यूपी के इस श्मशान घाट में साजिश…50 लाख की बीमा राशि की खातिर प्लास्टिक के पुतले का अंतिम संस्कार…साजिश के बाद अंतिम संस्कारी की ये नई गाइडलाइन जारी…

conspiracy at this crematorium in Uttar Pradesh plastic effigy was cremated for the sake of an insurance amount of Rs 50 lakh

यूपी के इस श्मशान घाट में साजिश…50 लाख की बीमा राशि की खातिर प्लास्टिक के पुतले का अंतिम संस्कार…साजिश के बाद अंतिम संस्कारी की ये नई गाइडलाइन जारी…

उत्तरप्रदेश के हापुड़ स्थित गढ़मुक्तेश्वर के बृजघाट श्मशान घाट से एक ऐसी सनसनीखेज साजिश का खुलासा हुआ है। जिसने पुलिस से लेकर स्थानीय लोगों तक को हैरान कर दिया। 27 नवंबर को एक i20 कार में चार लोग कथित “मृतक” को लेकर श्मशान पहुंचे। श्मशान की परंपरा के अनुसार लकड़ी, घी और पूजा सामग्री तो उन्होंने खरीदी, लेकिन किसी पुरोहित को नहीं बुलाया। चारों ने खुद ही चिता सजा ली और कार में रखी ‘लाश’ को ले जाने की तैयारी करने लगे। यहीं से संदेह की शुरुआत हुई। श्मशान कर्मचारियों ने देखा कि चारों बेहद घबराए हुए थे और किसी को चिता के पास आने नहीं दे रहे थे। जब कर्मचारियों ने नियमों के अनुसार शव को नहलाने की बात कही, तो उन्होंने बहाना बनाकर मना कर दिया। शक बढ़ा तो कर्मचारियों ने जोर देकर कार का दरवाजा खुलवाया। जैसे ही ‘मुर्दा’ बाहर निकाला गया, सब दंग रह गए—वह असली शव नहीं बल्कि कपड़ों से भरा एक पुतला था।

श्मशान घाट में पुतले वाली साजिश का पर्दाफाश
अब अंतिम संस्कार से पहले अनिवार्य ID वेरिफिकेशन

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में स्थित ब्रजघाट श्मशान घाट पर एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया जिसने प्रशासन को पूरी तरह चौकन्ना कर दिया। बीमा क्लेम ठगने के लिए दो युवकों ने प्लास्टिक के पुतले को ‘मृतक’ बताकर उसका अंतिम संस्कार कराने की कोशिश की। योजना इतनी डरावनी और संगठित थी कि मृत दिखाए जा रहे व्यक्ति को जिंदा बताकर कंपनी से बीमा राशि हड़पने का पूरा षड्यंत्र रचा गया था। लेकिन श्मशान कर्मियों की सतर्कता से खेल बिगड़ गया और एक बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। अब इस मामले के बाद प्रशासन ने नई सख्त गाइडलाइन लागू कर दी है।

दिल्ली के युवकों की हैरान करने वाली कोशिश

गुरुवार को दिल्ली से आए दो युवक—कमल सोमानी और आशीष खुराना, एक कार में प्लास्टिक का पुतला लेकर ब्रजघाट श्मशान घाट पहुंचे। उन्होंने श्मशान कर्मचारियों को बताया कि पुतला उनका ‘रिश्तेदार अंशुल’ है, जिसकी दिल्ली के अस्पताल में मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद वे सीधे अंतिम संस्कार करने आए हैं। शुरुआत में सब कुछ सामान्य लगा, लेकिन जैसे ही श्मशान कर्मचारी नितिन ने शव उतारने की कोशिश की, उसे वजन पर शक हुआ—क्योंकि ‘शव’ बेहद हल्का था।

नितिन ने मृतक का चेहरा दिखाने की मांग की, लेकिन दोनों युवक बहाने बनाते रहे। पोस्टमार्टम में चेहरा खराब हो गया है। परिवार नहीं चाहता कि कोई चेहरा देखे। बहाने बढ़ते गए और शक गहराता गया। आखिरकार कर्मचारी नितिन ने खुद कफन का कपड़ा हटाया, और इसके बाद जो दिखा, उससे सभी हैरान रह गए—कफन के नीचे इंसान नहीं, बल्कि प्लास्टिक का पुतला था। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई और दोनों युवकों को हिरासत में ले लिया गया।

