजय गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इसके अलावा, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और मुंबई में इजरायल के महावाणिज्यदूत यानिव रेवाच को भी आमंत्रित किए जाने की जानकारी दी गई है।
संघ के शताब्दी वर्ष की पूर्णता और आगामी यात्रा की दिशा के लिहाज से इस आयोजन पर देश की नजरें टिकी हैं। हालांकि, आमंत्रित अतिथियों की उपस्थिति को लेकर किसी राजनीतिक या अंतरराष्ट्रीय संदेश का निष्कर्ष निकालने से पहले कार्यक्रम की वास्तविक गतिविधियों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिकाओं को देखना जरूरी होगा।
विजयादशमी का संघ के लिए विशेष महत्व
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने वर्ष 1925 में नागपुर में विजयादशमी के दिन की थी। इसलिए संघ के लिए विजयादशमी केवल धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व नहीं, बल्कि स्थापना दिवस का भी महत्वपूर्ण अवसर है। नागपुर संघ की जन्मभूमि है, इसीलिए यहां के रेशिमबाग मैदान में होने वाले कार्यक्रम का ऐतिहासिक और संगठनात्मक महत्व विशेष माना जाता है।
संघ के सौ साल के सफर में संगठन का विस्तार, शाखाओं की व्यवस्था, स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण और सामाजिक क्षेत्र में किए गए विभिन्न कार्य महत्वपूर्ण रहे हैं। शताब्दी वर्ष के दौरान संघ ने अपने विचारों और कार्यपद्धति को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने पर जोर दिया है।
मोहन भागवत के संबोधन पर रहेगी नजर
विजयादशमी उत्सव में सरसंघचालक का संबोधन हर साल कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण होता है। इसमें संघ का दृष्टिकोण, समकालीन सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर उसकी सोच तथा संगठन की प्राथमिकताएं सामने आती हैं।
इस बार भी यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि डॉ. मोहन भागवत अपने संबोधन में सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता, स्वदेशी, नागरिकों की सामाजिक जिम्मेदारी और संगठन के विस्तार जैसे विषयों पर क्या विचार रखते हैं। हालांकि, ये संभावित विषय हैं। कार्यक्रम से पहले यह दावा नहीं किया जा सकता कि संघ प्रमुख अपने भाषण में किन मुद्दों को प्रमुखता देंगे।
शताब्दी वर्ष के अनुभवों के आधार पर संघ अपनी आगामी कार्ययोजना और प्राथमिकताओं को किस तरह प्रस्तुत करता है, यह भी उत्सुकता का विषय रहेगा।
जगदीप धनखड़ और इजरायली महावाणिज्यदूत की मौजूदगी क्यों चर्चा में?
इस बार कार्यक्रम के आमंत्रित अतिथियों को लेकर भी चर्चा है। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और मुंबई में इजरायल के महावाणिज्यदूत यानिव रेवाच को आमंत्रित किए जाने की जानकारी सामने आई है। दैनिक जागरण के मुख्य संपादक संजय गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
धनखड़ का पूर्व उपराष्ट्रपति के रूप में सार्वजनिक जीवन का अनुभव और इजरायल के राजनयिक प्रतिनिधि की मौजूदगी कार्यक्रम को अतिरिक्त ध्यान दिलाती है। हालांकि, केवल किसी व्यक्ति को आमंत्रित किए जाने के आधार पर उसके राजनीतिक संदेश या अंतरराष्ट्रीय प्रभाव के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए कार्यक्रम में उनकी वास्तविक उपस्थिति, भूमिका और संबोधन से जुड़ी जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
संघ के अगले सौ साल की दिशा क्या होगी?
इस आयोजन को समझने के लिए तीन पहलुओं पर नजर रखना जरूरी है। पहला, शताब्दी वर्ष के दौरान संघ ने अपने कार्यों और विचारों को लेकर जो प्राथमिकताएं सामने रखीं, उनका आगे किस रूप में विस्तार होता है। दूसरा, सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर संघ प्रमुख का दृष्टिकोण क्या रहता है। तीसरा, संगठन अपनी शाखाओं, स्वयंसेवकों और सामाजिक गतिविधियों को लेकर भविष्य की क्या दिशा प्रस्तुत करता है।
संघ की स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने के बाद विजयादशमी उत्सव केवल वार्षिक परंपरा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह संगठन के अतीत, वर्तमान और भविष्य की प्राथमिकताओं को समझने का अवसर भी होगा। नागपुर के रेशिमबाग मैदान में होने वाला यह आयोजन संघ के ऐतिहासिक सफर और आगामी दिशा को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। डॉ. मोहन भागवत के संबोधन, घोषित अतिथियों की मौजूदगी और संगठन की भविष्य की प्राथमिकताओं से जुड़ी वास्तविक घोषणाएं ही इस कार्यक्रम के महत्व को स्पष्ट करेंगी।