बीमा क्लेम ठगी की 50 लाख की साजिश उजागर

पूछताछ में कमल सोमानी ने कबूल किया कि उसने 50 लाख रुपये के कर्ज के बोझ से परेशान होकर यह योजना बनाई थी। उसने अपने दोस्त अंशुल के नाम पर बीमा करवाया था और योजना यह थी कि पुतले को अंशुल की लाश बताकर जलाया जाए। बीमा कंपनी को मौत प्रमाण पत्र भेजा जाए। 50 लाख रुपये का बीमा क्लेम हासिल किया जाए। यह पूरा प्लान ‘शव’ जलते ही सफल माना जाता। लेकिन सतर्कता ने साजिश को नाकाम कर दिया।
अब नई व्यवस्था—श्मशान घाट पर ID वेरिफिकेशन अनिवार्य
घटना सामने आते ही जिला प्रशासन और नगर पालिका हरकत में आ गई। डीएम अभिषेक पांडे ने तुरंत नई गाइडलाइन जारी करते हुए स्पष्ट किया कि अब श्मशान घाट पर बिना पहचान सत्यापन के कोई अंतिम संस्कार नहीं होगा।

नई व्यवस्था के मुख्य बिंदु

1. मृतक का चेहरा दिखाना अनिवार्य

चेहरे को कफन से हटाकर दिखाया जाएगा, ताकि कर्मचारी सत्यापन कर सके।

2. पहचान पत्र का मिलान अनिवार्य

– आधार कार्ड, वोटर ID, पैन, राशन कार्ड आदि में से कोई पहचान दस्तावेज दिखाना जरूरी।
– पहचान पत्र के आधार पर ही रजिस्टर में मृतक की एंट्री दर्ज होगी।

3. बिना पहचान के दाह संस्कार की अनुमति नहीं

यदि पहचान प्रमाण नहीं है, तो अंतिम संस्कार रोक दिया जाएगा जब तक वैरिफिकेशन पूरा न हो जाए।

श्मशान घाट की सुरक्षा बढ़ेगी — नई संरचना तैयार

इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक कमियों को उजागर किया। इसलिए डीएम ने श्मशान परिसर में बड़े बदलाव के निर्देश दिए:

1. एक मुख्य प्रवेश द्वार बनाया जाएगा

अब किसी भी वाहन या शव को सिर्फ एक एंट्री पॉइंट से अंदर आने की अनुमति होगी। इससे निगरानी मजबूत होगी।

2. पूरी चारदीवारी की जाएगी

ताकि कोई संदिग्ध वाहन, व्यक्ति या सामान बिना जांच के अंदर न ले जाया जा सके।

3. दाह संस्कार प्रमाण पत्र पहचान की पुष्टि के बाद ही जारी होगा

नगर पालिका अब बिना वैरिफिकेशन किसी को भी प्रमाण पत्र नहीं देगी। यह नियम भविष्य में किसी भी तरह के फर्जीवाड़े को रोकेगा।

4. लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई

डीएम ने चेतावनी दी कि यदि किसी भी कर्मचारी ने पहचान सत्यापन में लापरवाही की, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत में बीमा क्लेम से जुड़े फर्जी मामलों की संख्या बढ़ रही है। लेकिन किसी जिंदा इंसान को ‘मृत’ दिखाकर उसका पुतला जलाना—यह अपने आप में बेहद खतरनाक और आपराधिक कृत्य है। इससे बीमा कंपनियों को करोड़ों का नुकसान हो सकता है। पुलिस जांच को गुमराह किया जा सकता है। एक जिंदा इंसान को कागज पर ‘मार दिया’ जाता है। क्राइम पैटर्न संगठित गिरोहों तक जुड़ सकता है। इस घटना ने प्रशासन को आगाह कर दिया है कि श्मशान घाट जैसे संवेदनशील स्थलों पर भी सुरक्षा की जरूरत है।

एक साजिश ने बदल दी श्मशान घाट की व्यवस्था

ब्रजघाट का यह मामला सिर्फ एक फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि अपराधी किस हद तक जा सकते हैं—पुतले को शव बताकर जला देना, बीमा राशि हड़पना और किसी को जिंदा होते हुए भी मृत घोषित कर देना। इसलिए जिला प्रशासन द्वारा लागू नई गाइडलाइन न सिर्फ महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पूरे प्रदेश के लिए मॉडल बन सकती है। अब श्मशान घाट पर पहचान सत्यापन, सुरक्षा जांच और रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी, ताकि भविष्य में कोई भी अपराधी इस तरह की साजिश न रच सके। पुलिस जांच में सामने आया कि यह 50 लाख रुपये की बीमा धोखाधड़ी की एक सोची-समझी साजिश थी। आरोपी खुद को मृत दिखाकर बीमा क्लेम करना चाहते थे और इसके लिए पुतले का अंतिम संस्कार रचाया गया था। श्मशान कर्मचारियों की सूझबूझ से यह बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ में आया। पुलिस ने चारों आरोपियों को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है।

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